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गौ रक्षक और गौशाला

Publish Date: July 07 2017 01:32:12pm

गऊ सेवा कमीशन पंजाब के अध्यक्ष कीमती लाल भगत ने पत्रकार वार्ता में कहा है कि पंजाब के 22 जिलों में सरकारी गौशालाओं का निर्माण हो चुका है और आने वाले पांच महीनों में पंजाब की सड़कों पर लावारिस घूमती गायों को गौशालाओं में पहुंचाने का लक्ष्य है। इस लक्ष्य की पूर्ति के साथ लावारिस गाय के कारण होने वाले सड़क हादसों में कमी आएगी। साथ ही किसानों की फसलें भी बर्बादी से बचेंगी।

गौरतलब है कि पिछली अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार ने प्रत्येक जिले में गौशाला निर्माण हेतु एक-एक करोड़ रुपए की पहली किश्त भी जारी कर दी थी और प्रदेश भर में स्थापित गौशालाओं को बिजली भी मुफ्त कर दी थी। कैप्टन सरकार ने आते ही गौशालाओं की मुफ्त बिजली को बंद कर दिया है, इस कारण हिन्दू समाज में काफी रोष है। मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने गौशालाओं को मुफ्त बिजली दोबारा चालू करने का आश्वासन अवश्य दिया था लेकिन अभी तक उस पर कोई अमल नहीं हुआ।

गऊ सेवा कमीशन ने अपनी उपरोक्त मांग को पुन: दोहराया है। गौ की रक्षा के नाम पर आज देश भर में विवाद सा खड़ा हो गया है। आए दिन पता चलता है कि देश में गौ रक्षा के नाम पर हिंसा हो रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्ट शब्दों में गौ रक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा की निंदा की है और प्रदेश सरकारों को भी कहा है कि गौ रक्षा के नाम पर जो कानून को अपने हाथ में ले रहे हैं या नफरत फैला रहे हैं उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

गौ का भारत की संस्कृति में एक विशेष स्थान है और हिन्दू धर्म को मानने वालों के लिए तो गौ का दर्जा मां बराबर है लेकिन त्रासदी यह है कि गौ आज सड़कों पर लावारिस घूम रही है और प्लास्टिक की थैलियां और गंदबला खाने को मजबूर है, उचित आहार न मिलने के कारण उसकी मौत जल्द हो रही है। गऊ सेवा कमीशन के अध्यक्ष कीमती भगत का यह दावा है कि अगले पांच महीनों में लावारिस गायों को सरकारी गौशाला में भेज दिया जाएगा। स्वागत योग्य है गौशाला पहुंचने के बाद वहां गायों की उचित संभाल हो पाएगी। इस बात को कौन सुनिश्चित करेगा? पिछले दिनों एक सरकारी गौशाला में ही चारा न मिलने के कारण कई गायों की मौत होने का समाचार आया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने गौशाला जाकर वहां की व्यवस्था को देखा और चारे का इंतजाम भी किया। सरकारी अस्पताल चाहे वह इंसानों के हैं या जानवरों के वहां ठीक से इलाज न होने या लापरवाही के समाचार प्रतिदिन समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहते हैं। ऐसे में सरकारी गौशाला में गाय की स्थिति क्या होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

सरकारी गौशालाओं में गाय की देखरेख ठीक हो इसके लिए प्रशासन के साथ समाज का जुडऩा भी आवश्यक है। अगर सरकार गौशालाओं की देखरेख के लिए एक स्थानीय समिति बना दें तो बेहतर रहेगा। इसके साथ सामाजिक स्तर पर हिन्दू मन्दिर कमेटियों को भी गौशालाओं की प्रबंधक कमेटी के साथ सम्पर्क में रहना चाहिए तथा गौशालाओं को जिस प्रकार की सहायता चाहिए वह उन्हें करनी चाहिए।

गौ की रक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों को भी गौशालाएं बनाकर गौ सेवा करनी चाहिए। गौ के लिए इंसान की हत्या या इंसान की पिटाई करने वालों को गौ के लिए कुछ ठोस करने की आवश्यकता है। गौ के स्वास्थ्य के लिए तथा चारे के लिए स्थायी कदम उठाने होंगे। इससे समाज में एक सकारात्मक संदेश जाएगा तथा गौ की सुरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा के कारण जो नफरत फैल रही है वह भी कम होगी। गौ रक्षकों को और गौ भक्तों को मिलकर गौ की सेवा में आगे आना चाहिए तथा सरकारी व गैर सरकारी स्तर पर चल रही गौशालाओं के साथ जुड़कर गौ के लिए कार्य करना चाहिए तथा गौ के नाम पर हिंसा नहीं की जानी चाहिए।


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, उत्तम हिन्दू

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