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बंगाल में ममता सरकार ने बदले सुर

Publish Date: February 03 2018 02:27:16pm

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अजीब सा बदलाव दिख रहा है।राज्य के मुसलमानों को वरीयता देने वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने अब अचानक हिन्दुओं की तरफ रुख कर लिया है मानो सरकार का  ह्रदय परिवर्तन हो गया हो। एकदम अचानक से बारह हजार हिंदी पुजारियों को सम्मानित करना,हिन्दुओं के धार्मिक कार्यक्रमों में सक्रियता बढ़ाना आदि गतिविधियां ये बतातीं हैं कि सत्तासीन तृणमूल कांग्रेस सरकार को डर है कि कहीं राज्य के हिन्दू वोटर्स भाजपा के पाले में न चले जाएं।,यही कारण है  कि ममता सरकार ने अपनी रणनीति को अचानक इस तरह से बदल दिया है। 
पुरानी कहावत है कि लोहा लोहे को काटता है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अब शायद इस कहावत पर यकीन करने लगी हैं। यही वजह है कि इस साल होने वाले पंचायत चुनावों से पहले राज्य में भाजपा के बढ़ते असर की काट के लिए उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस भी अब हिंदुत्व को भुनाने की कोशिशों में जुट गई है। इसी कवायद के तहत पार्टी ने अपने गठन के दो दशकों में पहली बार  बीरभूम जिले में पुरोहितों और ब्राह्मणों के सम्मेलन का आयोजन किया।
दूसरी ओर भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस पर नरम हिंदुत्व की राह पर चलने का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि हाल में हुए तमाम उपचुनावों में भाजपा के लगातार बढ़ते वोटों को ध्यान में रखते हुए तृणमूल कांग्रेस ने हिंदू वोटरों को लुभाने के लिए यह कवायद शुरू की है। भाजपा नेत्री और राज्यसभा सांसद रूपा गांगुली का कहना है कि  जनता, तृणमूल कांग्रेस की इस कवायद को बखूबी समझ रही है, तृणमूल की गतिविधियां साफ तौर पर यही बता रही हैं कि हिन्दू मतदाताओं को भरमाने की कोशिश की जा रही है।
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के मुकाबले काफी पीछे रहने के बावजूद भाजपा तमाम उपचुनावों में नंबर दो बन कर उभरी है। मिसाल के तौर पर पश्चिम मेदिनीपुर जिले में सबंग विधानसभा सीट पर हाल में हुए उपचुनाव में उसके वोटों में भारी बढ़ोत्तरी हुई है। इससे तृणमूल कांग्रेस ही नहीं, कांग्रेस खेमा भी भारी चिंता में है। कांग्रेस की इस पारंपरिक सीट पर वर्ष 2016 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को महज 5,61० वोट मिले थे लेकिन उपचुनाव में उसे 37 हजार 476 वोट मिले हैं। इस साल अप्रैल-मई में राज्य में पंचायत चुनाव होने हैं। बंगाल का राजनीतिक इतिहास गवाह है कि पंचायत चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राजनीतिक दल ही आगे चल कर विधानसभा व लोकसभा चुनावों में कामयाब रहते हैं। ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल ने भी वर्ष 2००8 के पंचायत चुनावों में बेहतर प्रदर्शन कर तीन साल बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में जीत की राह तैयार की थी। अब भाजपा भी उसी के नक्शेकदम पर चलने का प्रयास कर रही है। बीरभूम जिला भाजपा के बढ़ते असर और इसकी वजह से होने वाले राजनीतिक संघर्षों के लिए सुर्खियों में रहा है। अब वहां भाजपा की ओर से हिंदू वोटरों के कथित धुव्रीकरण की काट के लिए तृणमूल कांग्रेस के ताकतवर जिला अध्यक्ष अणुब्रत मंडल की अगुवाई में ब्राह्मण व पुरोहित सम्मेलन का आयोजन किया गया।मंडल कहते हैं कि इस सम्मेलन का मकसद भाजपा की ओर से हिंदू धर्म की गलत व्याख्या की ओर ध्यान आकर्षित करना और हिंदी धर्म की सही व्याख्या करना था। उनका दावा है कि इस सम्मेलन का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। सम्मेलन में लगभग 15 हजार लोग जुटे थे। तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस सम्मेलन में आए तमाम पुजारियों को रामनामी चादर के अलावा गीता और स्वामी विवेकानंद व रामकृष्ण की पुस्तकें व तस्वीरें भेंट की र्गइं।
