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ऐसे तो कभी नहीं बनेगी बात

Publish Date: January 13 2018 12:58:16pm

भारतीय परिवारों में अंतर्गत संबंधियों में कभी  किसी दूसरी भाषा का प्रयोग नहीं होता और इसलिये यह संदेह करना गलत न होगा कि पाकिस्तान के शासकों ने जाधव को तभी अपनी मां और पत्नी से मिलने की इजाजत दी होगी, जब उनके बताए जुमलों के अनुसार बातचीत करंे। कुल मिलाकर यह बातचीत एक ढकोसला मात्र रह गई और हालांकि पाकिस्तान का दावा था कि यह सब उसने सुरक्षा की दृष्टि से किया था परंतु असलियत में उसका वीभत्स चेहरा सामने आ ही गया। दीवार चाहे शीशे की हो लेकिन यदि वह दो पक्षों के बीच मौजूद रही तो कभी भी बात नहीं बनेगी। चाहे कितने दावे किये जायें परंतु व्यक्ति से लेकर देशों के संबंधों में तभी निकटता, समझबूझ और सौहाद्र्र आया करता है, जब एक-दूसरे के आमने-सामने बैठकर सपाट शब्दों में अपनी बात रखी जाये। मंशा को जताने के अनेक अवसर आया करते हैं, जिससे दुनिया को बताया जा सके कि कोई देश किसी अन्य देश से संबंधों को किस तरह के बनाकर रखना चाहता है।
 पाकिस्तान के लिए गत दिवस एक ऐसा ही अवसर आया था, जब वहां 21 महीने से कैद एक भरतीय नागरिक से मिलने उसकी मां और पत्नी पहुंची। 

कुलभूषण जाधव नामक यह भारतीय नागरिक एक पूर्व नौसेना अधिकारी है, जो सेवानिवृत्ति के बाद विदेशों में कारोबार कर रहा था। पाकिस्तान ने उसका ईरान से अपहरण करके आरोप लगाया कि वह उसके खिलाफ जासूसी कर रहा था। पाकिस्तान की एक सैनिक अदालत में उसे फांसी की सजा दी गई थी, जिसके खिलाफ भारत अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट में पहुंच गया। वस्तुत: कुलभूषण जाधव के खिलाफ जासूसी का कोई पुख्ता प्रमाण पाकिस्तान अभी तक पेश नहीं कर पाया है, लेकिन वह जैसी मनमानी पर तुला है, उसका विरोध होने के कारण ही उसे सजा को फिलहाल टालना पड़ा है। अंतर्राष्ट्रीय अदालत के सामने उसने जाधव की मां और पत्नी को उससे मुलाकात की अनुमति तो दी परंतु उसने जिस तरह इसे अंजाम दिया, उसने मानवता को शर्मसार करने के साथ पाकिस्तान के उस विकृत चेहरे को फिर उजागर कर दिया, जिसके कारण आज वह संसार में कहीं भी सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता। इस्लामाबाद स्थित पाक विदेश मंत्रालय के भवन में जब जाधव की पत्नी और मां उससे मिलने पहुंचीं तो उनकी भेंट ऐसे नहीं हुई, जैसी सामान्यत: हुआ करती है। न तो मां-बेटे के सिर पर हाथ फेर पाई और न पत्नी कोई दिलासा दे पाई। 


इतना ही नहीं जाधव भी अपनी मां की आंखों से बहते आंसुओं को इसलिये नहीं पोंछ पाया, क्योंकि उनके बीच शीशे की एक ऐसी दीवार थी, जिसमें वह एक-दूसरे को देख तो सकते थे परंतु बात इसलिए नहीं कर सकते थे, क्योंकि वहां कोई शब्द सुनाई नहीं दे रहा था। बात भी इंटरकाम के मार्फत हुई और इसमें भी यह सामने आ गया कि 21 महीने में पाकिस्तान ने अपनी दरिंदगी से भारत के इस निर्दोष नागरिक को किस कदर तोड़ दिया है। 


