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चूड़ी, बिंदी, मंगलसूत्र का महत्व

Publish Date: December 30 2017 01:18:30pm

पाकिस्तान में मौत की सजा पाए भारत के पूर्व नौसेनाधिकारी कुलभूषण जाधव से मिलने पहुंची उनकी मां तथा पत्नी के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया उसे मानवता के प्रति घोर अपराध की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। बरसों बाद एक मां अपने बेटे से और एक पत्नी अपने पति से मिलने पहुंची तो बीच में शीशे की दीवार खड़ी कर दी गयी। यही नहीं वार्तालाप भी स्पीकर फोन और कैमरों की निगरानी में कराया गया। मां तो अपनी मातृभाषा मराठी में बात भी नहीं कर सकी। हिन्दी और अंग्रेजी उन्हें आती नहीं थी और मराठी बोलने नहीं दी गयी तो सिर्फ चेहरे के हावभाव से ही अपने प्यारे बेटे, जिस पर मौत का साया मंडरा रहा है, का हाल जान सकी। यह पीड़ा सिर्फ जाधव के परिवार की नहीं बल्कि पूरे हिन्दुस्तान की है।

यह बहुत दुखद है कि हिन्दुस्तानी महिला को पाकिस्तान में चूड़ी, बिंदी और मंगलसूत्र उतारने को कहा गया। ऐसा नहीं है कि पाकिस्तानी हमारे रीति रिवाज से अवगत नहीं है। जानबूझकर किसी सुहागिन महिला को चूड़ी, बिन्दी और मंगलसूत्र उतारने को कहा गया। सुहागिन महिलाओं के लिए चूड़ी, बिन्दी और मंगलसूत्र भगवान की तरह होता है उसे उतारने को कहना उनके दिल पर सीधी चोट करना है। यह महिलाओं के सम्मान और उनके धार्मिक रीति रिवाजों को ठेस पहुंचाना तो है ही पाकिस्तान की दुष्टता भी इससे साबित होती है। 

शर्म आनी चाहिए पाकिस्तानियों को कि एक साधारण भारतीय परिवार की महिलाओं को कपड़े और जूते बदलने पर मजबूर किया गया। यही नहीं जूतों में कैमरे छिपे होने की झूठी बात कहते हुए जाधव की पत्नी के जूते भी रख लिए। पाकिस्तान वैसे तो बड़ी शूरवीरता की बात करता है लेकिन भारतीय महिलाओं के कपड़ों और जूतों से डर गया। पाकिस्तान जिस तरह से झूठ के आधार पर ही जिंदा है उसको देखते हुए कोई बड़ी बात नहीं होगी कि जल्द ही पाकिस्तानी सरकार जूतों में कैमरे लगाकर उसे मीडिया के सामने दिखा दे।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि पाकिस्तान सरकार की शह पर ही जाधव के परिवार को मीडिया के अटपटे सवालों का सामना करना पड़ा। एक ओर जहां जाधव की मां और पत्नी हाथ जोड़े खड़ी थीं वहीं पाकिस्तानी मीडिया उन पर तंज कस रहा था कि कैसा लगा अपने कातिल बेटे से मिलकर? क्या कहना है कातिल बेटे से मिलने के बाद?

पाकिस्तान सरकार ने इसके साथ ही अपना वह वादा भी तोड़ दिया कि जाधव को काउंसलर एक्सेस मुहैया कराया जाएगा। जिस तरह से जाधव परिवार के साथ गये भारतीय काउंसलर को जाधव से मिलने से रोक दिया गया वह दर्शाता है कि पाकिस्तान कभी भी अपनी बात पर कायम नहीं रहता है। पाकिस्तान ने जाधव मामले पर लगाए गए आरोप हालांकि खारिज कर दिए हैं लेकिन उसने जाधव का जो नया वीडियो जारी किया है उसको गौर से देखें तो साफ प्रतीत होता है कि जाधव एक लिखी गयी पटकथा पर पढ़ रहे हैं और दबाव में नजर आ रहे हैं। पाकिस्तान जाधव से अपने मन मुताबिक संवाद तो बुलवा ले रहा है लेकिन असल भाव जाधव के चेहरे पर आ ही जा रहे हैं।

एक और हमारी विदेशी मंत्री सुषमा स्वराज बीमार पाकिस्तानियों को ट्वीटर पर ही तत्काल वीजा दिला रही है जिससे कोई लीवर ट्रांसप्लांट कराने आ रहा हो तो कोई दिल का इलाज कराने। कोई अपने बच्चे का इलाज कराने भारत आ रहा है तो कोई अपने अब्बु या अम्मी का इलाज कराने भारत आ रहा है और यहां के कम लागत में ठीक होकर जा रहा है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत जितनी भी मानवीयता दिखाये लेकिन पाकिस्तान ने अमानवीय बने रहने की ही ठान रखी है। भारत की ओर से दिखाई जाने वाली सद्भावना का पाकिस्तान ने कभी सम्मान नहीं किया। भारत की ओर से दिखायी गयी हर सहृदयता का जवाब पाकिस्तान के आतंक और अमानवीय कदम उठाकर दिया है। समझ नहीं आता कि यह लोग किस मिट्टी के बने हैं। यह प्रश्न आज सिर्फ भारत ही नहीं पूरी दुनिया के सामने खड़ा है।

इधर भारत में जाधव का मामला गर्माता जा रहा है और विपक्ष ने जहां जाधव से सकुशल वापस लाने की मांग की है वहीं सत्तारुढ़ दल भाजपा के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने तो जाधव के परिवार के साथ हुए सुलूक की तुलना द्रौपदी के चीर हरण से कर डाली है और सरकार से कहा है कि उसे पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेडऩे की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। राजनीति को गर्म कर रहे इस मामले की आंच समाजवादी पार्टी पर भी पड़ी जब उसके वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल ने कह दिया कि पाकिस्तान ने जाधव को आतंकवादी माना है और अपनी नीति के अनुसार ही उसके साथ सुलूक कर रहा है। विवाद बढ़ा तो अग्रवाल ने बयान से पलटने में देर नहीं लगाई लेकिन जो नुकसान होना था वह तो हो ही चुका था।

जाधव के परिवार ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा है। पूरे मामले पर विदेश मंत्री गुरुवार को संसद में बयान देंगी। यह मामला जल्द ही अंतरराष्ट्रीय अदालत (आई.सी.जे) में सुनवाई के लिए आने वाला है। देखना होगा कि पाकिस्तान सरकार ने परिवार को जाधव से मिलने की अनुमति देने के दौरान जो खेल खेला वह उसके पक्ष में जाता है या विपक्ष में। बहरहाल, भारत इस मामले को शुरू से ही गंभीरता से ले रहा है और अब तक इसे राजनयिक और कानूनी तरीके से निपटाने में कोई चूक नहीं हुई है। अपेक्षा यही है कि आगे भी कोई चूक नहीं हो।


इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

 

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