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जुनैद हत्याकांड

Publish Date: July 13 2017 06:49:38pm

देश के सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसके तहत वध के लिए मवेशियों की खरीद फरोख्त पर पाबंदी लगा दी गई थी। केंद्र सरकार ने जब उपरोक्त आदेश जारी किया था तब एक वर्ग ने यह आरोप लगाया था कि देश के बहुमत हिन्दू समाज को खुश करने के लिए मोदी सरकार ऐसा कर रही है। अब न्यायालय द्वारा आदेश पर रोक लग गई है तो हिन्दू समाज के कान पर शायद जूं तक नहीं रेंगेगी। हां जिन का कारोबार प्रभावित हुआ होगा उन्हें अवश्य राहत मिल गई है।
देश में जब से नरेन्द्र मोदी की सरकार सत्ता में आई है तभी से मोदी सरकार के विरुद्ध एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है और उस अभियान में यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि मोदी सरकार तो केवल देश के बहुमत हिन्दू समाज को खुश करने व उसे अपने वोट बैंक के तौर पर तैयार करने के लिए ही कार्य कर रही है। उपरोक्त धारणा को उस समय और बल मिल जाता है जब मीडिया और बुद्धिजीवियों का एक वर्ग सरकार के प्रत्येक निर्णय को बहुमत व अल्पमत के तराजू पर तोलने लगता है।
पिछले दिनों बल्लभगढ़ और पलवल के बीच रेल में एक झगड़े के दौरान जुनैद नाम के एक लड़के का कत्ल हुआ था। जुनैद अभी केवल 17 वर्ष का ही था और अपने भाई व मित्रों संग घर वापस जा रहा था कि गाड़ी में झगड़ा हो गया और चाकू मार उसकी हत्या कर दी गई। जवानी की दहलीज पर कदम रख रहे एक बेटे की हत्या का उसके मां-बाप व परिवार पर क्या गुजरी होगी इसका शब्दों में ब्यां करना भी मुश्किल है। बाप के कंधे पर बेटे का जनाजा इस दुनिया का सबसे बड़ा दु:ख है और जुनैद के मां-बाप को वह झेलना पड़ रहा है। पीडि़त व दु:खी परिवार से हमें पूरी हमदर्दी है।
प्रश्न यहां यह उठता है कि जुनैद की हत्या को 'बीफ' के साथ जोड़कर एक अपराध को जाति आधारित अपराध और नफरत का रंग देकर अपनी राजनीति चमकाने वालों और दुकानदारी चलाने वाले तब बेनकाब हो गए, जब पुलिस ने जुनैद के कातिल को महाराष्ट्र से पकड़ लिया।
आरोपी का नाम नरेश बताया जा रहा है, जो हथीन थाना एरिया के गांव भमरौला का निवासी है।  पुलिस आरोपी से चाकू बरामद करने का प्रयास कर रही है। जांच के दौरान 'बीफ' को लेकर झगड़ा होने की कोई बात सामने नहीं आई है। जीआरपी के एसपी की ओर से कहा गया है कि झगड़ा सिर्फ ट्रेन में सीट को लेकर हुआ था।
बताया गया है कि ट्रेन में वारदात के बाद नरेश घबरा गया था और पलवल उतरने के बजाय वह असावटी में ही ट्रेन से उतर गया था। यहां उसने दुकान के सामने बाइक सवार दो युवकों से लिफ्ट लेकर कुछ दूर छोडऩे को कहा। दोनों युवकों ने आरोपी को पीछे बैठाया और जटौला गांव ले जाकर छोड़ दिया था। बताया गया कि नरेश जटौला गांव में अपने मामा के घर पर रुका और उसके बाद वह अपने गांव चला गया। इसके बाद से वह मथुरा, वृंदावन में रुकते हुए कुछ दिन पहले ही महाराष्ट्र पहुंचा था। मोबाइल फोन के सहारे व लोगों से हुई पूछताछ के आधार पर क्राइम ब्रांच ऊंचा गांव व जीआरपी की टीम महाराष्ट्र पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया।
