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राजनीति

मोदी सरकार का लक्ष्य

Publish Date: March 28 2018 02:14:26pm

रविवार को आकाशवाणी पर अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने केंद्रीय बजट में घोषित फैसले की याद दिलाई और कहा कि किसानों की मेहनत के अनुरूप बेहतर आय सुनिश्चित करने के लिए उनकी सरकार कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि अधिसूचित फसलों के लिए एमएसपी उनकी लागत का कम से कम डेढ़ गुणा घोषित किया जाएगा। अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने देश के संविधान निर्माता डा. भीमराव आम्बेडकर की जयंती के मौके पर 14 अप्रैल से पांच मई तक सरकार के ग्राम स्वराज अभियान का जिक्र किया और कहा कि उनसे प्रेरणा लेकर सरकार ने देश भर में ग्राम विकास, गरीब कल्याण और सामाजिक न्याय के कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। डा. आंबेडकर के भारत को औद्योगिक सुपरपावर बनाए जाने के सपने को मेक इन इंडिया अभियान पूरा कर रहा है। 'मन की बात' के 42वें संस्करण में प्रधानमंत्री ने किसानों और डा. अम्बेडकर के अलावा स्वास्थ्य, योग और तमाम मुद्दों पर चर्चा की। नरेन्द्र मोदी ने इस कार्यक्रम में कई ऐसे लोगों का उल्लेख किया जिन्होंने समाज में अपना योगदान कुछ अलग काम करके दिया है। उन्होंने कानपुर के डॉक्टर से लेकर असम के रिक्शा चालक का जिक्र किया, जिसके सरोकार से समाज को फायदा पहुंच रहा है। किसान कल्याण की अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार किसानों की मेहनत के अनुरूप बेहतर आय सुनिश्चित करने में जुटी है। अधिसूचित फसलों के लिए न्यूूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) उनकी लागत का कम-से-कम डेढ़ गुणा घोषित किया जाएगा। एमएसपी के लिए जो लागत जोड़ी जाएगी, उसमें श्रमिकों का मेहनताना, मवेशी, मशीन का खर्च, बीज का मूल्य, उपयोग की गई हर तरह की खाद का मूल्य, सिंचाई का खर्च, भूमि राजस्व, ब्याज और जमीन के पट्टे का किराया आदि तथ्यों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, राम मनोहर लोहिया, चरण सिंह और देवी लाल जैसे नेताओं की भूमिका की भी सराहना की, जिन्होंने राष्ट्र की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण पहलुओं में कृषि और किसान के महत्व को समझा था। डा. आम्बेडकर का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कई बार बाबा साहेब का मजाक उड़ाया गया और एक पिछड़े परिवार के बेटे को आगे बढऩे से रोकने के लिए उनके रास्ते में तमाम तरह की बाधाएं खड़ी कई गईं। प्रधानमंत्री ने कहा, आम्बेडकर ने हमें दिखाया कि सफल होने के लिए यह जरूरी नहीं कि एक व्यक्ति सम्पन्न और धनी परिवार में ही पैदा हो। उन्होंने कहा कि नया भारत आम्बेडकर का भारत है। यह गरीब का भारत है, पिछड़ों का भारत है। उन्होंने कहा कि डा. आम्बेडकर की जयंती के अवसर पर 14 अप्रैल से पांच मई तक ग्राम स्वराज अभियान आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत पूरे भारत में ग्राम-विकास, गरीब कल्याण और सामाजिक न्याय पर अलग-अलग कार्यक्रम होंगे। मोदी ने कहा कि बाबा साहेब ही थे, जिन्होंने जल-शक्ति को राष्ट्र-शक्ति के रूप में देखा। विभिन्न रिवर वैली अथॉरिटी, जल से संबंधित अलग-अलग कमीशन-ये सब बाबा साहेब आम्बेडकर की ही दृष्टि थी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी 'मन की बात' में जो कहा उससे उनकी नीयत व नीति को समझा जा सकता है। प्रधानमंत्री ने जब से सत्ता संभाली है तभी से 'सब का साथ सब का विकास' की नीति पर ही कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री स्वयं एक गरीब परिवार से संबंधित हैं और गरीबी क्या होती है और गरीब की क्या स्थिति होती है, इस बात को व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर भलीभांति जानते हैं।
अपनी राजनीतिक सूझबूझ और पुरुषार्थ के कारण ही वह प्रधानमंत्री पद पर पहुंचे और आज विश्व की राजनीति में अपनी विशेष पहचान बनाने में भी सफल रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनावों को सम्मुख रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सत्ता से बाहर करने के लिए विपक्षी दल एकजुट हो रहे हैं। सिद्धांत तो उन सबका अलग-अलग हैं, लेकिन दुश्मन का दुश्मन दोस्त की नीति अपनाकर वह लामबंद हो रहे हैं।
विपक्षी दलों की उपरोक्त नीति उत्तर प्रदेश और बिहार के उपचुनावों में सफल रही है, यह बात सबके सामने है। उपरोक्त परिणामों को देखते हुए सपा, बसपा, कांग्रेस तथा अन्य दल काफी उत्साहित दिखाई दे रहे हैं। राजनीति में अगले पल क्या हो जाए इस कारण 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर अभी कुछ कहना उचित नहीं होगा। लेकिन मोदी व उनके सहयोगियों को तो अभी से सतर्क हो कार्य करने की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी 'मन की बात' में दलितों व किसानों को छुआ है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं व छोटे से छोटे कार्यकर्ता को प्रधानमंत्री से मिले संकेत को समझते हुए दलित व किसानों तक पहुंच कर उनकी समस्याओं को समझ उनके समाधान हेतु धरातल स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है। आज देश के किसान और दलित दोनों में रोष है। इस रोष को जितनी जल्दी भाजपा नेतृत्व शांत कर पायेगा उतना ही अधिक उसे राजनीतिक लाभ मिलेगा।
मोदी सरकार की दलित व किसान संबंधित नीतियां तो ठीक है, लेकिन धरातल स्तर पर दलितों व किसानों की स्थिति में कोई विशेष अंतर न दिखाई देने के कारण दोनों वर्गों में रोष कायम है, इसे कम करना ही भाजपा व मोदी सरकार का लक्ष्य होना चाहिए।



इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू। 

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