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आधार पर निराधार आपत्तियां

Publish Date: January 23 2018 03:21:50pm

भारत की विकास यात्रा में आधार क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। यह बिचौलियों व भ्रष्टाचार को समाप्त कर गरीबों तक उनका हक पहुंचा रहा है। डिजिटल समावेशन और डिजिटल सशक्तीकरण डिजिटल इंडिया के दो प्रमुख लक्ष्य हैं, जिन्हें हासिल करने में आधार अहम भूमिका निभा रहा है। 130 करोड़ की आबादी में 119 करोड़ लोग आधार के तहत पंजीकृत हो चुके हैं। दुनिया इसे भारत के ऐेसे आविष्कार के तौर पर देख रही है, जो फेसबुक, गुगल, ट्विटर जैसे बड़े डिजिटल आविष्कारों की बराबरी कर रहे हैं। कल तक भ्रष्टाचार और शासकीय लापरवाही से जूझते मनरेगा मजदूर के चेहरे पर आज इसलिए मुस्कान है, क्योंकि आधार के कारण उसकी कड़ी मेहनत का मेहनताना सीधे उसके बैंक खाते में पहुंच रहा है। आधार के कारण ही लगभग 80 हजार फर्जी शिक्षकों को निकालना संभव हुआ। आधार जनता के पैसे बचा रहा है। फर्जी गैस कनेक्शन, फर्जी राशन कार्ड या फर्जी शिक्षकों को हटाकर लगभग 57 हजार करोड़ रुपए की जो बचत हुई है, उसका लाभ गरीबों हितैषी योजनाओं को ही होगा। आखिर पारदर्शिता और सुशासन की ये उपलब्धियां हमारे लिए गर्व की बात क्यों नहीं है? संप्रग सरकार और राजग सरकार के आधार में बड़ा फर्क है। संप्रग सरकार के समय आधार को कोई कानूनी, विधायी सुरक्षा या मान्यता हासिल नहीं थी। नरेंद्र मोदी सरकार ने आधार को तकनीकी रूप से मजबूत और सुरक्षित बनाने के अलावा एक सबल कानूनी सुरक्षा भी प्रदान की है। आधार कानून न केवल आधार के उपयुक्त रखरखाव को सुनिश्चित करता है, बल्कि उसकी पूरी प्रणाली को एक उत्तरदायी प्रशासन भी बनाता है। 
इसमें भी सबसे अहम है व्यक्तिगत निजता की सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधानों की व्यवस्था। यह कानून आधार बायोमेट्रिक डाटा के दुरुपयोग के लिए कड़े दंड और आपराधिक अभियोग का प्रावधान भी करता है। कोर बायोमेट्रिक जैसे कि उंगलियों के निशान और आंखों के स्कैन पूरी तरह से एन्क्रिप्ट रूप में रखे जाते हैं, जिसे तोड़ पाना लगभग असंभव है। आपको जानकर हैरानी होगी कि आधार सत्यापन की प्रक्रिया में आधार सर्वर को भी यह ज्ञात नहीं होता कि सत्यापन किस मकसद के लिए किया जा रहा है। आधार द्वारा रोजाना करीब छह करोड़ से अधिक सत्यापन किए जाते हैं और वह भी लगभग मुफ्त में। इस पूरी प्रक्रिया में आधार बस इतना बताता है कि जिस अधिकृत संस्था ने आपके आधार नंबर पर जिन उंगलियों के निशान या आंखों के निशान का सत्यापन मांगा है, वे आधार के डाटाबेस में रखी जानकारी से मेल खाते हैं या नहीं? यदि जानकारी सही पाई जाती है तो आधार इसेे सत्यापित करता है और अगर गलत पाई जाती है तो रद्द कर देता है। आप जिन सेवाओं के लिए आधार का प्रयोग करते हैं, उनसे संबंधित आपकी व्यक्तिगत जानकारियां आधार अपने डाटाबेस में जमा नहीं करता। आधार के पास आपकी जाति, धर्म, शैक्षणिक योग्यता व स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियां नहीं होतीं। इसलिए यह कहना पूरी तरह निराधार है कि आधार आपकी निजी सूचनाओं की प्रोफाइल बना रहा है।
आधार कानून के तहत आपको बायोमीट्रिक को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी अपरिहार्य परिस्थितियों में ही जाहिर किया जा सकता है। वह भी तब जब भारत सरकार में संयुक्त सचिव स्तर का अधिकारी इसका लिखित कारण बताते हुए सरकार से इसका लिखित कारण बताते हुए सरकार से इसका अनुरोध करे। यह अनुरोध भी कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली उस समिति द्वारा अनुशंसित हो, जिसमें विधि सचिव और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव भी शामिल हों। इस परिस्थिति में भी आपके बायोमेट्रिक को एक सीमित समय के लिए ही उपलब्ध कराया जा सकता है।
