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मासूम चिराग बोला, मां! केश कत्ल कराने की कीमत पर नहीं चाहिए पक्की नौकरी

Publish Date: February 12 2018 07:48:04pm

करनाल (उत्तम हिन्दू न्यूज): मां ! देखो, मैंने अपने बाल कटवा लिए हैं। आप रहने दो। उन्हें समझना होगा तो इससे ही समझ जाएंगे। नहीं मां। मेरी प्यारी मां। तेरे बाल बहुत अच्छे हैं। इन्हें कत्ल मत करा। मैं आपसे कुछ नहीं मांगूंगा। केश कत्ल कराने की कीमत पर हमें नहीं चाहिए आपकी पक्की नौकरी। हम गरीबी में ही जीवन काट लेंगे। मां आप रहने दो। अंकल आप मेरी मां को यहां से उठा दो। कोई है, जो मेरी बात मान ले।
वह इस कदर बिलख पड़ा कि एक बार तो उसकी माता मैना के केश कत्ल करने वाले के हाथ भी कांप गए, लेकिन ...। बाकी के शब्द इस बालक की आंखों रास्ते बह निकले। कुछ न करने की बेबसी को मु_ी बांधे बिलखते नन्हे मासूम को देख वहां हर आंखों में अश्रुधारा बह निकली। साथ में गुस्से से लाल भी थी। चेहरे पर सरकार के खिलाफ नाराजगी साफ झलक रही थी।
आठ साल का चिराग देश की रक्षा में प्राणों की आहूति देने वाले शहीद बलवंत सिंह का बेटा है। उसकी माता महेंद्रगढ़ के गांव कमानियां निवासी मैना यादव सिरसा जिले के रतिया हलके के गांव बनी के सरकारी स्कूल में गेस्ट टीचर है। मैना गेस्ट टीचर को नियमित करने व समान काम,समान वेतन के लिए करनाल में प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए बेटे को साथ लेकर पहुंची थीं।
मैना ने बताया कि उसका पति देश पर शहीद हो गया। शहादत के वक्त तो कई नेता घर पहुंचव े थे। कई घोषणाएं की गई थीं,लेकिन बाद में सब भूल गए। नौकरी के लिए उन्होंने उम्मीद की हर दहलीज पर दस्तक दी, लेकिन कहीं कोई न्याय नहीं मिला। इस वजह से उन्हें रयह कदम उठाना पड़ा। मैना ने बताया कि एक महिला की ओर से केश कत्ल करना बहुत दुखद है, लेकिन मजबूरीवश उन्हें यह कदम उठाना पड़ रहा है, क्योंकि इसके सिवाय कोई चारा भी नहीं है।
मैं बड़ा होता तो मां यह दिन न देखती
मासूम चिराग ने बताया कि यदि वह बड़ा होता तो अपनी मां अपने केश कत्ल न कराने पड़ते। वह चाहे कुछ भी कर लेता, लेकिन यह नौबत न आने देता। इस वाकये ने बालक की सारी मासूमियत छीनकर उसे उम्र से काफी बड़ा बना दिया। वह ज्यादा बात तो नहीं कर पा रहा था, लेकिन हर किसी को ऐसे देख रहा था, मानो यह बोल रहा हो, आखिर मेरी मां का कसूर क्या है?
महेंद्रगढ़ के गांव कमानियां निवासी बलवंत वर्ष 2016 में कश्मीर में शहीद हुए थे। अपने पीछे वह पत्नी मैना और इकलौता बेटा चिराग छोड़ गए थे। मैना उनके शहीद होने से पहले से सिरसा के स्कूल में गेस्ट टीचर कार्यरत थीं।

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