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देवभूमि में जयराम

Publish Date: December 26 2017 01:37:22pm

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा की भारी जीत के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के हार जाने के कारण पार्टी के भीतर भावी मुख्यमंत्री को लेकर एक अनिश्चितता का दौर बना हुआ था। लेकिन इस अनिश्चितता के दौर में पांचवी बार बने विधायक जयराम का नाम अवश्य सामने आ गया था लेकिन हिमाचल भाजपा में उत्पन्न हुई स्थिति को ध्यान में रखते हुए भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा को टाल दिया। प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए और जन भावना तथा लोकतांत्रिक परम्पराओं का सम्मान करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने मंडी के सराज क्षेत्र से विजयी विधायक जयराम को देवभूमि का नया मुख्यमंत्री घोषित कर दिया। इस घोषणा के साथ प्रदेश की राजनीति में जहां अनिश्चितता का दौर समाप्त हुआ वहीं एक नये राजनीतिक दौर का आगाज भी हो गया है।

मंडी क्षेत्र से चाहे कांग्रेस पार्टी हो या भाजपा दोनों के नेता समय-समय पर मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी करते रहे हैं। लेकिन उन सबकी दावेदारी तब कमजोर हो गई जब मंडी क्षेत्र के ही अन्य विधायक उन सबका विरोध कर देते। पं. सुखराम, कौल सिंह या इनसे पहले कर्म सिंह ठाकुर सब के सब आत्मघात का ही शिकार हुए हैं। इन सबसे भाग्यशाली रहे हैं जयराम ठाकुर जो 27 दिसम्बर को शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सहित भाजपा शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री भी भाग लेंगे।

उपरोक्त लोगों की उपस्थिति से ही हिमाचल में हो रहे राजनीतिक बदलाव के महत्व को समझा जा सकता है। हिमाचल प्रदेश की राजनीति पिछले चार दशकों से शांता कुमार, वीरभद्र सिंह और प्रेम कुमार धूमल के गिर्द ही घूमती रही। उपरोक्त तीनों नेताओं को अपनी-अपनी पार्टी के भीतर व बाहर से चुनौतियां भले ही मिलती रहीं लेकिन यह अपने-अपने राजनीतिक किलों में मजबूत रहे और अपनी राजनीतिक गोटियां सफलतापूर्वक खेलते रहे और खेल रहे हैं। लेकिन प्रकृति के खेल पर तो कोई काबू नहीं पा सका और न पा सकेगा। कांग्रेस में वीरभद्र को चुनौती देने वाले तो हारे ही साथ में पार्टी भी हार गई। भाजपा में शांता कुमार को आयु के आधार पर किनारे कर दिया गया लेकिन प्रेम कुमार धूमल स्वयं चुनाव हार गये जो पार्टी द्वारा घोषित भावी मुख्यमंत्री थे।

