Thursday, February 22,2018     ई पेपर
ब्रेकिंग न्यूज़
पंजाब

72 साल बाद लब्बू राम दोआबा स्कूल पहुंचे सत्यदेव हांडा, पुरानी यादें की ताजा

Publish Date: February 09 2018 05:14:25pm

जालंधर (उत्तम हिन्दू न्यूज): विदेश में बैठे पंजाबियों को अपनी मिट्टी और पंजाब से जुड़ीं यादों से कितना लगाव है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब भी अवसर मिलता है वे पुरानी यादों को ताजा कर ही लेते हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं सत्यदेव हांडा। लंदन में रहने वाले सत्यदेव हांडा 72 साल बाद अपने उसी लब्बू राम दोआबा स्कूल पहुंचे जहां उन्होंने 1945 से 1947 के बीच पांचवीं और छठी कक्षा की पढ़ाई की। हांडा किसी रिश्तेदार की शादी के सिलसिले में जालंधर आए हुए हैं। 85 वर्षीय हांडा के साथ उनके पोते सन्नी ने भी स्कूल की विजिट की। कक्षाओं में जाकर जब सत्येदव हांडा ने बच्चों से बात की तो वे भावुक हो गए। वह उस कक्षा में भी गए जहां वह पांचवीं में पढ़ते थे। सत्यदेव हांडा ने बताया कि पहले के मुकाबले अब स्कूल की बिल्डिंग में काफी बदलाव आ चुका है। पहले तो दोआबा कॉलेज की ग्राउंड में हमारी सुबह की प्रार्थना होती थी, उसकी आवाज हमारे स्कूल में भी आती थी। हर रोज सारे मंत्र याद करके बोलते थे, उसके बाद एक्सरसाइज करते थे। उस समय बच्चों की शारीरिक गतिविधियों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता था। सत्यदेव ने बताया कि वह माई हीरां गेट एरिया में अपने भाई कृष्ण हांडा के साथ रहते थे। साल 1957 में इंग्लैंड चले गए। वहां कॉस्ट काउंटिंग की पढ़ाई की और फिर एक मल्टी नेशनल कंपनी में नौकरी की। उस कंपनी से सत्येदव बतौर डायरेक्टर रिटायर हुए। सत्यदेव हांडा 13 साल बाद भारत आए हैं और उनकी दिली इच्छा थी कि वह अपने स्कूल और श्री देवी तालाब मंदिर जरूर जाएं। 

बोर्ड पर 1954 से पहले के प्रिंसिपलों के नाम नहीं थे 
सत्यदेव हांडा ने ङ्क्षप्रसिपल एसके भारद्वाज से भी मुलाकात की। स्कूल में प्रिंसिपलों के नाम वाला जो बोर्ड लगा था उसमें 1954 से पहले रह चुके ङ्क्षप्रसिपलों के नाम अंकित नहीं थे। सत्यदेव हांडा ने पांचवीं कक्षा देखी जहां पर वह बैठकर पढ़ा करते थे।  

स्कूल स्टाफ दिखा बहुत उत्साहित
सत्यदेव हांडा की विजिट के दौरान स्कूल स्टाफ काफी उत्साहित था क्योंकि वे उनसे जानना चाहता था कि आजादी से पहले उनका स्कूल कैसा लगता था। स्कूल की गतिविधियां कैसी थीं और कौन सी कक्षा किस रूम में लगती थी। स्टाफ ने स्कूल के 72 साल पुराने छात्र सत्यदेव हांडा से स्कूल से जुड़ी कई पुरानी यादों के बारे में बात की। 

गणित और इतिहास थे फेवरेट सब्जेक्ट
सत्यदेव हांडा ने बताया कि गणित और इतिहास उनके फेवरेट सब्जेक्ट थे। जाडला में रहते हुए वह उर्दू पढ़ते थे तो यहां पर आकर उन्होंने हिंदी व अंग्रेजी पढऩी शुरू कर दी। शुरू में दिक्कत हुई लेकिन बाद में हिंदी लिखनी भी सीख ली। उन्होंने बताया कि पहले तो स्कूल के सामने कोई दीवार नहीं होती थी, सिर्फ मिट्टी की पहाड़ सा बना होता था। स्कूल के सामने से दोआबा कॉलेज आसानी से दिखाई देता था। अब यहां पर गुरुद्वारा बना हुआ है वहां पर पहले गन्ने के खेत हुए करते थे। कई बार आधी छुट्टी के समय हम स्कूल से जाकर गन्ने चुरा कर खाते थे। 
 


WhatsApp पर न्यूज़ Updates पाने के लिए हमारे नंबर 9814266688 को अपने Mobile में Save करके इस नंबर पर Missed Call करें ।


सेंचुरियन टी-20: द. अफ्रीका ने भारत को 6 विकेट से दी मात

सेंचुरियन(उत्तम हिन्दू न्यूज): कप्तान जीन पॉल ड्युम्नी (नाबाद 6...

कांग्रेस के करीब हुए अमिताभ बच्चन, गरमाई सियासत

मुंबई (उत्तम हिन्दू न्यूज): दक्षिण भारत में रजनीकांत, कमलहासन...

top