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नए साल के ये 6 बड़े मुद्दे

Publish Date: January 16 2018 03:07:39pm

वर्ष 2017 विदा हो गया है और 2018 ने अपने कदम जमा लिए हैं। और हम सब के लिए यही अच्छा होगा कि नया साल मंगलमय हो, खुशहाल हो और सकारात्मक हो लेकिन दुनिया के हर देश का यही हाल है कि बीता साल नये साल को विरासत दे जाता है। भारत भी इससे, इस परम्परा से अछूता नहीं, अलग नहीं। साल 2017 भारत के लिए बहुत उथल-पुथल का साल रहा है और कई समस्याएं ऐसी हैं जो 2018 में भी मुंह बाए खड़ी हैं। साथ ही साथ राज्य व केंद्र सरकारों को या यूं कहिये पूरे राष्ट्र को चुनौती दे रही हैं। आइए, हम इन कुछ पुराने मगर परिवर्तन चाहने वाले मुद्दों पर विचार करते हैं।
1. किसानों की समस्या:  गत तीन-चार वर्षों से जलवायु परिवर्तन का दौर चल रहा है। अति वर्षा व अनावृष्टि के कारण किसानों केे पसीने छूट रहे हैं। कहीं बाढ़ तो कहीं सूखा। हमारी सरकारें इस दैवी आपदा से निपटने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही हैं, मगर लगातार सामने आने वाली दैवी आपदाओं से तुरंत-फुरत निपटना बहुत आसान नहीं है। सत्ता और विपक्ष को सही गलत का पूरा अंदाजा है। सरकारों को यथास्थिति मालूम है मगर दलगत  राजनीति में सत्ता पक्ष को परेशान करना मुख्य हो जाता है और सही स्थिति को ग्रहण करना गौण हो जाता है। मुख्यत: कांग्रेस कुछ इस तरह की बातें करती है मानो सत्तापक्ष ने अपनी मर्जी से कहीं बाढ़ ला दी है, अपनी मर्जी से कहीं सूखा ला दिया है। और वह बेचारेे किसानों को भड़काकर आंदोलन के नाम पर अराजकता फैला रही है। सत्तापक्ष की कोशिश यही रहती है कि समस्या को सुलझाने के लिए पुरजोर कोशिश की जाए। मगर क्या इसके लिए सत्ताधारी जिम्मेदार हैं या उसके इशारे पर बाढ़ आई या उसके इशारे पर सूखा पड़ा। सरकार की कुछ सीमाएं हैं और वह भी समान रूप से किसानों की समस्या से जूझ रही है। अगर 2018 में वर्षा हुई और मौसम संतुलित रहा तो अच्छा भाग्य होगा। मगर अभी स्थिति ऐसी है कि 2018 में भी कांग्रेस बाज नहीं आएगी। वोट बैंक का सवाल है।
2. दशकों बीत गए मगर राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद का मुद्दा अब तक अनसुलझा ही है। हिन्दुओं की अपनी मांग है और मुसलमानों की अपनी मांग है। एक तरफ कट्टरपंथी हिंदू हैं तो दूसरी तरफ कट्टरपंथी मुसलमान। मगर बहुत ज्यादा संभव यह नजर आ रहा है कि आने वाले समय में हिंदू-मुसलमान सौहार्द की एक मिसाल बनेगी और इस मिसाल के बनने का कारण यह है कि आतंकवाद को परास्त करने के लिए भारत के  हिंदू व मुसलमान भी सहअस्तित्व के साथ जीना पसंद करेंगे और इस कारण राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद प्रकरण को  दोनों समुदाय सहमति के स्तर तक पहुंच सकते हैं।
3. नोटबंदी व जी.एस.टी. ये दो कदम उठाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निश्चय ही आत्मघाती कदम उठाया है।  जब मोदी राष्ट्र के लिए कुछ करना चाह रहे हैैं तो वे सिर्फ छोटी-मोटी फाइलों पर दस्तखत कर गद्दी पर बैठे नहीं रह सकते। सच पूछा जाए तो नरेंद्र मोदी के आर्थिक कदम से विरोधी भी असहमत नहीं हैं। वे खुद परेशान हैं कि ये नरेंद्र मोदी क्या चीज हैं। मगर राजनीति में सत्ता-पक्ष का विरोध कर उसे कमजोर कर औंधे मुंह गिरा देना विपक्ष खासकर कांग्रेस का लक्ष्य है। 
4. आतंकवाद आज विश्व की सबसे बड़ी समस्या है, मगर सबसे ज्यादा भारत की समस्या है। दरअसल भारत की भौगोलिक स्थिति  ही ऐसी है, चारों ओर से शत्रुओं से घिरा है। कश्मीर समस्या देश की सबसे गंभीर व ज्वलंत समस्या है। इस समस्या से भारत को बाहर निकालने के लिए कितने जबर्दस्त तरीके से नीतियां बनेंगी व लागू होंगी, यह 2018 के गर्भ में ही छिपा है।
5. भारत की नारी, आज की तारीख में सबसे ज्यादा त्रस्त है। उसके साथ बलात्कार हो रहा है तो कहीं उसके साथ अत्याचार। भ्रूण हत्या पर पाबंदी होने के बावजूद चोरी छुपे हो ही रहा है। नारी सुख प्राप्त करने के लिए व्यक्ति अंधेरे में रखकर न जाने कितने विवाह रचता है, फिर उसे बच्चों के साथ अनाथ छोड़कर कहीं और मंडराने चला जाता है। महिलाओं के साथ ब्लैकमेलिंग की घटनाएंं भी बहुत बड़ी मात्रा में घट रही हैं।
 इन परिस्थितियों में भारत में हर साल लाखों की संख्या में युवतियां  व महिलाएं पथ भ्रष्ट हो रही हैं। अब इस नए साल में नारीवादियों को निश्चित रूप से भयावहता में कमी की आशा है। हम सरकार से भी बहुत सारी अपेक्षाएं रखते हैं, नारी कल्याण के लिए।
6. नए साल में एक अंतर्राष्ट्रीय संधि की सख्त जरूरत है। हर भारतवासी चाहता है कि 2018 में विश्व मंच पर भारत की सुनवाई हो। अमेरिका, रूस, यूरोप के राष्ट्र भारत के साथ मिल-जुलकर अंतर्राष्ट्रीय शक्ति को मजबूत बनाएं। यह समय की मांग है।
 आईएसआई, तालिबान सहित पाकिस्तान समर्थित तमाम आतंकवादी गुट को शिकस्त देना समय की बहुत बड़ी मांग है और यह समय आकर बाजू में खड़ा है। भारत व मित्र राष्ट्रों की एक ऐसी पहल होनी चाहिए कि चीन, उत्तरकोरिया, पाकिस्तान जैसे उपद्रवी व तानाशाही राष्ट्र को किस तरह से धूल चटाई जाए और मानवता के मूल्यों की बहाली की जाए। 2019 में आम चुनाव आ रहे हैं। ऐसे में 2018 भारत के लिए बहुत ही निर्णायक साल साबित होगा, इसमें कोई संदेह नहीं। चुनावी शोरगुल व सियासी रणनीतियों के बीच आम जनता स्वस्थ-मंगल व कुशल रहे और चारों दिशाओं से खुशियों की वर्षा हो। 
लेखक आर.सूर्य कुमारी
 

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