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केजरीवाल का माफी मांगो अभियान

Publish Date: April 10 2018 12:30:05pm

केजरीवाल एक नई राजनीति लेकर आये थे लेकिन उनकी वो नई राजनीति अब लोगों को समझ आ रही है। अन्ना आन्दोलन से पैदा हुई ऊर्जा का उन्होंने पूर्ण रूप से अपने निजी हित में इस्तेमाल किया है। शुरू में ऐसा लगा कि वो एक सामाजिक और राजनीतिक आन्दोलनकारी हैं जो एक नई राजनीति करते हुए कुछ बेहतर परिणाम देने के लिये एक राजनीतिक पार्टी खड़ी कर रहे हैं और कितने ही लोग देशसेवा एवं समाजसेवा के लिये उनसे जुड़ते चले गये। इस प्रकार रातों रात एक पार्टी खड़ी हो गई। 
शुरूआत में उनकी पार्टी लोकतान्त्रिक मूल्यों पर आधारित थी लेकिन धीरे-धीरे आम आदमी पार्टी केजरीवाल एंड कम्पनी बन गई और आज आम आदमी पार्टी का मतलब ही केजरीवाल है। ऐसा नहीं है कि केजरीवाल अकेले ऐसे नेता हैं जो इस तरह से पार्टी पर काबिज हैं बल्कि कम्युनिस्ट दलों और भाजपा को छोड़कर ज्यादातर राजनीतिक पार्टियाँ निजी कम्पनियाँ ही बन चुकी हैं और इसमें राष्ट्रीय पार्टी काँग्रेस भी शामिल हैं हालांकि धीरे-धीरे यह एक क्षेत्रीय पार्टी बनने की ओर अग्रसर है। 
इसलिये देखा जाये तो केजरीवाल की आलोचना इस आधार पर नहीं की जानी चाहिये कि उन्होंने आम आदमी पार्टी को निजी सम्पत्ति बना लिया है लेकिन समस्या यह है कि वो तो अलग तरह की राजनीति करने आये थे और उन्होंने किसी जाति-धर्म की बात भी नहीं की थी लेकिन धीरे-धीरे अन्य नेताओं की तरह ही हो गये हैं। वास्तव में केजरीवाल ने जिन करोड़ों लोगों के मन में एक नई उम्मीद जगाई थी वो खत्म हो गई है और यही उनका पाप है।
देखा जाये तो केजरीवाल ने अपनी पार्टी को एक नकारात्मक विचारधारा पर खड़ा किया था जिसमें वो सभी राजनीतिक दलों और नेताओं को भ्रष्ट साबित करने पर तुले हुए थे और वीआईपी संस्कृति को खत्म करके आम आदमी की सरकार बनाना चाहते थे लेकिन उन्होंने इसके लिये हिट एंड रन की नीति अपनाई जिसके तहत वो दूसरे नेताओं पर बिना किसी सबूत के अनर्गल और निराधार आरोप लगाकर भाग जाते थे। दूसरा पूछता रहता था कि उनके आरोप का आधार क्या है लेकिन जवाब उनका एक ही होता था कि उनके पास सबूत है और वो सत्ता में आने के बाद उन सबूतों के आधार पर कार्यवाही करेंगे। वो पूरी तरह से झूठ की राजनीति कर रहे थे और इस झूठ के आधार पर ही जनता में अपना जनाधार बढ़ाते जा रहे थे। आज हम जो आम आदमी पार्टी देख रहे हैं वो इसी झूठ की राजनीति पर खड़ी की गई है। 
जिन नेताओं पर उन्होंने निराधार आरोप लगाये थे वो जानते थे कि केजरीवाल झूठ बोल रहे हैं और उनका चुप रहना उनके राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन के लिये हितकर नहीं होगा इसलिये धीरे-धीरे सभी नेताओं ने उन पर मानहानि के मुकदमे दर्ज करवा दिये। जब यह मुकदमे दर्ज किये जा रहे थे तो यही कहा करते थे कि ये लोग डराकर उन्हें चुप कराना चाहते हैं लेकिन वो डरने वाले नहीं हैं और अदालत में इन लोगों के खिलाफ सबूत पेश करेंगे जिससे जनता में यह संदेश जा रहा था कि केजरीवाल सच बोल रहे हैं और ये नेता उन्हें डराना चाहते हैं। लोगों को उनकी ईमानदारी पर पूरा यकीन हो चला था। देखा जाये तो उन्होंने उस समय केवल 'इल्जाम लगाओ आन्दोलनÓ शुरु किया हुआ था लेकिन अब एक नया आन्दोलन शुरू करने के लिये वो मजबूर हो गये हैं और वो है 'माफी माँगो आन्दोलन।'
काँग्रेस नेता अजय माकन ने बयान दिया है कि केजरीवाल को अपना नाम माफीवाल रख लेना चाहिये। देखा जाये तो यही सही होगा क्योंकि अभी तो केजरीवाल को कई लोगों से माफी माँगनी पड़ेगी क्योंकि उनके इल्जामों की सूची बहुत लम्बी है। आम आदमी पार्टी में केवल केजरीवाल ही नहीं हैं जिन्होंने विरोधी नेताओं पर उल्टे-सीधे आरोप लगाये हैं बल्कि उनके साथी नेताओं ने भी इसमें उनका पूरा साथ दिया है और अब कुछ दिनों में इन लोगों को भी माफी माँगने का अभियान शुरू करना पड़ सकता है। वास्तव में केजरीवाल एक-एक करके उन लोगों से माफी माँग रहे हैं जिन पर उन्होंने निराधार और अनर्गल आरोप लगाये थे और अभी यह सिलसिला रूकने वाला नहीं है। उन्होंने भडाना से माफी माँगी, मजीठिया से माँगी और अब गडकरी, सिब्बल एवं उनके पुत्र से भी माफी माँग ली है लेकिन समस्या यह है कि जेटली उन्हें आसानी से माफ करने के मूड में नहीं हैं और आगे भी सभी उन्हें आसानी से माफ कर देंगे, इसकी कोई गारन्टी नहीं है।

सीमा पासी, लेखक (युवराज)
 

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