जयराम ठाकुर के जीवन संघर्ष के दौरान तथा राजनीतिक यात्रा में प्रकृति ने उनका साथ दिया। मुख्यमंत्री पद के लिए जिस तरह की दावेदारियां हुई और भाजपा की धड़ेबंदी सामने आई उस दौरान जयराम ठाकुर ने बड़े धैर्य के साथ परिस्थितियों का सामना किया और अंत में सफलता उन्हीं को मिली। जयराम ठाकुर की राजनीतिक परिपक्वता उन द्वारा की गई शांता कुमार और प्रेम कुमार धूमल की सराहना से ही पता चलती है। मुख्यमंत्री पद के लिए नाम घोषित होने के साथ ही उन्होंने कहा कि 'विधानसभा चुनाव में पार्टी की इतनी बड़़ी सफलता के लिए वह जनता के साथ-साथ राष्ट्रीय नेतृत्व के आभारी हैं। खासकर प्रेम कुमार धूमल और शांता कुमार ने पार्टी को खड़ा करने के लिए अमूल्य योगदान दिया। जय राम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था में सुधार उनकी प्राथमिकता है। विधायक दल का नेता चुना जाने के बाद ठाकुर ने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा कि उनकी पार्टी ने कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चुनाव लड़ा और ये दोनों मुद्दे बतौर मुख्यमंत्री उनकी प्राथमिकता होंगे। उन्होंने कहा कि देवभूमि हिमाचल की पवित्रता बनाई रखी जाएगी। अपराधियों पर कड़ाई से नकेल कसी जाएगी। एक अन्य सवाल के जवाब में ठाकुर ने कहा कि उनकी सरकार बदले की भावना से काम नहीं करेगी। मुख्यमंत्री बनने तक के सफर का श्रेय अपने परिवार और क्षेत्र की जनता को देते हुए ठाकुर ने कहा कि उन्होंने गरीबी को बहुत नजदीक से देखा है। उन्होंने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनावों में प्रदेश की सभी चारों सीटें पार्टी की झोली में डालना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। ठाकुर ने कहा कि सार्वजनिक जीवन का वर्षों का अनुभव मुख्यमंत्री के कामकाज को सफलतापूर्वक निभाने में काम आएगा। उन्होंने आरएसएस से लेकर विद्यार्थी परिषद और भाजपा में वर्षों काम किया है। वर्ष 2007 में उनके प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रहते पार्टी सत्ता में आई थी।Ó
एक गरीब किसान के बेटे का देवभूमि हिमाचल प्रदेश का मुख्यमंत्री होना भारत में लोकतंत्र की मजबूती को भी दर्शाती है। जयराम की मां द्वारा प्रकट भावनाओं से आप समझ सकेंगे कि बेटे की सफलता पर मां की क्या भावनाएं होती हैं। 'मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरा बेटा कभी उस प्रदेश की कमान संभालेगा, जिसकी अगुवाई डा. परमार, शांता कुमार, प्रो. प्रेम कुमार धूमल व वीरभद्र सिंह जैसे बड़े नेताओं ने की है। आज मुझे इस बात पर बहुत खुशी है कि गरीब किसान का बेटा अब प्रदेश की कमान संभालने जा रहा है। यह कहना है बिक्रमू देवी का, जो प्रदेश के नए मुखिया जयराम ठाकुर की माता हैं। उन्होंने कहा कि उनके तीन बेटों व दो बेटियों में चौथे नंबर में जयराम बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में होशियार थे। जयराम के पिता मजदूरी कर जैसे तैसे घर का गुजारा चला रहे थे। गरीबी के कारण घर की परिस्थितियां अच्छी नहीं थी। जयराम को पढऩे का शौक था। उसके शौक को देखते हुए उसे पढ़ाने का निर्णय लिया। खुशी से भरे आंसुओं और रुंधे गले से बिक्रमू देवी ने कहा कि 25 दिसम्बर, 2016 को उनके पति जेठू राम का स्वर्गवास हुआ था। यदि आज वे जिंदा होते तो यह सब देख कर बहुत खुश होते। छोटी बहन अनु व भाई बीर सिंह की खुशी का ठिकाना नहीं है'।

भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व को भी बधाई कि उन्होंने लोक भावनाओं और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सम्मान करते हुए एक ऐसे व्यक्ति के हाथ प्रदेश की बागडोर संभालने का निर्णय लिया जिससे प्रदेश की राजनीति में ही नहीं प्रदेश के सार्वजनिक जीवन में भी एक नये युग की शुरुआत होने जा रही है। जयराम के लिए अगली राजनीतिक यात्रा चुनौतियों भरी है इसलिए उन्हें सतर्क होकर तथा सबको साथ लेकर चलना होगा।
एक कहावत है कि पहाड़ की चोटी पर चढऩे से अधिक उस पर टिकना कठिन होता है। यह चुनौती ही जयराम के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
शुभकामनाओं सहित

इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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