इससे पहले बीते साल अप्रैल में रामनवमी व हनुमान जयंती पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व उससे जुड़े संगठनों की ओर से आयोजित कार्यक्रमों की काट के लिए मंडल ने जिले में एक विशाल यज्ञ आयोजित किया था। उसके लिए असम के कामाख्या मंदिर से 11 पुजारी बुलवाए गए थे। मंडल कहते हैं कि बंगाल में हिंदुत्व कार्ड के लिए कोई जगह नहीं है। हमारी सरकार सबके लिए समान रूप से काम करती है। इस ब्राह्मण सम्मेलन को हिंदू पुजारियों का तृणमूल कांग्रेस समर्थित संगठन बनाने की दिशा में एक पहल माना जा रहा है। इससे इमामों की तर्ज पर इन पुजारियों को भी सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल सकता है। 
मंडल ने इस सम्मेलन को अपनी नाक का सवाल बनाते हुए इसे कामयाब बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। इस बीच कांग्रेस भी बहती गंगा में हाथ धोने की तर्ज पर पुरोहितों को भी इमामों की तर्ज पर सरकारी भत्ता देने की मांग उठा कर उनको लुभाने की कवायद में जुट गई है। पार्टी ने इस मुद्दे पर बीरभूम जिले के तारापीठ से आंदोलन शुरू करने का भी एलान किया है। कांग्रेस की दलील है कि लगातार बढ़ती महंगाई में पुरोहितों-पुजारियों के लिए आजीविका चलाना मुश्किल हो रहा है,इसलिए इमामों की तर्ज पर उनको भी सरकारी खजाने से भत्ता मिलना चाहिए।
दरअसल ममता बनर्जी को अहसास हो गया है कि अमित शाह और नरेंद्र मोदी की जोड़ी ने हिन्दुत्व के मुद्दे को जिस तरह व्यापक आयाम दिया है, उससे पश्चिम बंगाल की राजनीति भी बिना प्रभावित हुए नहीं रह सकती, लिहाजा ममता बनर्जी अब इस दिशा में कदम उठा रही हैं। ममता बनर्जी ने मंदिरों के रखरखाव के लिए बोर्ड का गठन किया है। पश्चिम बंगाल में तारापीठ, तारकेश्वर, कालीघाट जैसे मंदिर हैं, ममता बनर्जी ने इन मंदिरों के लिए पुनरूद्धार के लिए बोर्ड का गठन किया है। इससे पहले सीएम ने फुरफरा शरीफ मजार के लिए बोर्ड गठित किया था। ममता बनर्जी आदिवासियों के श्मशान घाट का उद्धार कर रही हैं।
आपको बताता चलूं कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के अहमदपुर में एक सभा को संबोधित करते हुए भाजपा की अगुवाई वाली राजग सरकार पर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के पहले मसौदे में बंगालियों के नाम हटाकर उन्हें असम से बाहर करने की 'साजिश' रचने का आरोप लगाया था। पहले मसौदे का प्रकाशन 31 दिसंबर, 2017 को किया गया। उन्होंने कहा था, 'मैं केंद्र की भाजपा सरकार को आग से नहीं खेलने की चेतावनी देती हूं।3यह करीब 1।80 करोड़ लोगों को राज्य से खदेडऩे की केंद्र सरकार की साजिश है। मामले में गुवाहाटी पुलिस के उपायुक्त (मध्य) रंजन भुइयां ने बताया, 'लतासिल थाने को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के एक कथित भाषण के संदर्भ में शिकायत मिली है। हमने शिकायत दर्ज कर ली है ओर नियमों के अनुरूप जांच करेंगे।' उन्होंने बताया कि गुवाहाटी उच्च न्यायालय के अधिवक्ता तैलेंद्र नाथ दास ने शिकायत की और पुलिस ने आईपीसी की धारा 153 (ए) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। आईपीसी की यह धारा धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, निवास और भाषा के नाम पर लोगों के बीच शत्रुता पैदा करने और सौहार्द बिगाडऩे की कोशिश से संबंधित है। दास ने ममता पर उच्चतम न्यायालय की अवमानना का भी आरोप लगाया है क्योंकि एनआरसी का काम उच्चतम न्यायालय की प्रत्यक्ष निगरानी में हो रहा है। एक और शिकायत शहर के दिसपुर पुलिस थाना में कृषक श्रमिक उन्नयन परिषद प्रमुख प्रमोद कलीता ने दायर की थी।उन्होंने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री अपने भाषण के जरिए लोगों के बीच शत्रुता फैला रही हैं।  देखा जाए तो पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी और सत्तासीन तृणमूल कांग्रेस सीधे तौर पर आमने-सामने आ गई है।समय-समय पर दोनों की रणनीतियां बदलती रहतीं हैं। यहां मुसलमानों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए बीजेपी ने भी मुसलमानों का एक सम्मेलन कर डाला। आने वाले समय में इन तमाम गतिविधियों का जनता पर पर क्या असर पड़ेगा, यह देखने वाली बात होगी। (युवराज) 

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