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आतंकवाद एक बड़ा खतरा

Publish Date: April 08 2018 02:52:55pm

गुट निरपेक्ष देशों की 18वीं मध्यावधि मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक है। उन्होंने कहा कि यह हमारे नागरिकों को अपना शिकार बनाता है और विकास लक्ष्य पूरा करने की हमारी क्षमता को कमजोर कर देता है। सुषमा ने कहा कि 1996 में भारत ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर एक व्यापक समझौते (सीसीआईटी) का प्रस्ताव किया था, ताकि मौजूदा कानूनी ढांचे को मजबूत किया जा सके। दो दशक बाद भी इस चर्चा ने काफी कम प्रगति की है जबकि आतंकवादियों ने अपनी हरकतें जारी रखी हैं। सुषमा ने कहा कि प्रथम कदम के तौर पर हमें सीसीआईटी को अंतिम रूप देने के अपने संकल्प का नवीकरण करना चाहिए। गुट निरपेक्ष देशों को इस लक्ष्य के प्रति वैश्विक समुदाय को अवश्य ही प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा की आखिरी उच्च स्तरीय बैठक में इस वैश्विक संस्था में सुधार के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने मजबूत इच्छा जाहिर की थी। उन्होंने कहा कि आज की तारीख में अंतर सरकारी वार्ता प्रक्रिया अहम विषयों पर बातचीत के लिए एक विश्वसनीय सामूहिक प्रक्रिया में सावधानीपूर्वक आगे बढ़ी है।

मास्कों में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में बोलते हुए भारत की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अब भी प्रमुख खतरा बना हुआ है और कुछ गैर जिम्मेदाराना राष्ट्र लगातार आतंकवादी संगठनों को संरक्षण दे रहे हैं जो चिंता का विषय है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि आतंकवादी खुद को नये और ज्यादा खतरनाक तौर पर पेश कर रहे हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि नई तकनीक और सोशल मीडिया नेटवक्र्स का इस्तेमाल कर युवा मस्तिष्क में कट्टरवाद भरने और कुछ गैर जिम्मेदाराना देशों द्वारा आतंकवादी संगठनों को लगातार संरक्षण दिए जाने का समग्र तरीके से समाधान तलाशने की जरूरत है। सीतारमण ने कहा कि आतंकवादियों द्वारा पश्चिम एशिया में एक क्षेत्रीय आधार बनाने के प्रयास को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

गौरतलब है कि पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् ने विश्व भर के आतंकियों की सूची जारी की है। इस सूची में पाकिस्तान के 139 लोगों व संगठनों के नाम हैं। पाकिस्तान के समाचार पत्र डॉन के अनुसार सूची में शीर्ष पर ओसामा बिन-लादेन के उत्तराधिकारी अमान अल जवाहिरी का नाम है। इस सूची में उन सभी को चिह्नित किया गया है जो पाकिस्तान में रह चुके हैं, वहां से अपनी गतिविधियां चलाई हैं या फिर अपनी गतिविधियां चलाने के लिए पाकिस्तानी जमीन का इस्तेमाल करने वाले संगठनों से जुड़े रहे हैं। एलईटी प्रमुख हाफिज सईद को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में शामिल किया गया है जो इंटरपोल का वांछित है और कई आतंकी गतिविधियों में शामिल है। लश्कर-ए-ताइबा ने मुंबई में कई जगहों पर आतंकवादी हमले कराए थे। इसमें छह अमेरिकी नागरिकों सहित 166 लोग मारे गए थे। खबर के अनुसार संयुक्त राष्ट्र की इस सूची में भारतीय नागरिक दाऊद इब्राहिम कासकर का नाम भी शामिल है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के अनुसार दाऊद के पास कई पासपोर्ट हैं जो रावलपिंडी और कराची से जारी हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र का दावा है कि कराची के नूराबाद में दाऊद का एक बड़ा बंगला है। वह 1993 के मुंबई बम विस्फोटों का मास्टरमाइंड है। सूची में हाजी मोहम्मद, अब्दुल सलाम और जफर इकबाल भी शामिल है।

पाकिस्तान समर्थित करीब 13 आतंकी पिछले दिनों कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे। पंजाब में आईएसआई के एजेंट के तौर पर काम करने वाले कई युवा पकड़े गए हैं। भारत में अशांति पैदा करने और हिंसा फैलाकर दहशत फैलाने के इरादे से पाकिस्तान पिछले 3 दशक से अधिक समय से आतंकियों को समर्थन व संरक्षण दे रहा है। भारत ने विश्व मंच पर पाकिस्तान द्वारा अपनाए दोहरे मापदंडों को कई बार बेनकाब किया है। शुरू-शुरू में अमेरिका सहित कई देश पाकिस्तान की आतंक फैलाने में निभाई जाने वाली भूमिका पर गंभीर नहीं थे लेकिन अब तो स्थिति काफी स्पष्ट है लेकिन अभी भी आतंकियों को समर्थन देने के मामले मे अमेरिका व उनके सहयोगी देशों ने पाकिस्तान सहित उन तमाम देशों विरुद्ध कोई ठोस नीति नहीं अपनाई, इसी कारण विश्व में आतंकवादी घटनाएं होती रहती हैं।

भारत को आतंकवाद विरुद्ध स्वयं एक कठोर व स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। भारत विश्व स्तर पर तभी स्थाई तौर पर एक स्थान बनाने में सफल होगा जब वह आतंकवादियों विरुद्ध कठोर नीति अपनाएगा। अमेरिका, इंग्लैंड, जापान, फ्रांस के साथ-साथ अन्य देशों को भी आतंकवाद विरुद्ध एकजुट होकर कार्रवाई करनी चाहिए और जो देश आतंकवाद को बढ़ावा व आतंकियों को संरक्षण दे रहे हैं उन देशों का राजनीतिक व आर्थिक मंचों पर बहिष्कार होना चाहिए। आतंकवाद पर अगर समय रहते काबू नहीं पाया गया तो भविष्य में इसके मजबूत होने की संभावनाएं हैं और शांतिप्रिय देशों के लिए एक बड़ा खतरा होगा, भारत द्वारा दी जा रही चेतावनी को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।


            
-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक,
दैनिक उत्तम हिन्दू। 

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