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चारा घोटाला: लालू यादव को साढ़े तीन साल की सजा, 10 लाख रुपए जुर्माना 

Publish Date: January 06 2018 04:35:37pm

रांची (उत्तम हिन्दू न्यूज): अविभाजित बिहार में अरबों रुपये के बहुचर्चित चारा घोटाले के एक मामले में आज केंद्रीय जांच ब्यूरो सीबीआई की विशेष अदालत ने राष्ट्रीय जनता दल राजद अध्यक्ष एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को साढ़े तीन वर्ष की कारावास और दस लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। 

विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत ने देवघर कोषागार से अवैध निकासी के नियमित मामले 64ए/96 में दोषी करार दिये गये यादव समेत 16 अभियुक्तों की सजा के बिंदुओं पर सुनवाई पूरी करने के बाद यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से यह सजा सुनाई है। इस मामले में राजद अध्यक्ष को भारतीय दंड विधान की धारा 120बी, 420, 467, 471 एवं 477बी तथा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(2), 13(1) (सी) (डी) के तहत साढ़े तीन साल कारावास के साथ ही 10 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने की राशि नहीं देने पर उन्हें एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। राजद अध्यक्ष यादव को भारतीय दंड विधान की धारा 120बी, 420, 467, 471 एवं 477बी के तहत साढ़े तीन साल कारावास और पांच लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है वहीं भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(2) एवं 13(1)(सी)(डी) के तहत साढ़े तीन साल सजा और पांच लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी इसलिए यादव को साढ़े तीन साल ही कारावास में काटना होगा जबकि उन्हें 10 लाख रुपये जुर्माना देना होगा। विशेष अदालत ने मामले के अन्य अभियुक्त पूर्व सांसद जगदीश शर्मा को सात साल कारावास और 20 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर उन्हें दो वर्ष की सजा अलग से भुगतनी होगी।

वहीं, पूर्व सांसद आर. के. राणा को साढ़े तीन साल कारावास और 10 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। अर्थदंड की राशि नहीं देने पर उन्हें एक साल की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी पड़ेगी। मामले के अभियुक्त पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी फूलचंद सिंह, महेश प्रसाद और बेक जूलियस को साढ़े तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई है। साथ ही इन तीनों पर पांच-पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर उन्हें छह महीने कारावास की सजा अलग से भुगतनी होगी। वहीं, पूर्व ट्रेजरी अधिकारी सुबीर भट्टाचार्य को साढ़े तीन साल और 10 लाख रुपये जुर्माने की सजा हुई है। यह राशि नहीं देने पर उन्हें एक साल की सजा अलग से काटनी होगी।

ये है चारा घोटाला
चारा घोटाले का यह मामला देवघर कोषागार से 89 लाख रुपये से अधिक की अवैध निकासी का है। सीबीआई ने इस मामले में 15 मई 1996 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी तथा 28 मई 2004 को आरोप पत्र दायर किया था। इस मामले में 26 सितंबर 2005 को आरोप गठन किया गया था। इस मामले में पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने पशु चारा और दवा के नाम पर अवैध निकासी की थी। इसके लिए फर्जी आवंटन आदेश का इस्तेमाल किया था। जांच से बचने के लिए टुकड़ों-टुकड़ों में 10 हजार रुपये से कम का बिल ट्रेजरी में पेश किया था।

इस मामले में पिछले वर्ष 23 दिसंबर को अदालत ने राजद अध्यक्ष यादव, पूर्व सांसद जगदीश शर्मा, पूर्व विधायक आर. के. राणा, भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी फूलचंद सिंह, बेक जुलियस एवं महेश प्रसाद के अलावा अधिकारी कृष्ण कुमार प्रसाद, सुबीर भट्टाचार्य,सप्लायर और ट्रांसपोर्टर त्रिपुरारी मोहन, सुशील सिंह, सुनील सिंह, राजाराम जोशी, गोपीनाथ दास, संजय अग्रवाल, ज्योति कुमार झा और सुनील गांधी को भारतीय दंड विधान की धारा 420, 467, 468, 477 ए और 120 बी के तहत दोषी करार दिया था। वहीं, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र, पूर्व पशुपालन मंत्री विद्यासागर निषाद, लोक लेखा समिति के तत्कालीन अध्यक्ष ध्रुव भगत, प्रशासनिक अधिकारी ए. सी. चौधरी के अलावा सप्लायर और ट्रांसपोर्टर सरस्वती चंद्रा तथा साधना सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था।



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