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बजट 2018-19

Publish Date: February 02 2018 12:08:36pm

देश के वित्तमंत्री अरुण जेटली द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2018-19 के बजट से मध्यम वर्ग और कंपनियां निराश हो गई हैं। हां गरीब, ग्रामीण और पिछड़े वर्गों के लिए वित्तमंत्री द्वारा पेश बजट बहुत कुछ लेकर आया है। जो लोग 2019 के लोकसभा चुनावों पर नजर लगाकर बैठे थे और यह सोच रहे थे कि चुुनावों को देखते हुए यह बजट लोक लुभावना होगा उनके हाथ भी निराशा ही लगी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले दिनों एक टी.वी. शो पर हुई बातचीत में संकेत दे दिया था कि वह देशहित को देखकर ही नीतियां बनाते हैं चुनावी हार-जीत को महत्व नहीं देते। यह बजट करीब-करीब उसी दिशा में उठा एक कदम कहा जा सकता है। देश का बुनियादी ढांचा तथा देश के आम आदमी की आर्थिक हालत कैसे सुधर सकती है उसी को ध्यान में रखा गया है। 
वित्तमंत्री अरुण जेटली द्वारा पेश किए गए वर्ष 2018-19 के बजट की मुख्य बातें जो स्वागत योग्य हैं इस प्रकार हैं, 'इसमें आगामी खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की लागत डेढ़ गुना करने, उज्ज्वला योजना के लिए मुफ्त गैस कनेक्शन का लक्ष्य बढ़ाकर आठ करोड़ करने तथा विश्व की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य योजना के तहत 10 करोड़ परिवारों (करीब 50 करोड़ लोगों) को प्रति परिवार पांच लाख रुपये सालाना चिकित्सा कवर देने की घोषणा की गयी है। किसानों को आगामी वित्त वर्ष में ऋण देने की राशि बढ़ाकर 11 लाख करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है। सौभाग्य योजना के तहत 16 हजार करोड़ रुपये से चार करोड़ गरीबों के घरों को बिजली के कनेक्शन देने और आगामी वित्त वर्ष में '2022 तक अपना घरÓ कार्यक्रम के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 51 लाख मकान बनाने की भी घोषणा की गयी। योजना के तहत अब तक इतने ही मकानों का निर्माण किया जा चुका है। स्वास्थ्य और परिवहन खर्च के लिए 40 हजार रुपये की मानक छूट का प्रावधान किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों को राहत देते हुए उनकी ब्याज से होने वाली कर मुक्त आय की सीमा 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गयी है। इक्विटी बाजार में निवेशकों को भी सरकार ने झटका दिया है। एक लाख रुपये से ज्यादा दीर्घावधि पूँजीगत लाभ पर 10 प्रतिशत कर का प्रस्ताव किया गया है। वित्त मंत्री ने 70 लाख नये रोजगार मुहैया कराने की भी घोषणा की और बजट में रेल तथा सड़क क्षेत्र के लिए अब तक का सबसे बड़ा आवंटन किया है। बजट में स्वच्छ भारत मिशन के तहत दो करोड़ नये शौचालय बनाने का प्रस्ताव है। स्वराज योजना को प्रोत्साहन देने के लिए तीन लाख करोड़ रुपये की राशि रखी गयी है। दस करोड़ गरीब परिवारों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना तथा डेढ़ लाख वेलनेस केंद्रों के लिए 12 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया जायेगा। रेलवे में सुधार के लिए कई कदमों की घोषणा करते हुये इसके लिए आवंटन को एक लाख 41 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर एक लाख 48 हजार 528 करोड़ रुपये किया गया है। सुरक्षा के लिहाज से सभी ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे और वाई-फाई की सुविधायें मुहैया करायी जायेंगी। कुल 3,600 किलोमीटर पटरियों का नवीनीकरण किया जायेगा और अगले दो साल में 4267 मानव-रहित रेलवे क्रॉसिंग को समाप्त किया जायेगा। बजट में मुद्रा योजना के लिए तीन लाख करोड़ रुपये, अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए 56,619 करोड़ रुपये और अनुसूचित जनजाति कल्याण के लिए 39,135 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव किया गया है। गंगा किनारे के 115 जिलों को आदर्श जिलों के रूप में विकसित किया जायेगा। बजट में टीबी मरीजों के पौष्टिक आहार के लिए 600 करोड़ रुपये, जबकि बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए 1,290 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है। आलू, टमाटर और प्याज के लिए ऑपरेशन ग्रीन योजना के तहत 500 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है। प्रदूषण की समस्या पर विशेष ध्यान देते हुये सरकार ने दिल्ली के पड़ोसी राज्यों को पराली जलाने के लिए रियायती दर पर मशीन देने का बजटीय प्रस्ताव रखा है। द्य सरकार की स्वच्छ भारत मिशन के तहत और दो करोड़ शौचालयों के निर्माण की योजना है। द्य प्रत्येक तीन संसदीय क्षेत्र में एक सरकारी मेडिकल कॉलेज खुलेगा। द्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत प्रतिवर्ष प्रति परिवार पांच लाख रुपए का मेडिकल खर्च प्रदान किया जाएगा। यह विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना होगी। द्य दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण चिंता का विषय है, अत: हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली में इस समस्या से निपटने के लिए विशेष योजनाएं शुरू की जाएंगी। द्य स्कूली बुनियादी ढांचे के जीर्णोद्धार के लिए राइज योजना शुरू की जाएगी जिसके तहत अगले चार वर्षों में 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक आवंटित किए जाएंगे। द्य अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए एकलव्य स्कूल शुरू किए जाएंगे। द्य साल 2022 तक 50 फीसदी एसटी आबादी वाले और 20,000 जनजातीय लोगों को नवोदय विद्यालयों के अनुरूप एकलव्य स्कूलों की सुविधा दी जाएगी। द्य शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार के लिए एकीकृत बी.एड कार्यक्रम शुरू होगा। द्य साल 2018-19 में कृषि के लिए 11 लाख करोड़ रुपए का ऋण प्रस्तावित। द्य ऑपरेशन ग्रीन के लिए 500 करोड़ रुपए का आवंटन। द्य कृषि बाजारों के विकास के लिए 2000 करोड़ रुपए का कोष स्थापित किया जाएगा।
कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि आयकर छूट की सीमा न बढ़ाये जाने के कारण मध्यम वर्ग विशेषतया कर्मचारी वर्ग तथा छोटे व्यापारियों के हाथ निराशा ही लगी है। बड़ी कंपनियों की टैक्स की दर बढ़ गई, इस तरह उन पर भी शिकंजा कस गया है।  दूर की सोचे तो देश के बुनियादी ढांचे के मजबूत होने तथा स्वास्थ्य व शिक्षा क्षेत्र के मजबूत होने से देश को लाभ ही होने वाला है। लेकिन तत्काल मध्यम वर्ग को कोई विशेष राहत न देकर मोदी सरकार ने चुनावी जोखिम भी उठाया है। लेकिन यह बजट ग्रामीण, गरीब व दलित के लिए हितकारी ही है।


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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