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मैं हिन्दू हूं : अटल बिहारी वाजपेयी

Publish Date: December 27 2017 12:14:31pm

आज नरेन्द्र मोदी सरकार पर सबसे बड़ा आरोप यह है कि मोदी सरकार का झुकाव हिन्दुत्व की ओर अधिक है। विपक्षी दल के नेता उपरोक्त आरोप जनसंघ के अस्तित्व में आने से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने तक लगाते रहे हैं। 

अतीत में उपरोक्त मुद्दों पर अपने विचार प्रकट करते हुए अटल बिहारी वाजपेयी जी ने कहा था 'प्रश्न यह है कि मैं हिन्दू क्यों हूं। वास्तव में मैं हिन्दू हूं क्योंकि मैंने हिन्दू के रूप में जनम लिया। मैं हिन्दू हूं, जिसे हिन्दू होने में सुख अनुभव होता है। स्वामी विवेकानन्द के शब्दों में 'मैं हिन्दू हूं, जिसे अपने हिन्दुत्व पर गर्व है।Ó एक बात मुझे अवश्य स्पष्ट कर देनी चाहिए कि साधारण तौर पर धर्म का जो अर्थ लिया जाता है, वह हिन्दू धर्म के लिए लागू नहीं होता है। यह धर्म है जीवन की एक पद्धति, जो सम्पूर्ण जीवन को दृष्टिगत रखता है। हिन्दू धर्म के प्रति मेरे आकर्षण का सबसे मुख्य कारण है कि यह मानव का सर्वोत्कृष्ट धर्म है। हिन्दू धर्म न तो किसी एक पुस्तक से जुड़़ा है और न किसी एक धर्म-प्रवर्तक से, जो कालगति के साथ असंगत हो जा सकते हैं। हिन्दू धर्म का स्वरूप हिन्दू समाज द्वारा निर्मित होता है। और यही कारण है कि यह धर्म युग-युगान्तर से संवर्धित और पुष्पित होता आ रहा है। यद्यपि हिन्दू धर्म सर्वाधिक प्राचीन है, फिर भी इसमें समय-समय पर देवताओं और धर्मशास्त्रों का उदय होता रहा है। वैदिक देवताओं का स्थान पौराणिक देवों ने प्राचीन काल में ही ले लिया था। वेदों का उपवंृहण पुराणों ने किया है। इस प्रकार हिन्दू धर्म ऐसा जीवन्त धर्म है, जो धार्मिक अनुभवों की वृद्धि और उसके आचरण की चेतना के साथ निरन्तर विकास करता रहता है। हिन्दू धर्म की इस लोकप्रिय प्रकृति का ही एक परिणाम यह है कि यह सभी प्रकार की रुचियों और आध्यात्मिकता के सभी स्तरों की तुष्टि में सक्षम है। कोई भी व्यक्ति चाहे वह एक ईश्वर में विश्वास करता हो, सहस्रों देवताओं को मानता हो या ईश्वर में उसकी आस्था ही न हो, उसे हिन्दू धर्म में आध्यात्मिक समर्थन और अनुपोषण प्राप्त होता रहता है। हिन्दू धर्म कोई मतवादी धर्म नहीं है, जिसमें कुछ बातों पर, भले ही वे अविश्वसनीय हों, आस्था रखना अनिवार्य हो अन्यथा धर्म छोडऩा पड़े। हिन्दू धर्म में कोई धर्म विद्रोही नहीं होते। नये मतद्रष्टा या गुरु हो सकते हैं।''

हिन्दू धर्म में आस्था और हिन्दू होने में गर्व करना आज भी समय की मांग है लेकिन कट्टरवाद का हिन्दुत्व में कोई स्थान नहीं है।'अटल जी एक धर्मपरायण और ईश्वर पर विश्वास रखने वाले व्यक्ति हैं। इस दृष्टि से वे स्वामी विवेकानन्द, महात्मा गांधी और गणेश शंकर विद्यार्थी के विचारों से साम्य रखते हैं। वास्तव में बिना धर्म का जीवन बिना विश्वास का जीवन होता है। स्वयं गांधी जी ने सभी धर्मों का अनुशील करने के उपरान्त यह कहा कि निष्पक्ष भाव से विचार करने पर यह विदित होगा कि हिन्दू धर्म मे ंजो सूक्षम और गूढ़ भाव है, आत्मा का निरीक्षण है, दया है, वह दूसरे धर्मों में नहीं है। हिन्दू धर्म में जो सूक्ष्म और गूढ़ भाव है, उसने मुझे पर्याप्त संतोष दिया। दया और अहिंसा का भावना तो इसका मूल है।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा प्रकट भावो को समझने और उनको जीवन में उतारने में ही जीवन और राष्ट्र की सफलता छिपी है।


इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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