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बेनकाब होता पाकिस्तान

Publish Date: June 26 2017 04:03:03pm

स्पेन में 18 से 23 जून तक हुई एफएटीएफ की प्लेनरी बैठक में पाकिस्तान में आतंकी संगठनों को मिल रही फंडिंग पर रिपोर्ट पेश की गई। इसमें कहा गया है कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे संयुक्त राष्ट्र संघ से प्रतिबंधित आतंकी संगठन पाकिस्तान में खुलेआम सक्रिय हैं और आर्थिक लेन-देन कर रहे हैं। पाकिस्तान इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
सभी सदस्य देशों ने पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई का मामला इंटरनेशनल कोऑपरेशन रिव्यू ग्रुप (आइसीआरजी) को सौंप दिया। बाद में आइसीआरजी ने एशिया पैसिफिक ग्रुप (एजीपी) को एक महीने के भीतर पाकिस्तान द्वारा आतंकी फंडिंग रोकने के लिए उठाए गए कदमों की रिपोर्ट देने को कहा है, ताकि जुलाई में होने जा रही एजीपी की वार्षिक बैठक में इस पर चर्चा की जा सके।
एजीपी के रिपोर्ट नहीं देने की स्थिति में आइसीआरजी ने पाकिस्तान को सीधे उसे रिपोर्ट देने को कहा कि उसने आतंकी फंडिंग रोकने के लिए क्या उपाय किए हैं। एफएटीएफ मापदंड के अनुरूप आतंकी फंडिंग रोकने में विफल रहने की स्थिति में पाकिस्तान को कई तरह से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
भारत ने पिछले साल अक्टूबर में भी पेरिस में हुई एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्तान में आतंकी संगठनों को हो रही भारी फंडिंग का मुद्दा उठाया था। भारत का कहना था कि संयुक्त राष्ट्र संघ से अंतर्राष्ट्रीय आतंकी संगठनों की सूची में डाले गए लश्कर-ए-तैयबा, जमात-उद- दावा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहे हैं और आतंकी हमलों के लिए फंड इक_ा कर रहे हैं।
भारत के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए एफएटीएफ ने इसकी जांच का फैसला किया और एशिया पैसिफिक ग्रुप को इस पर तीन महीने के भीतर रिपोर्ट देने को कहा। लेकिन एशिया पैसिफिक ग्रुप के सदस्यों को पाकिस्तान प्रभावित करने में सफल रहा और रिपोर्ट तैयार नहीं होने दी।
इसके बाद भारत ने फरवरी में एफएटीएफ की बैठक में फिर यह मुद्दा उठाया तो पाकिस्तान की ओर से इसका तीखा विरोध हुआ। पाकिस्तान की कोशिश थी कि इस मुद्दे को तकनीकी पहलुओं में उलझा दिया जाए। लेकिन, अमेरिका और यूरोपीय देशों के भारत के प्रस्ताव पर मिले समर्थन से पाकिस्तान की मंशा सफल नहीं हो सकी। एफएटीएफ बैठक की अध्यक्षता कर रहे स्पेन के वेगा सेरानो ने पाकिस्तान को आतंकी फंडिंग पूरी तरह रोकने के लिए तीन महीने का नोटिस थमा दिया।
अमेरिकी संसद की प्रतिनिधि सभा में दो वरिष्ठ सांसदों ने पाकिस्तान का गैर नाटो लेकिन प्रमुख सहयोगी का दर्जा खत्म करने का विधेयक पेश किया है। दोनों सांसदों के अनुसार पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में प्रभावी भूमिका अदा नहीं कर पाया, इसलिए उसका प्रमुख सहयोगी का दर्जा खत्म  किया जाए। इस दर्जे के चलते अमेरिका की तरफ से तमाम सैन्य और आर्थिक सुविधाएं मिलती हैं। विधेयक रिपब्लिकन पार्टी के टेड पो और डेमोक्रेटिक पार्टी के रिक नोलन ने पेश किया। सांसद टेड पो ने कहा, पाकिस्तान को यह दर्जा सन 2004 में मिला था। तत्कालीन राष्ट्रपति जार्ज बुश ने अलकायदा और तालिबान से लडऩे के लिए पाक को विशेष सुविधाएं देने का निर्णय लिया था। इस सुविधा के बदले पाक को अमेरिका के प्रति जवाबदेह रहना था।
पाकिस्तान जिस तरह आतंकी संगठनों को संरक्षण व समर्थन देता है। इस बात को भारत पिछले कई दशकों से अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठा रहा था लेकिन राजनीतिक कारणों और आर्थिक लाभ-हानि को देखते हुए अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस इत्यादि देशों ने उपरोक्त मामले में धीरे चलो वाली नीति अपनाई।
अब आतंकवाद उपरोक्त देशों सहित विश्व के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है जो अब पाकिस्तान विरुद्ध अमेरिका सहित अन्य बड़े देश चीन को छोड़कर पाक पर दबाव बनाकर आतंकियों व उनके संगठनों विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। पाकिस्तान द्वारा आतंकियों को दिए समर्थन और संरक्षण के कारण पाक में आंतरिक हालात भी खराब हो रहे हैं। पाक में एक के बाद एक हो रहे धमाकों से स्पष्ट है कि आतंकी अब पाकिस्तान में भी अपना स्थाई स्थान बनाने की फिराक में हैं। अगर आतंकियों के पैर पाकिस्तान में और मजबूत हो जाते हैं तो भारत के लिए यह एक चिंता का विषय होना चाहिए।
पाकिस्तान के समर्थन में जिस तरह चीन आ रहा है और पाक अधिकृत कश्मीर में अपने आप को स्थापित कर रहा है। इसे भारत को एक गंभीर चुनौती के रूप में ही देखना चाहिए। भारत की जनता पाकिस्तान के साथ दो-दो हाथ करना चाहती है। भारतीय जन-मानस का मानना है कि पाकिस्तान से युद्ध कर समस्या का स्थायी हल ढूंढा जाए। युद्ध तो आखिरी विकल्प ही होता है। परिस्थितियां तब उपरोक्त आखिरी कदम की मांग करेंगी तो भारत उपरोक्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटने वाला। अभी वो समय आया नहीं है। भारत को परिस्थितियों को देखते हुए अपनी सीमाओं पर चौकसी और बल दोनों बढ़ा देना चाहिए क्योंकि पाकिस्तान पर बढ़ता दबाव उसकी हताशा को बढ़ाता है और हताशा में पाक कोई भी कदम उठा सकता है।
सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। पाक के समर्थन में खड़ा चीन हमारी सुरक्षा के लिए एक बड़ी चेतावनी है। इस चेतावनी को समझते हुए ही हमें राजनीतिक, आर्थिक व सैन्य दृष्टि से और मजबूत होने की आवश्यकता है।


इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, उत्तम हिन्दू।

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