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पानी की आपूर्ति

Publish Date: March 22 2018 02:31:30pm

संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2018 जल विकास रिपोर्ट में कहा गया कि दुनिया में 3.6 अरब लोग यानी आधी वैश्विक आबादी ऐसी है, जो हर साल कम से कम एक महीने पानी के लिए तरस जाती है। 22 मार्च को होने वाले विश्व जल दिवस से पहले यह रिपोर्ट पेश की गई है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पानी की किल्लत झेल रहे लोगों की संख्या 2050 तक 5.7 अरब तक पहुंच सकती है। यूनेस्को की महानिदेशक आद्रे अजोले ने ब्राजिलिया में रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि अगर हमने कुछ नहीं किया तो 2050 तक पांच अरब से ज्यादा लोग ऐसे क्षेत्र में रह रहे होंगे, जहां पानी की आपूर्ति बेहद खराब होगी।  रिपोर्ट के मुताबिक पिछली एक सदी में पानी की खपत छह गुना बढ़ी है। वहीं हर साल एक प्रतिशत पानी का इस्तेमाल बढ़ जाता है। जाहिर तौर पर जनसंख्या वृद्धि, आर्थिक विकास, उपभोग के तरीके में बदलाव से जरूरत ज्यादा बढ़ जाएगी। विकाशसील और उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों में यह मांग ज्यादा होगी। अमेरिका का न्यूयॉर्क शहर पानी की समस्या से निपटने के लिए जलाशय की रक्षा, वन संरक्षण और वातावरण के अनुकूल खेती पर जोर दे रहा है। वहीं चीन स्पंज सिटी प्रोजेक्ट को बढ़ावा दे रहा है, जिसमें ज्यादा से ज्यादा बारिश का पानी जमीन के भीतर पहुंचाने की कोशिश की जाती है ताकि भूजल स्तर में इजाफा हो। अगर दुनिया इससे सीख कर हरित जल नीति को बढ़ावा दें तो कृषि उत्पादन भी बीस प्रतिशत बढ़ जाएगा।

पंजाब के राज्यपाल ने विधानसभा में अपने अभिभाषण में भी कहा है कि पंजाब के पास अतिरिक्त पानी नहीं है। पानी को लेकर पंजाब और हरियाणा आमने-सामने खड़े हैं। कटु सत्य यही है कि जिस तेजी से पंजाब का भूजल-स्तर गिर रहा है उसको देखते हुए कह सकते हैं कि निकट भविष्य में पंजाब में पानी की भारी किल्लत होने जा रही है। हरियाणा में भी पानी की किल्लत तो है ही, लेकिन हरियाणा का कुछ क्षेत्र तो पंजाब द्वारा दिए पानी पर ही निर्भर है।

पानी की किल्लत को न समझते हुए पंजाब व हरियाणा का किसान चावल की फसल को दशकों से तवज्जों देता चला आ रहा है। एक किलो चावल के लिए 5400 लिटर पानी खपत करता है। इसी कारण पंजाब का भू-जल स्तर गिरता चला जा रहा है। चावल बेचने के नाम पर पंजाब पानी ही बेच रहा है। समय की मांग है कि पंजाब व हरियाणा में चावल के उत्पाद क्षेत्र को कम किया जाए ताकि पानी को बचाया जा सके। 

शहरों में भी कार धोने के अलावा, कपड़े धोने व खुली टूटी छोड़ देने के कारण पानी की बहुत बर्बादी हो रही है। पानी की बर्बादी को अगर हम रोक नहीं सके तो हम स्वयं बर्बाद हो जाएंगे। जल ही जीवन है, इस जल को बचाने में ही हमारी भलाई है। इसलिए जहां हमें जंगलों का क्षेत्र बढ़ाना होगा वहीं शहरों में वृक्ष लगाने होंगे। जल की एक-एक बूंद हमारे लिए बहुमूल्य है। इसका सदुपयोग ही होना चाहिए। सरकार व समाज दोनों को अपनी-अपनी जिम्मेवारी समझते हुए अपने कुएं और तलाबों को बचाने के साथ-साथ बरसाती पानी को जमीन के भीतर भेजने के लिए भी कार्य युद्ध स्तर पर करने की आवश्यकता है।अगर पानी के स्रोत सूख गये तो समझो जीवन की हरियाली भी सूख जाएगी, जीवित रहना है तो जल को बचाना ही होगा।


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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