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'मनप्रीत की अरबी-फारसी'

Publish Date: March 15 2018 01:42:45pm

चंडीगढ़ में विश्व पंजाबी सम्मेलन में बोलते हुए पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने पंजाब के आईएएस अधिकारियों पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि एक दो अधिकारियों को छोड़ दें तो शेष को अंग्रेजी लिखनी भी नहीं आती। जब उन द्वारा तैयार पत्र मुझे केंद्र सरकार के सम्मुख पढऩा पड़ता तो मैं अपना सिर पीट कर रह जाता हूं। मुझे हैरानी होती है कि उन्होंने आईएएस की परीक्षा कैसे उत्तीर्ण कर ली। वित्त मंत्री मनप्रीत बादल की उपरोक्त टिप्पणी अधिकारी वर्ग में भी चर्चा  का कारण बनी हुई और राजनीतिज्ञों में भी।

मनप्रीत बादल की उपरोक्त टिप्पणी पर गुगली फेंकते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री विजय सांपला ने एक ट्वीट द्वारा कहा कि लोगों को मनप्रीत बादल की अरबी-फारसी समझ नहीं आती। उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि मनप्रीत को आईएएस अधिकारियों की अंग्रेजी समझ नहीं आती तथा अधिकारियों को मनप्रीत की अरबी-फारसी समझ नहीं आती। सांपला ने जहां मनप्रीत सिंह बादल को घेरा, वहीं सरकार की एक वर्ष की कारगुजारी पर भी तीखा व्यंग्य किया। उन्होंने सरकार व अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल की कमी को सरकार की कारगुजारी से जोड़ते हुए विभिन्न मंत्रियों के कामकाज पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कोई सिक्के उछाल कर, कोई शेयरों-शायरी कर तथा कोई ताली ठोक कर सरकार चला रहा है। अपने ट्वीट में उन्होंने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह पर भी शब्दी हमला किया है।

वित्त मंत्री का अंग्रेजी प्रति मोह तो समझ में आता है पर यह दर्शाया उस समय गया जब वह विश्व पंजाबी सम्मेलन में बोल रहे थे। अगर वह पंजाबी सम्मेलन में पंजाबी भाषा को लेकर अधिकारियों की भाषा पर टिप्पणी करते तो बात समझ में आ सकती है लेकिन समस्या यह है कि पंजाबी भाषा के प्रति प्यार दर्शाने वाले अधिकतर नेताओं के बच्चे अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में ही पढ़ते हैं और घरों में भी आपस में पंजाबी व हिन्दी में बात करने की जगह अंग्रेजी में ही बात करते हैं। स्वयं मनप्रीत बादल भी अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूलों और विदेशों में पढ़े हैं, इसलिए इनका मोह भी अंग्रेजी, अरबी व फारसी के प्रति अधिक है। इंसान जितनी भी भाषाएं सीख जाए वह उसके व्यक्तित्व और चरित्र के साथ-साथ मानसिक रूप से भी उसे मजबूत करती हैं। लेकिन जब भाषा को आधार बनाकर किसी को नीचा दिखाने का कोई प्रयास करता है तो वह बात उस व्यक्ति की परिपक्वता पर ही प्रश्न चिन्ह लगा देती है। विजय सांपला ने जो व्यंग्य भरे तीर छोड़े हैं वह सांपला की राजनीतिक परिपक्वता को ही दर्शाते हैं।

प्रदेश और देश की भाषा के प्रति उदासीन रहकर विदेशी भाषा प्रति मोह दिखाना यह मनप्रीत बादल के व्यक्तित्व का कमजोर पहलू ही कहा जा सकता है। मनप्रीत बादल पार्टी के एक वरिष्ठ नेता होने के साथ-साथ जुझारू नेता भी हंै। इसलिए उनके प्रत्येक शब्द और प्रकट भाव को लोग गंभीरता से लेते हैं। इस बात को ध्यान में रखकर उनको कुछ कहने से पहले होने वाले परिणामों बारे अवश्य सोच लेना चाहिए।


अंग्रेजी ही केवल बुद्धिजीवियों की भाषा है, ऐसी सोच रखने वाले व्यक्ति पर ही लोग उंगली उठाएंगे। जालंधर के जिलाधीश वीरेन्द्र कुमार ने तो आईएएस की परीक्षा ही पंजाबी माध्यम से की है। प्रदेश के 90 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों का माध्यम पंजाबी है। उन कर्मचारियों प्रति वित्तमंत्री मनप्रीत बादल का क्या कहना है?

अंग्रेजी के प्रति मोह आज भी दर्शाता है कि हम मानसिक रूप से गुलाम ही हैं और यही कारण हमारे पतन का है। जिस दिन हम पंजाबी व हिन्दी को या अपने प्रदेश व देश की भाषा को अपनाकर जीवन जीना सीख लेंगे उसी दिन हम विकास की राह पर तेजी से अग्रसर होंगे।

अगर विकास चाहते हैं तो प्रदेश और देश की भाषा को मान-सम्मान देना शुरू करें। अंग्रेजी, अंग्रेजी हकूमत की भाषा थी और आज भी है। आम आदमी की भाषा तो पंजाबी, हिन्दी ही है। इसलिए आम आदमी से जुडऩे के लिए उसकी भावना को समझने व उसकी कठिनाइयां को जानने के लिए प्रदेश की भाषा को प्राथमिकता देना आवश्यक है न कि विदेश की भाषा अंग्रेजी को। सरकार पंजाबी में कार्य करने का आदेश देती है और सरकार के वित्त मंत्री अंग्रेजी का मोह नहीं छोड़ पा रहे, इसे त्रासदी ही कहा जा सकता है।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।
 

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