आधार से अभी तक 76 करोड़ बैंक खातों का सत्यापन किया जा चुका है। इससे न केवल खाताधारकों की डिजिटल पहचान की जा सकती है, बल्कि आतंकवाद को प्रायोजित करने के लिए बैंक खातों के दुरुपयोग पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा। इससे आम नागरिकों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं, लेकिन काले धन के कारोबारियों, आतंक को पोषित करने और अपराधियों को संरक्षण देने वालों को जरूर चिंतित होना पड़ेगा।
डिजिटल पहचान आज आम हो गई है। फिर चाहे ड्राइविंग लाइसेंस हो या मतदाता पहचान पत्र हो, उनकी जानकारी संबंधित विभागों की वेबसाइटों पर नियमित रूप से उपलब्ध होती है। 
कई जगहों पर प्रवेश के लिए भी आप डिजिटल पहचान के बाद ही दाखिल हो पाते हैं। कई देशों में वीजा जारी करने के लिए अंगुलियों के निशान मांगे जाते हैं। निबंधन से संबंधित कई कानूनों और नियमों के तहत जब आप जमीन की खरीद-बिक्री करते हैं तो आपको अपने दस्तखत के साथ-साथ अंगुलियों के निशान भी देने पड़ते हैं। यह चलन पिछले कई सौ वर्षों से जारी है। 
आजकल कई अच्छे स्मार्टफोन भी आपकी उंगलियों या चेहरे की पहचान से ही खुलते हैं। इन सभी गतिविधियों में डिजिटल पहचान देने में किसी को कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन आधार के बारे में बहुत आपत्तियां हैं। आधार कानून के तहत किसी भी गरीब को किसी सरकारी योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। सरकारें गरीब व्यक्ति को उसके पास उपलब्ध पहचान पत्र का प्रयोग कर सरकारी योजनाओं का लाभ दें और साथ ही यह प्रयास भी करें कि उसका आधार भी बनवाया जा सके।
निजता के मामले में अधिक स्पष्टता की जरूरत है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश ने निजता के मामलों का मौलिक ढांचा तैयार कर दिया है और जाहिर तौर पर इसे संविधान के अनुच्छेद 21 से जोड़कर देखा है। निजता की आड़ में तकनीकी क्षेत्र में हो रही नई खोजों को रोका नहीं जा सकता। भारत आज दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप केंद्र के रूप में उभरा है।
नई खोज करने के लिए डाटा बहुत महत्वपूर्ण है। देश आज डाटा अन्वेषण का एक बहुत बड़ा केंद्र बनता जा रहा है जो आईटी से जुड़ी खोजों, अर्थव्यवस्था के विकास और रोजगार सृजन के लिए एक सुनहरा अवसर है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स के क्षेत्र में डाटा के प्रयोग से नई खोजों की अपार संभावनाएं हैं। इसके लिए निजता का तर्क भ्रष्ट और अपराधियों के बचाव की ढाल नहीं बन सकता। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश श्रीकृष्णा की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है, जो डाटा सुरक्षा कानून के संबंध में अपनी सिफारिशें जल्द ही देगी।
पूरी व्यवस्था बायोमेट्रिक डाटा की सुरक्षा के पैमानों पर खरी उतरती है और यह नियमित रूप से विशेषज्ञों की निगरानी में रहती है। जो लोग अपना आधार नंबर साझा नहीं करना चाहते, उनकी सुविधा के लिए हाल में वर्चुअल आईडी की व्यवस्था भी शुरू की गई है। आधार की सफलता जगजाहिर है। विश्व बैंक ने 2016 में जारी विश्व विकास रिपोर्ट में कहा, 'भारत के आधार जैसा डिजिटल पहचान तंत्र किसी भी सरकार को समावेशी विकास करने में मददगार होता है। आधार ने भारत की डिजिटल उपलब्धियों को नया आधार दिया है।

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रविशंकर प्रसाद, (लेखक केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी और विधि व न्याय मंत्री हैं), (दैनिक जागरण से साभार)

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