Sunday, February 25,2018     ई पेपर
ब्रेकिंग न्यूज़
राजनीति

तीन तलाक

Publish Date: January 31 2018 02:04:35pm

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संसद के बजट सत्र को संबोधित करते हुए आशा जताई कि संसद में पेश तीन तलाक संबंधी विधेयक को शीघ्र ही कानूनी रूप दिया जाएगा। तीन तलाक को मुस्लिम महिलाओं के हित में बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार का मिशन तुष्टिकरण की जगह सशक्तिकरण है। इसी संकल्प के साथ सरकार अल्पसंख्यकों के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण की दिशा में काम कर रही है।
गौरतलब है कि पिछले सत्र में तीन तलाक का बिल लोकसभा में तो पारित हो गया था लेकिन राज्यसभा में पारित होने से रह गया था। अब सरकार की उम्मीद है कि संसद के इस सत्र में उपरोक्त विधेयक पारित हो जाएगा। सरकार का कहना है कि इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने के लिए वह सभी राजनीतिक दलों से बातचीत करेगी। गत रविवार को सर्वदलीय बैठक में उपरोक्त मुद्दों को लेकर सभी दलों से सहयोग भी मांगा गया। संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने इस बैठक को काफी सौहार्दपूर्ण बताया और कहा कि प्रधानमंत्री ने सभी दलों के नेताओं से इस सत्र को सफल बनाने का आग्रह किया है। बैठक के बाद इस विधेयक के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, हम राज्य सभा में तीन तलाक विधेयक को पारित कराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़़ेंगे। हम इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने के लिए विभिन्न राजनैतिक दलों के नेताओं से संपर्क करेंगे। जिस प्रकार जीएसटी को आम सहमति से पारित कराया गया था उसी तरह मुसलमानों के बीच तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) पर रोक लगाने वाले इस विधेयक को भी आम सहमति से पारित कराने की आवश्यकता है। पिछले सत्र में कई दलों ने इस विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजे जाने की मांग की थी। इस बाबत पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अब यह राज्य सभा का मामला है। अनंत कुमार ने कहा, अब इस मुद्दे पर सदन को फैसला करना है। हालांकि सरकार इस सत्र में तीन तलाक विधेयक को पारित कराना चाहती है। विपक्ष का कहना है कि उसने बलात्कार एवं महिलाओं के अत्याचार के अन्य मामलों में सरकार को घेरने की योजना बनाई है। इसके अलावा संविधान एवं संवैधानिक संस्थाओं पर कथित प्रहार, व्यापारियों की दुर्दशा और उत्तर प्रदेश में हालिया सांप्रदायिक घटना जैसे मुद्दों पर सरकार पर प्रहार करेगा। विपक्ष ने सरकार से कहा है कि बजट सत्र के दौरान इन मुद्दों पर चर्चा के लिए अनुमति दी जानी चाहिए।
तीन तलाक के मुद्दे पर जहां मुस्लिम महिलाओं का एक बड़ा वर्ग सरकार के साथ खड़ा है तो मुस्लिम कट्टरपंथी और मौलाना आदि सरकार के विरुद्ध खड़े हैं। सत्य यह है कि तीन तलाक की व्यवस्था को अधिकतर इस्लामिक देश भी समाप्त कर चुके हैं। भारत में यह प्रथा मात्र राजनीतिक लाभ को सम्मुख रख कर चलती चली जा रही है। तीन तलाक से संबंधित जिस तरह के मामले अतीत में ही नहीं वर्तमान में भी सामने आये हैं उससे स्पष्ट है कि यह अमानवीय और अनैतिक है। तीन तलाक की व्यवस्था ने तो मुस्लिम महिलाओं के दिलों में भय सा बिठाया हुआ है और भयग्रस्त मुस्लिम महिलाएं एक तरह से बंधुआ जीवन जीने को मजबूर हैं।
मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को उपरोक्त कुप्रथा से बचाने के लिए जो कदम उठाए हैं वह स्वागत योग्य हैं। न्यायालय ने भी तीन तलाक को अवैध करार दिया है, फिर भी तीन तलाक अभी तक जारी है। अब समय आ गया है कि तुष्टीकरण की राह को छोड़कर सशक्तिकरण की राह पर चलने का। पक्ष और विपक्ष दोनों को राजनीति से ऊपर उठकर और मुस्लिम महिलाओं को न्याय देने के लिए संसद के इस सत्र में तीन तलाक से संबंधित विधेयक को पारित करने का प्रयास करना चाहिए।    

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

WhatsApp पर न्यूज़ Updates पाने के लिए हमारे नंबर 9814266688 को अपने Mobile में Save करके इस नंबर पर Missed Call करें ।


 टी-20 विश्व कप में हम अपने प्रदर्शन से सबको चौंका देंगे: मिताली

केपटाउन (उत्तम हिन्दू न्यूज): दक्षिण अफ्रीका दौरे पर ऐतिहासिक...

प्लास्टिक सर्जरी से हुई श्रीदेवी की मौत, वायरल मैसेज का दावा

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): श्रीदेवी की अचानक हुई मौत से ...

top