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आतंकी हमले

Publish Date: January 02 2018 03:35:46pm

जब देश व दुनिया नववर्ष के आगमन को लेकर उत्सवी माहौल में था उस समय जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकवादियों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के लाथपोरा कैम्प पर हमला कर 5 जवानों को शहीद कर दिया और कई घायल हो गए। पिछले वर्ष फरवरी में शोपियां में सेना के गश्ती दल पर हमला कर तीन जवानों को शहीद किया था। फरवरी  से दिसम्बर 2017 तक आतंकी हमले सेना व सुरक्षा बलों पर होते रहे हैं। घाटी में सेना व सुरक्षा बलों ने आप्रेशन आलआऊट चलाया हुआ है और साल भर में तीन सौ से अधिक आतंकी मारे भी गये हैं, लेकिन आतंकी हमलों के रुकने के कोई संकेत अभी नहीं मिल रहे हैं।

भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के कई अन्य क्षेत्रों में भी आतंकी हमले होते रहे हैं, जिनमें कई निर्दोष जाने गई हैं। लेकिन आतंकियों या आतंकियों को समर्थन व संरक्षण देने वालों के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई संयुक्त प्रयास आज तक नहीं हुआ। भारत विश्व को तीन दशक पहले से कह रहा है कि आतंकवाद पर तभी काबू पाया जा सकेगा जब सब एकजुट होकर आतंकवाद विरुद्ध जंग छेड़ेंगे।

वर्तमान स्थिति को प्रत्येक देश समझ रहा है, लेकिन राजनीतिक व आर्थिक हितों को देखते हुए आतंकवाद विरुद्ध 'धीरे चलोÓ वाली नीति अपनाकर बैठा है। आतंकवाद विरुद्ध भारत ने जो तीन दशक पहले देश और दुनिया को बताया था आज वही स्थिति बनती जा रही है। आतंकवाद अब एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, आतंकवाद आज केवल भारत ही नहीं कई अन्य देशों पर निशाना साधे बैठा है। भारत के अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बढ़ते कदमों को देख पाकिस्तान और चीन दोनों भारत विरुद्ध कुछ न कुछ करते तथा कहते रहते हैं। लेकिन देश में धर्म निरपेक्षता के नाम पर तुष्टिकरण का जो खेल कांग्रेस ने आजादी के तत्काल बाद अपनाया उसके नकारात्मक परिणाम आज स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।

मोदी सरकार ने पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने के लिए एक नहीं कई प्रयास किए हैं लेकिन पाकिस्तान का उत्तर नकारात्मक ही रहा है। पिछले दिनों पाकिस्तान सरकार का नकारात्मक चेहरा उस समय सामने आया था जब पाकिस्तान में कैद कुलभूषण जाधव को उनकी मां और पत्नी से जिस तरह मिलवाया गया था। पाकिस्तान का आधार शायद झूठ ही है लेकिन झूठ आखिर सत्य को राह देने को ही मजबूर होता है।

सत्य आज भी भारत के पास है और उसी का लाभ भी भारत को देश व दुनिया में मिल रहा है। भारत की सफल विदेश नीति जिसका श्रेय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जाता है। लेकिन कटु सत्य यह भी है कि आतंकवाद के विरुद्ध तथा पाकिस्तान द्वारा सीमा पार से हो रही हरकतों को लेकर कोई ठोस कदम उठाने में भारत असफल रहा है।

2017 के शुरू से लेकर अंत तक आतंकवादियों ने भारतीय सेना व सुरक्षा बलों पर जो हमले किए हैं उनको देखते हुए भारत सरकार को संकल्प लेना होगा कि आतंकियों के हमलों का मुंहतोड़ जवाब तो देना ही है, साथ में आतंकियों के समर्थकों और संरक्षण देने वालों विरुद्ध कार्रवाई कर यह बात सुनिश्चित करनी होगी कि 2018 में आतंकी हमलों की रोकथाम हो ताकि किसी भी मांग का सिंदूर न मिटे और किसी का घर-आंगन सूना न हो।

मोदी सरकार को आतंकियों तथा आंतकियों को संरक्षण व समर्थन देने वालों के चेहरे से पर्दा हटाकर उन पर नकेल डालनी होगी। 2018 का लक्ष्य आतंकियों विरुद्ध आर-पार की लड़ाई लडऩे का ही होना चाहिए। जवानों की शहादत के साथ जहां किसी का घर सूना होता है वहीं देश की मान-मर्यादा भी प्रभावित होती है। सो आतंकियों विरुद्ध ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।


- इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू। 

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