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कांग्रेस के हिन्दुत्व की ओर बढ़ते कदम

Publish Date: February 06 2018 02:19:20pm

गले में रुद्राक्ष की माला, माथे पर चंदन का टीका और होंठों पर शिव का नाम। ये है कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी का नया अवतार। हाल में हुए हिमाचल प्रदेश और गुजरात के विधानसभा चुनावों के दौरान न सिर्फ राहुल गांधी मंदिर गए बल्कि उन्होंने अपने गले में रुद्राक्ष की माला भी पहनी। उन्होंने खुद कहा कि वे और उनका पूरा परिवार शिवभक्त है मगर सोमनाथ मंदिर में गैर हिन्दुओं के लिए रखी गई विजिटर्स बुक में दस्तख्त करने पर उठे विवाद के बाद कांग्रेस ने राहुल गांधी के जनेऊ धारण किए तस्वीरें जारी कर उनके ब्राह्मण होने का सबूत दिया। राहुल गांधी के निर्वाचन क्षेत्र अमेठी में पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके पोस्टर जारी कर उन्हें परशुराम का वंशज तक बता दिया। 
दरअसल, भारतीय जनता पार्टी को कड़ी टक्कर देने के लिए कांग्रेस ने हिन्दुत्व की ओर कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। सियासी गलियारे में कहा जाता है कि कांग्रेस पहले से ही हिन्दुत्व की समर्थक पार्टी रही है। यह और बात है कि उसने कभी खुलकर हिन्दुत्व का कार्ड नहीं खेला। बाबरी मस्जिद का ताला खुलवाना इसकी एक मिसाल है हालांकि कांग्रेस पर तुष्टिकरण की सियासत करने के आरोप भी खूब लगते रहे हैं। शाहबानो मामले में कांग्रेस की केंद्र सरकार मुस्लिम कट्टरपंथियों के सामने झुक गई थी और इसकी वजह से शाहबानो को अनेक मुसीबतों का सामना करना पड़ा था।
बहरहाल,  कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी की तर्ज पर हिन्दुत्व की राह पकड़ ली है। कांग्रेस को इसका सियासी फायदा भी मिला है। गुजरात विधानसभा चुनाव की 85 दिन की मुहिम के दौरान कांग्रेस के स्टार प्रचारक राहुल गांधी ने 27 मंदिरों में पूजा-अर्चना की थी। उन्होंने जिन मंदिरों के दर्शन किए, उन इलाकों के 18 विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस ने जीत का परचम लहराया। जो सीटें कांग्रेस को मिली, उनमें से आठ पर 2012 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ही जीती थी लेकिन इस बार उसने 10 सीटें भारतीय जनता पार्टी को कड़ी शिकस्त देकर हासिल की हैं। काबिले-गौर है कि राज्य की तकरीबन 87 सीटों पर मंदिरों का सीधा असर पड़ता है और इनमें से आधी से ज्यादा यानी 47 सीटें कांग्रेस को हासिल हुई हैं।
भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी पर इल्जाम लगाया था कि वे चुनावी फायदे के लिए मंदिर जा रहे हैं। इसके जवाब में राहुल गांधी ने कहा था कि उन्हें जहां मौका मिलता है वहां मदिर जाते हैं। वे केदारनाथ भी गए थे। क्या वो गुजरात में है। राहुल गांधी के करीबियों का कहना है कि वे अक्सर मंदिर जाते हैं। राहुल गांधी अगस्त 2015 में दस किलोमीटर पैदल चलकर केदारनाथ मंदिर गए थे।  वे उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के गौरीगंज में दुर्गा भवानी के मंदिर में भी जाते रहते हैं।  इसके अलावा भी बहुत से ऐसे मंदिर हैं जहां वे जाते रहते हैं लेकिन वे इसका प्रचार बिलकुल नहीं करते।
इस साल देश के आठ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिनमें मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड शामिल हैं। इनमें से कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है जबकि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी सत्ता में हैं। फिर अगले ही साल लोकसभा चुनाव होना है। कांग्रेस ने चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि राहुल गांधी राजस्थान के मंदिरों में भी दर्शन करने जाएंगे। वे मकर संक्रांति पर स्नान भी कर सकते हैं। अगले साल जनवरी के अर्द्ध कुंभ में भी राहुल गांधी की एक नई छवि जनता को नजर आ सकती है। 
पिछले लोकसभा चुनाव में हकूमत गंवाने के बाद कांग्रेस को लगने लगा था कि भारतीय जनता पार्टी हिन्दुत्व का कार्ड खेलकर ही सत्ता तक पहुंची है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ए के एंटनी का कहना था कि कांग्रेस को चुनाव में अल्पसंख्यकवाद का खमियाजा भुगतना पड़ा है। इस चुनाव में कांग्रेस 44 सीट तक सिमट गई थी।
राहुल गांधी की हिन्दुववादी छवि को लेकर कांग्रेस नेताओं में एक राय नहीं है। कई नेताओं का मानना है कि पार्टी अध्यक्ष की हिन्दुववादी छवि से कुछ राज्यों में भले ही कांग्रेस को ज्यादा मिल जाएं लेकिन पूर्वोत्तर के राज्यों में पार्टी को इसका नुकसान भी झेलना पड़ सकता है। कांग्रेस की मूल छवि सर्वधर्म सदभाव की रही है। ऐसे में हिन्दुत्व की राह पर चलने से पार्टी का अल्पसंख्यक और सेकुलर वोट क्षेत्रीय दलों की झोली में जा सकता है। ऐसे में क्षेत्रीय दलों को फायदा होगा। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी मुसलमानों की पसंदीदा पार्टी है। इसी तरह पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को अल्पसंख्यकों का भरपूर समर्थन मिलता है।
बहरहाल, राहुल गांधी को सिर्फ मंदिरों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें अन्य मजहबों के धार्मिक स्थानों पर भी जाना चाहिए ताकि कांग्रेस की सर्वधर्म सदभाव, सर्वधर्म समभाव वाली छवि बरकरार रहे। कांग्रेस, कांग्रेस ही बनी रहे तो बेहतर है। देश के लिए भी, अवाम के लिए भी और खुद कांग्रेस के लिए भी यही बेहतर रहेगा।    
फिरदौस खान, लेखक         
(अदिति)

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