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सीमांत गांवों में दहशत

Publish Date: January 23 2018 03:25:57pm

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने एक समारोह में बोलते हुए कहा कि 'वह अपने दुश्मनों को केवल अपनी जमीन पर ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ी तो उनके घर में घुसकर मार सकता है। गृहमंत्री ने कहा कि कुछ महीने पहले एक कायराना हरकत करते हुए पाकिस्तान ने सीमा पर हमला किया और हमारे 17 जवानों को शहीद कर दिया। प्रधानमंत्री ने इस गंभीर मुद्दे पर हम सभी से विमर्श किया और इसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तानी इलाके में घुसकर आतंकियों को मार गिराया। जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में एलओसी पर जवाबी कार्रवाई में भारतीय सेना ने सात पाकिस्तानी जवानों को मार गिराया था जबकि चार अन्य को घायल कर दिया।Ó इस कार्रवाई के एक हफ्ते बाद राजनाथ सिंह का यह बयान आया है।

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी कह रही हैं कि जम्मू-कश्मीर को जंग का मैदान न बनाये। कश्मीर घाटी के अलगाववादी नेता भी भारत को बातचीत द्वारा मामला हल करने को कह रहे हैं। भारत ने उपरोक्त मामला पाकिस्तान से एक बार नहीं अनेक बार आपसी बातचीत द्वारा हल करने का प्रयास किया हैं, लेकिन धरातल की सच्चाई यह है कि पाकिस्तान की राजनीति का केंद्र बिन्दु ही भारत का विरोध है। ठीक उसी तरह जिस तरह इस्लाम के कट्टरपंथी हिन्दू धर्म का विरोध करने को अपना धर्म मानते हैं। पाकिस्तान ने अस्तित्व में आने के साथ ही भारत का विरोध शुरू कर दिया, जो आज भी जारी है। पाकिस्तान की नकारात्मक नीतियों का ही परिणाम है कि पाक आर्थिक, सामाजिक स्तर पर उन्नति नहीं कर सका और राजनीति रूप से भी अस्थिर ही है।

विश्व जिन संगठनों और उनके प्रमुखों को आतंकवादी कहता है पाकिस्तान उन्हें समर्थन व संरक्षण दे रहा है। पाकिस्तान में भी आतंकी आये दिन निर्दोषों की हत्या कर अपनी दस्तक देते रहते हैं। लेकिन पाकिस्तान फिर भी सबक लेने को तैयार नहीं है। पाकिस्तान की फौज ही शायद पाक के लोगों की बदनसीबी का कारण बन गई है। अपने स्वार्थ हेतु पाक के फौजी कमांडर देश के राजनीतिक, आर्थिक तथा सामाजिक ढांचे को भी कमजोर करते चले जा रहे हैं।

पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति को देखते हुए नहीं कहा जा सकता कि सीमाओं पर शांति जल्द लौटने वाली है। भारत ने पाकिस्तान द्वारा की जा रही गोलाबारी का जवाब देने की नीति ही अपनाई है जिस कारण पाकिस्तान की बौखलाहट बढ़ गई है और वह सीमावर्ती गांवों पर भी गोलाबारी कर रहा है, जिस कारण साधारण नागरिकों को जान माल का नुकसान हो रहा है और सीमावर्ती क्षेत्रों में दहशत का माहौल है। हजारों लोग भय के कारण पलायन कर चुके हैं। जहां तक सुरक्षा बलों का प्रश्न है उन्होंने अपने स्तर पर 'रैड अलर्ट' अवश्य जारी किया हुआ है।

पाकिस्तान ने चतुराई दिखाते हुए सीमा पर भारतीय सेना व सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही जवाबी कार्रवाई के लिए भारतीय राजदूत को बुलाकर अपना ऐतराज दर्ज भी कराया है लेकिन सत्य को अस्वीकार करने और आंखे बंद कर भारत विरोधी नीति को जब तक पाकिस्तान छोड़ता नहीं तब तक सीमाओं पर स्थाई शांति का होना मुश्किल है। भारत सरकार को चाहिए कि सीमा क्षेत्र में जिन लोगों का पाकिस्तान की गोलाबारी से जान-माल का नुकसान हुआ है, उन्हें तत्काल हर प्रकार की सहायता मिलनी चाहिए। जो घर बार छोड़कर चले गये हैं उनके जायदाद की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए, साथ में ही कैम्पों में उनके खाने-पीने व रहने के पुख्ता प्रबंध करना चाहिए।

भारत को अब पैदा हुई उपरोक्त स्थिति के स्थाई हल के लिए एक ठोस तथा स्थाई नीति बनाकर उस पर अमल करने की आवश्यकता है। पाकिस्तान जब जो चाहे करे, उस स्थिति को बदलने की आवश्यकता है। पाकिस्तान को जब तक उसको समझ आने वाली भाषा में ठोस जवाब नहीं दिया जाता तब तक समस्या का स्थाई हल भी नहीं निकलने वाला और न ही सीमावर्ती क्षेत्र में स्थाई शांति होने वाली है।    


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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