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भाजपा की जीत

Publish Date: December 19 2017 05:47:13pm

हिमाचल प्रदेश तथा गुजरात में भारतीय जनता पार्टी की जीत का श्रेय भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व विशेषतया पार्टी अध्यक्ष अमित साह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जाता है। इसके साथ-साथ भाजपा द्वारा अपनाई नीति और पार्टी के संगठन को जाता है। दोनों प्रदेशों के विधानसभा चुनावों में प्रदेश स्तर के नेताओं का महत्व एक सीमा से अधिक नहीं था। गुजरात के मुख्यमंत्री अपनी सीट तो जीत गये हैं, लेकिन वह पुन: मुख्यमंत्री बनते हैं या नहीं यह भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व पर निर्भर है। चुनाव दौरान मुख्यमंत्री विजय रुपाणी को कोई विशेष महत्व भी नहीं दिया गया।

गुजरात में भाजपा की यह लगातार छठी विजय है। इस बार सीटों की संख्या पहले से बेशक कम है लेकिन भाजपा का मत प्रतिशत पहले से अधिक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस की विशेषतया राहुल गांधी तथा उनके सहयोगी क्षेत्रीय युवा नेताओं की चुनौती को गंभीरता से लेते हुए गुजरात के विधानसभा चुनाव को पार्टी के साथ अपनी हार जीत में बदल दिया। शायद इसी बात का लाभ भाजपा को गुजरात में मिला है।
गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा जिस तरह प्रचार अभियान चलाया गया उसका लाभ कांग्रेस को यह मिला कि कांग्रेस की सीट संख्या भी बढ़ी और मत प्रतिशत भी पहले से अधिक हुआ। चुनाव परिणाम आने से पहले कांग्रेस तथा उनके सहयोगी नेता हार्दिक पटेल ने इवीएम पर प्रश्न चिन्ह लगाया था और चुनाव परिणाम आने के बाद भी वह ईवीएम पर ही उंगली उठा रहे हैं। इन आरोपों में कोई दम नहीं है, चाहिए तो यह कि कांग्रेस व उनके सहयोगी अपनी हार के कारण जानने के लिए आत्मचिंतन करें। कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कहा है कि कांग्रेस को अपना संगठन मजबूत करने की आवश्यकता है, इस बात में दम है। राहुल गांधी अब पार्टी अध्यक्ष हैं और अध्यक्ष बनते ही उनकी झोली में दो बड़ी हार आई है। गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने जो आक्रामक रुख दिखाया वह हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान नहीं देखने को मिला। राहुल गांधी और कांग्रेस को समझना होगा कि 2018 में होने वाले विभिन्न प्रदेशों के विधानसभा चुनावों और 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों में भी राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं को अभी से आक्रामक नीति अपनाने की आवश्यकता है। अगर आधे-अधूरे मन से कांग्रेस भावी होने वाले चुनावों के लिए कार्य करती है तो फिर कांग्रेस तथा राहुल गांधी दोनों के लिए राजनीतिक मुश्किलें बढऩे की ही संभावनाएं हैं।

कांग्रेस को यह मानकर कार्य करना होगा कि भाजपा नेतृत्व, नीति और संगठन स्तर पर उस से बेहतर स्थिति में है। किसी भी व्यक्ति या संगठन की सफलता में उपरोक्त तीन बातों का विशेष महत्व होता है। इसके साथ पुरुषार्थ और आत्मविश्वास जब जुड़ जाते हैं तो सफलता यकीनी हो जाती है। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी उपरोक्त मापदंड पर पूरी उतर रही है। इसी कारण एक के बाद एक चुनावी जीत उन के दामन छू रही है। राहुल गांधी को भी उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए ही भावी चुनावों के लिए अपनी रणनीति बनानी होगी, मात्र आरोप लगाने से कुछ नहीं होने वाला।

हिमाचल प्रदेश में भाजपा की जीत का अंदाजा विधानसभा चुनावों की घोषणा से पहले प्रदेश में बने माहौल से हो गया था। लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने चुनाव घोषणा होने तक चुनावी माहौल इस तरह बना दिया था कि शायद प्रदेश में कांटे की टक्कर होने जा रही है, लेकिन चुनाव परिणाम बताते हैं कि ऐसा कुछ नहीं था। विपक्ष के नेता प्रेम कुमार धूमल को जब भाजपा द्वारा भावी मुख्यमंत्री के रूप में घोषित किया गया तो प्रदेश की राजनीति में और गर्माहट आ गई थी। लेकिन प्रेम कुमार धूमल और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतपाल सत्ती के चुनाव हार जाने के कारण हिमाचल में भाजपा की जीत के बाद खुशी के बजाय एक सन्नाटे का माहौल है और यह सही भी है, क्योंकि धूमल का प्रदेश की राजनीति में एक विशेष स्थान है। धूमल और सत्ती के चुनाव हारने के बाद पार्टी के भीतर तथा प्रदेश की राजनीति में भी एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। प्रेम कुमार धूमल की हार का प्रभाव उनके सांसद बेटे अनुराग ठाकुर के राजनीतिक भविष्य पर भी पड़ सकता है, धूमल परिवार की राजनीतिक मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। प्रेम कुमार धूमल और सत्ती दोनों को अपनी-अपनी हार को लेकर आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है। वीरभद्र और उनके बेटे विक्रमादित्य की जीत अवश्य हुई हैं लेकिन जिस जीत की आशा राजा परिवार लगाये हुए थे वह उस तरह की नहीं है। राजा वीरभद्र ने तो राजनीतिक सन्यास लेने की बात कही थी लेकिन बेटे विक्रमादित्य को प्रदेश की राजनीति में एक अच्छी शुरुआत और मजबूत आधार मिले अब यही राजा वीरभद्र का लक्ष्य होना चाहिए। प्रदेश कांग्रेस में आंतिरक कलह कम हो यह बात कांग्रेस के नये चुने अध्यक्ष राहुल गांधी की प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि 2019 के लोकसभा चुनावों में तभी राहुल कुछ अच्छे होने की आशा लगा सकते हैं।

उपरोक्त दोनों प्रदेशों के विधानसभा चुनावों में यह पुन: साबित किया है कि देश के जन का भाजपा और कांग्रेस में ही भरोसा है। इस कारण दोनों राजनीतिक दलों की जनता प्रति तथा लोकतंत्र प्रति जिम्मेवारी भी बढ़ जाती है। आशा है भविष्य में दोनों दल अन्य दलों के साथ मिलकर अपनी जिम्मेवारी को ईमानदारी से निभाएंगे। भाजपा की जिम्मेवारी अब पहले से अधिक हो गई है।


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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