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इजरायल में मोदी

Publish Date: July 06 2017 03:43:29pm

14 मई 1948 में अस्तित्व में आये इजरायल की आबादी 2015 में हुई जनगणना के अनुसार 84 लाख के करीब है। इसका क्षेत्रफल 20770 वर्ग किलोमीटर है। इजरायल ने अपनी सैन्य ताकत के बल से दुनिया में अपनी विशेष पहचान बनाई है। इजरायल और भारत के राजनयिक संबंध 1992 में स्थापित हुए थे। लेकिन मुस्लिम देशों को खुश रखने व भारत के मुस्लिम मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए पिछले 70 वर्षों में इजरायल यात्रा पर कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री नहीं गया था। विश्व के मुस्लिम देश इजरायल को अरब की जमीन पर अवैध कब्जाधारी ही मानते हैं। पिछले 7 दशकों में इजरायल ने आर्थिक, कृषि और सैन्य क्षेत्र में जो उन्नति की है और जिस तरह इजरायल के लोगों ने अपने पर हुए हमलों का सामना किया है उसको देखते हुए कहा जा सकता है कि अब इजरायल पर अरब या मुस्लिम देश भविष्य में हमला नहीं करेंगे। हां सीमा पर तनाव भी बना रहेगा और छोटी-मोटी घुसपैठ जैसी घटनाएं भी होती रहेंगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान जिस गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत हुआ और मोदी के इजरायल पहुंचने पर जिन शब्दों का प्रयोग अपनी भावनाओं को प्रकट करने के लिए इजरायली प्रधानमंत्री ने किया उससे स्पष्ट होता है कि इजरायल भारत को पूरा महत्व और इज्जत देता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इजरायल की धरती पर कदम रखते ही इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू ने जब हिन्दी में कहा, 'आपका स्वागत है, मेरे दोस्त', तभी अंदाजा लग गया कि यहूदियों का यह देश बेसब्री से किसी भारतीय प्रधानमंत्री का 70 वर्षों से इंतजार कर रहा था। बेन गुरियन एयरपोर्ट पर इजरायली मंत्रिमंडल के समस्त 11 मंत्री मोदी के स्वागत के लिए पलक बिछाए मौजूद थे जबकि नेतन्याहू ने दोनों देशों के रिश्ते को आसमान से भी ऊंचा करार दिया। अभूतपूर्व स्वागत करते हुए उन्होंने मोदी को भारत और विश्व का महान नेता बताते हुए कहा कि इस पल का हमें 70 वर्षों से इंतजार था। प्रोटोकॉल तोड़ते हुए नेतन्याहू खुद एयरपोर्ट पर मोदी की अगवानी करने पहुंचे। ऐसा सम्मान यहां अमेरिकी राष्ट्रपति व पोप को ही दिया जाता है। दोनों नेताओं ने सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करने और आतंकवाद जैसे समान खतरों से मिलकर निपटने का संकल्प लिया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी पूरी गर्मजोशी के साथ कहा शलोम, मुझे यहां आने पर खुशी है। मैं एयरपोर्ट पर अगवानी करने आए अपने दोस्त प्रधानमंत्री नेतन्याहू का आभार व्यक्त करता हूं। यह मेरा सौभाग्य है कि इजरायल की यात्रा करने वाला मैं पहला भारतीय प्रधानमंत्री हूं। हमें आतंकवाद के सांझा खतरों से अपने समाज को सुरक्षित करना होगा। हमारी सभ्यता पुरानी  है, लेकिन देश युवा है। हमारे पास प्रतिभावान और कुशल युवा है जो हमारी मुख्य ताकत हैं। इजरायल एक महत्वपूर्ण भागीदार है। लिहाजा हमारा साथ मिलकर चलने का यह सफर हमारे हित में होगा। भारत और इजरायल के संबंध कुछ अलग किस्म के हैं। दोनों देश द्विपक्षीय सहयोग पर चुपचाप बात करते हैं। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के दौरान होने वाले समझौतों के बारे में भी पहले से मुकम्मल तौर पर कुछ भी नहीं सामने आया है। हालांकि दोनों देशों के राजनीतिज्ञों, नेताओं और अधिकारियों के हवाले से जो बातें छनकर सामने आई हैं, उनसे इन समझौतों के होने की उम्मीद जगी है। 