एसपी जीआरपी कमल दीप गोयल अनुसार आरोपी महाराष्ट्र में अपने रिश्तेदार से संपर्क कर तीन-चार दिन से कोई नौकरी कर रहा था। पूर्व में पकड़े गए आरोपियों से मुख्य आरोपी की जान-पहचान होने की बात सामने नहीं आई है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि रामेश्वर से सीट को लेकर जुनैद पक्ष का झगड़ा हुआ था। इस झगड़े को लेकर ही आरोपी ने जुनैद की हत्या करना स्वीकार किया है। चाकू पहले से ही मुख्य आरोपी के पास था। ट्रेन में मारपीट के दौरान मुख्य आरोपी के साथ भी मारपीट किए जाने की बात सामने आई है और उसको चोट लगना बताया जा रहा है।
सूत्रों की माने तो ओखला स्टेशन पर आरोपी रामेश्वर से जुनैद पक्ष के साथ झगड़ा हुआ था। कोच मेें मौजूद लोगों ने जुनैद व उसके साथ सफर कर रहे लोगों की पिटाई कर दी थी। आरोप है कि जुनैद पक्ष के लोग तुगलकाबाद रेलवे स्टेशन पर उतरकर दूसरे कोच में चढ़ गए थे। बल्लभगढ़ स्टेशन पर जुनैद अपने कई साथियों के साथ फिर उसी कोच में आ गया, जिसमें रामेश्वर भी था। रामेश्वर के साथ मारपीट होते देख मुख्य आरोपी उसे बचाने आगे आया और उसके बाद चाकू से जुनैद पर वार कर दिए।
मुख्य आरोपी नरेश के भाई सुरेश ने बताया कि हम दोनों दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान केन्द्र में एक निजी सिक्योरिटी एजेंसी के माध्यम से सुरक्षा गार्ड की नौकरी करते थे। 22 जून को जिस दिन यह घटना हुई थी, उस दिन हम दोनों भाई दिल्ली के शिवाजी ब्रिज स्टेशन से गाजियाबाद से मथुरा जाने वाली ईएमयू ट्रेन में चढ़े थे, अधिक भीड़ व जल्दबाजी के कारण हम दोनों भाई अलग-अलग डिब्बों में चढ़ गए थे। इसके बाद वहां सीट को लेकर झगड़ा हुआ।
बकौल सुरेश, नरेश ने मुझे बताया कि एक युवक ने उसे मारने की मंशा से जब चाकू से वार किया, तो अपने बचाव में मैंने उससे चाकू छीनकर उस पर वार कर दिए। वहीं गांव के पूर्व सरपंच सहजराम ने पुलिस और नेताओं की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए कहा कि पुलिस इस मामले में एक तरफा कार्रवाई कर रही है और नेता भी वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं। आने वाले समय में नेताओं का बहिष्कार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस ने एकतरफा मुकदमा क्यों दर्ज किया? हमारे बच्चे को भी चोटें आई हैं, उसकी तरफ से भी मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि दोनों धड़ों में झगड़ा सीट के लिए हुआ था लेकिन देश के माहौल को खराब करने व राजनीतिक लाभ लेने हेतु मीडिया तथा राजनीतिज्ञों के एक वर्ग ने इसे दो समुदायों के बीच के झगड़े के रूप में पेश किया। यह देश का दुर्भाग्य है कि आजादी के 70 वर्ष बाद भी जाति धर्म तथा क्षेत्र के आधार पर लोगों की भावनाओं को भड़काकर अपनी स्वार्थसिद्धि का खेल जारी है। क्षणिक सफलता के लिए देशहित को दांव पर लगाना अनुचित है, इस बात को समझने और गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। उपरोक्त मुद्दा कानून व्यवस्था से जुड़ा और प्रदेश सरकार से संबंधित है। लेकिन मुद्दे को इस तरह जनता के सम्मुख रखने का प्रयास किया गया, जैसे सब कुछ मोदी सरकार के इशारे पर हो रहा है। नरेन्द्र मोदी सत्ता में रहकर कोई भी अंसवैधानिक कार्य नहीं कर सकते क्योंकि देश संविधान अनुसार चलता है। संविधान ही सर्वोच्च है, कृप्या संविधान में विश्वास रखें और नफरत के बीज न बोयें।


इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू। 

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