पाकिस्तान में जो भारतीय नागरिक बंदी होते हैं, उन पर जुल्म की बातें पहले भी सामने आती रही हैं और कुलभूषण जाधव ने भी जैसे इसे प्रमाणित किया कि वहां आज भी विदेशी बंदियों को कैसी अमानवीय यातनायें दी जा रही हैं। शीशे की दीवार के बावजूद जाधव के शरीर पर कुछ चोटों के निशान नजर आये और इन सबसे भी बड़ी बात यह थी कि उसने मातृभाषा की बजाय अंग्रेजी में बातचीत की। भारतीय परिवारों में अंतरंग संबंधियों में कभी किसी दूसरी भाषा का प्रयोग नहीं होता और इसलिये यह संदेह करना गलत न होगा कि पाकिस्तान के शासकों ने जाधव को तभी अपनी मां और पत्नी से मिलने की इजाजत दी होगी, जब उनके बनाए जुमलों के अनुसार बातचीत करे। कुल मिलाकर यह बातचीत एक ढकोसला मात्र रह गई और  हालांकि पाकिस्तान का दावा था कि यह सब उसने सुरक्षा की दृष्टि से किया था परंतु असलियत में उसका वीभत्स चेहरा सामने आ ही गया। यह भी स्पष्ट  हो गया कि पाकिस्तान भारत से अपने संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में कोई रुचि नहीं रखता और हर स्तर पर ऐसी दीवारें बनाये रखना चाहता है, जिससे कभी सीधे संपर्क न हो सकें। 


पाकिस्तान के इस ढकोसले की सारी दुनिया में निंदा हो रही है परंतु यहां यक्ष प्रश्न यही है कि भारत भी पाकिस्तान की ऐसी मनमानियों को कब तक बर्दाश्त करेगा। इस मुलाकात की आलोचना पर पाकिस्तान के एक मंत्री ने जो यह टिप्पणी की कि पाकिस्तान पर किसी धमकी का असर नहीं पड़ेगा और आज वह किसी भी चुनौती का मुकाबला करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह संकेत भी दे दिया कि कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान अपने नियमों के अनुसार ही कार्रवाई करेगा।

ऐसी स्थिति में भारत के समक्ष इसके सिवा कोई दूसरा विकल्प नहीं रह जाता कि वह अपनी पाकिस्तान नीति पर फिर से विचार करे। इस विषय में यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि जब इस्लामाबाद में पाकिस्तान यह मुलाकात करवा रहा था, तब कश्मीर में उसके घुसपैठिये सैनिकों ने एक भारतीय गश्ती दल पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें भारत के 4 जवान शहीद हो गये। इनमें एक  अधिकारी भी है। स्पष्ट है कि पाकिस्तान किसी भी कीमत पर कश्मीर में शांति की स्थापना नहीं होने देना चाहता और ऐसे में फिर सवाल आ जाता है कि भारत वहां कौन सी कार्रवाई करे, जिससे समस्या का स्थायी समाधान हो।

जिस समय भाजपा ने कश्मीर में मुफ्ती मोहम्मद सईद के अलगाववाद के समर्थक संगठन पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी, तब दावा किया गया था कि इससे पाकिस्तान से संबंधों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। 
राज्य में इस समय मुफ्ती की पुत्री मेहबूबा मुफ्ती के नेतृत्व में भाजपा और पीडीपी की संयुक्त सरकार चल रही है परंतु दोनों देशों के संबंध में कोई सुधार नहीं हुआ। संंबंधों को सुधारने के मामले में भारत की किसी भी पहल का पाकिस्तान ने आज तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया है। मानवीय सरोकारों की दृष्टि से भी पाकिस्तान का व्यवहार ऐसा नहीं रहा है, जिससे भविष्य में भी उससे संबंधों के सुधरने की कोई आशा हो। कुलभूषण जाधव  का मामला इतना बड़ा नहीं था कि पाकिस्तान उसको इतना तूल देता परंतु उसने यह केवल इसीलिए किया कि वह भारत से अपने रिश्तों को कभी सुधारना ही नहीं चाहता। 

हालांकि पाकिस्तान ने कहा है कि जाधव से उसके परिजनों की मुलाकात के और भी अवसर आगे आ सकते हैं परंतु इससे भी हालात में कोई अंतर नहीं आने वाला। यह स्पष्ट है कि जब तक भारत अपनी पाकिस्तान संबंधी नीति में पूरी तरह नया दृष्टिकोण नहीं लाता, तब तक न तो कश्मीर की समस्या का कोई समाधान होगा और न ही उससे रिश्ते बेहतर होंगे।         
    (विनायक फीचर्स)  

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