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पश्चिमी देशों से संबंध सुधारने का हर संभव प्रयास: रूस

Publish Date: April 15 2018 09:12:10pm

मॉस्को (उत्तम हिन्दू न्यूज)- अमेरिका और मित्र देशों के सीरिया पर हमले से बौखलाए रूस ने आज अपने तेवर शांत करते हुए कहा कि वह पश्चिमी देशों के साथ अपने सम्बंधों को सुधार के लिए हर संभव प्रयास करेगा।  रिपोर्टों के अनुसार उप विदेश मंत्री सेरगेई रियाब्कोव ने यहां यह बात कही। उप विदेश मंत्री ने सीरिया के कथित रासायनिक हथियारों से अपने नागरिकों को मौत के घाट उतारने के आरोप में कल अमेरिका के नेतृत्व में फ्रांसीसी और ब्रितानी सेनाओं के हमले के बाद यह बात कही। इससे पहले रूस ने अमेरिकी नीत सेनाओं को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि हमलावर देशों को इसका नतीजा भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस हमले से अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन हुआ है और हमला करने वाले देश अपराधी की श्रेणी में आते हैं।

रूसी मंत्री ने कहा कि सीरिया के खिलाफ अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के मिसाइल हमलों की भर्त्सना करने के लिए रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में समर्थन नहीं जुटा पाया। सीरिया के डूमा में पिछले हफ्ते संदिग्ध रासायनिक हमले के जबाव में अमेरिकी नीत सेना के मिसाइल हमलों को रूस ने ‘गुंडाराज’ करार दिया था। रूसी राजदूत वसीली नेबेंज़िया ने कहा कि ये हमला अंतरराष्ट्रीय क़ानून का घोर उल्लंघन है। अमेरिकी अगुवाई में सीरिया में किए गए पश्चिमी देशों के हवाई हमलों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से ऐसे संकेत मिले हैं कि अगर वहां रासायनिक हथियारों का फिर इस्तेमाल किया गया तो ऐसे हमले दोहराए जाएंगे।

अमेरिका का कहना है कि सीरिया में सात अप्रैल को राष्ट्रपति बशर अल असद सरकार ने रासायनिक हमलों में क्लाेरीन गैस का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया था और इसी के जवाब में ये हमले किए गए हैं। यह भी माना जा रहा है कि उन हमलों में सेरिन गैस का भी इस्तेमाल किया गया था जो काफी घातक है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने कल एक बयान में कहा कि अभी तक जो भी प्रमाण मिले हैं वे इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि सीरिया सरकार ने बड़े पैमाने पर रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया था। अमेरिकी आर्म्स कंट्रोल एसोशिसन के विशेषज्ञ डेरिल किमबाल ने बताया कि पश्चिम एशिया के हर शहर जहां पानी की सफाई होती है वहां क्लोरीन ताे अवश्य मिलाई ही जाती है और यह आम आैद्योगिक रसायन है। लेकिन रासायनिक हमलों में क्लोरीन गैस का इस्तेमाल चिंता का विषय है। 

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