• भारत और इजरायल के बीच कारोबार और व्यापार क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए 4 करोड़ अमेरिकी डॉलर का एक सांझा कोष बनाने पर समझौता हो सकता है। 
• बॉलीवुड फिल्म निर्मातओं को इजरायल में शूटिंग के लिए प्रोत्साहित करने को लेकर उन्हें वहां रियायतें देने के मामले में दोनों देशों के बीच समझौता होने की उम्मीद है। 
• पर्यटन को बढ़ावा देने और पानी व कृषि के क्षेत्र में संयुक्त सरकारी परियोजनाओं को बढ़ावा दिए जाने के प्रस्ताव पर भी दोनों देशों के बीच समझौता हो सकता है।  गंगा के एक हिस्से की सफाई को लेकर भी दोनों के बीच समझौता हो सकता है। हवाई संपर्क और निवेश बढ़ाने को लेकर भी सहमति बन सकती है।  साइबर सुरक्षा भारत के लिए चिंता का विषय रहा है। इस क्षेत्र में भी अहम समझौते हो सकते हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इसके संकेत भी दे चुके हैं।  अंतरिक्ष क्षेत्र में दोनों देशों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इजरायली अतंरिक्ष एजेंसी के निदेशक एवी ब्लासबर्गर पहले ही भारतीय प्रक्षेपकों को भरोसेमंद बता चुके हैं।  भारत इजरायल में अपना सांस्कृतिक केंद्र खोलेगा। इस बारे में भी समझौता हो सकता है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच शिक्षा, शोध और स्वास्थ्य से जुड़े समझौते भी संभव है।  इजरायली रक्षा उद्योगों ने भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर काम करने के प्रति अपना झुकाव दिखाया है। इसलिए 'मेक इन इंडिया' को भी इस दौरे से मजबूती मिलने की उम्मीद जगी है।  इनोवेशन, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, विकास व उच्च तकनीकी के क्षेत्र में द्विपक्षीय लाभ के कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। लेख प्रकाशित होने तक इनकी घोषणा हो सकती है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इजरायल दौरे पर देश व दुनिया की नजरें टिकी हैं। मोदी की इजरायल यात्रा से विश्व को स्पष्ट हो गया है कि इजरायल, अमेरिका और भारत अब विश्व स्तर पर एक निर्णायक भूमिका निभाने की स्थिति में है। भारत को चीन और पाकिस्तान से मिल रही धमकियों का जवाब भी दोनों देशों को मोदी की पहले अमेरिका और अब इजरायल की यात्रा द्वारा मिल गया होगा। चीन जिस तरह की धमकियां भारत को दे रहा है उसके पीछे उसका स्वयं का भय भी है। चीन आर्थिक रूप से भारत पर निर्भर है और सैन्य दृष्टि से सैनिकों की संख्या व सैन्य शस्त्रों की दृष्टि से भारत से लाभ वाली  स्थिति में है। लेकिन इच्छाशक्ति और तकनीकी दृष्टि से भारत उससे कहीं भी कमजोर नहीं है। चीन डोका ला को लेकर जो कुछ कर व कह रहा है वह भारत के अमेरिका और इजरायल तथा रूस सहित अन्य देशों के रिश्तों की गहराई को भी नापने की कोशिश कर रहा है।
चीन की धमकियों के बीच भारत के प्रधानमंत्री का अपना धैर्य न छोडऩा और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी योजनाओं व नीतियों पर कार्य करते चले जाना दर्शाता है कि भारत किसी भी दबाव के नीचे आने वाला नहीं है। इजरायल से जितने रिश्ते मजबूत होंगे उतना ही भारत को रक्षा, खुफिया तंत्र और तकनीकी क्षेत्र में लाभ मिलने वाला है। कृषि प्रबंधन और जल बचाव के मामले में भी दोनों देशों को लाभ मिलेगा।
जिस तरह इजरायल अपने पड़ोसी देशों की चुनौतियों का सामना अपनी स्पष्ट नीति और दृढ़ संकल्प के साथ कर रहा है, भारत और इजरायल मिलकर आतंकवाद और चुनौतियों का सामना मिलकर कर सकेंगे। भारत और इजरायल आज के हालात में एक-दूसरे के पूरक ही हैं, यह बात मोदी की इजरायल यात्रा से स्पष्ट हो गया है।


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, उत्तम हिन्दू

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