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अब GST का बड़ा हिस्सा अपने कर्मचारियों से वसूलने की फिराक में है कंपनियां 

Publish Date: April 16 2018 02:59:09pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : अब आपकी सैलरी पर वस्तु एवं सवा कर (जीएसटी) की मार पडऩे वाली है। एक मीडिया समूह ने दावा किया है कि इस असर के चलते देशभर की कंपनियां अपने कर्मचारियों के सैलरी पैकेज में बड़े बदलाव की तैयारी में हैं क्योंकि अब कर्मचारी की सैलरी का ब्रेकअप कंपनियों पर भारी पड़ेगा। शॉपिंग और रेस्टोरेंट बिल के बाद इसे आम आदमी के लिए बड़ा झटका बताया जा रहा है। खबर के मुताबिक कंपनियां अपने कर्मचारियों से जीएसटी का बड़ा हिस्सा वसूलने की योजना बना रही है।

खबर के अनुसार हाउस रेंट, मोबाइल और टेलिफोन बिल, हेल्थ इंश्योरेंस, मेडिकल बिल, ट्रांस्पोर्टेशन जैसे सैलरी का ब्रेकअप यदि जीएसटी के दायरे में आ जाएगा तो कंपनियों को आपकी सैलरी पैकेज को नए सिरे से निर्धारित करना होगा। टैक्स जानकारों ने कंपनियों को सलाह देना शुरू कर दिया है कि वह अपने एचआर डिपार्टमेंट को कर्मचारी के सैलरी ब्रेकअप को नए सिरे से समझने के लिए कहे। 

गौरतलब है कि अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग (एएआर) के हाल में दिए एक फैसले के बाद कंपनियां कर्मचारी की सैलरी को लेकर सजग हो गई हैं और वह अपनी टैक्स देनदारी बचाने के लिए नए सैलरी ब्रेकअप पर काम कर रही हैं। गौरतलब है कि एएआर ने एक खास मामले में फैसला दिया है कि कंपनियों द्वारा कैंटीन चार्जेस के नाम पर कर्मचारी की सैलरी से कटौती जीएसटी के दायरे में होगी। इस फैसले के बाद जानकारों का मानना है कि कंपनियों द्वारा कर्मचारियों की दी जा रही कई सुविधाएं जिसके ऐवज में सैलरी में कटौती की जाती है को जीएसटी के दायरे में कर दिया जाएगा। 

फिलहाल कंपनियां कर्मचारी को कॉस्ट टू कंपनी के आधार पर सैलरी पैकेज तैयार करती थी और कई सेवाओं के ऐवज में कटौती को सैलरी का हिस्सा बनाकर दिया जाता है लेकिन अब यदि इसे जीएसटी के दायरे में लिया जाता है तो कंपनियां किसी कर्मचारी की कॉस्ट टू कंपनी को ही आधार रखते हुए उसके ब्रेकअप में बदलाव करेंगी जिससे कंपनी की टैक्स देनदारी पर कोई प्रभाव न पड़े।

टैक्स जानकारों के मुताबिक कर्मचारियों की सैलरी में कई ऐसे ब्रेकअप शामिल रहते हैं जिनके ऐवज में कंपनियां सेवा प्रदान करती है और कर्मचारियों को इन सेवाओं के ऐवज में पेमेंट बिना किसी रसीद के मिल जाता था। इसके चलते टैक्स विभाग के लिए इन सेवाओं पर जीएसटी का अनुमान लगाना मुश्किल होता है और कंपनियां अपनी सुविधा पर अपना टैक्स बचाने के लिए कर्मचारियों की सैलरी ब्रेकअप तैयार करती हैं। लिहाजा, कंपनी द्वारा कर्मचारी को दी जा रही सेवाएं यदि जीएसटी के दायरे में आती हैं तो कंपनियों की कोशिश होगी जीएसटी को भी कर्मचारी के कॉस्ट टू कंपनी में जोड़ दे जिससे उसकी टैक्स देनदारी पर असर न पड़े।

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