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एचआईवी से भी बचाएगी गोमाता, 95 प्रतिशत रोगी भारत समेत एशिया के 10 देशों में 

Publish Date: July 21 2017 08:20:13pm

वाशिंगटन (उत्तम हिन्दू न्यूज) : भारत में हिन्दू गाय को माता के समान मानते है। इस मां का एक और गुण दुनिया के सामने आया है कि एचआईवी से निपटने के लिए वैक्सीन बनाने में गाय काफी मददगार साबित हो सकती है। ऐसा माना जा रहा है कि काप्लेक्स और बैक्टीरिया युक्त पाचन तंत्र की वजह से गायों में प्रतिरक्षा की क्षमता ज्यादा विकसित हो जाती है। अमरीका के नेशनल इंस्टीच्यूट्स ऑफ हैल्थ ने इस नई जानकारी को बेहतरीन बताया है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार भारत, चीन और पाकिस्तान उन 10 देशों में शामिल हैं, जहां 2016 में एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र में नए एचआईवी संक्रमण के 95 प्रतिशत से ज्यादा मामले हुए हैं।  

एचआईवी एक घातक प्रतिद्वंद्वी है और इतनी जल्दी अपनी स्थिति बदलता है कि वायरस को मरीज के प्रतिरक्षा सिस्टम में हमला करने का रास्ता मिल जाता है। एचआईवी अपनी मौजूदगी को बदलता रहता है। एक वैक्सीन मरीज के रोग प्रतिरोधक सिस्टम को विकसित कर सकती है और लोगों को संक्रमण के पहले स्टेज पर बचा सकती है। इंटरनेशनल एड्स वैक्सीन इनिशिएटिव और दि स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीच्यूट ने गउओं की प्रतिरक्षा क्षमता को लेकर टेस्ट शुरू किया। शोधकर्ता डाक्टर डेविन सोक ने कहा इसके परिणाम ने हमें हैरान कर दिया कि जरूरी एंटीबॉडीज गायों के प्रतिरक्षा तंत्र में कई सप्ताह में बनते हैं, जबकि इंसानों में ऐसे एंटीबॉडी विकसित होने में करीब तीन से पांच साल लग जाते है। उन्होंने बताया कि एक वैक्सीन मरीज के रोग प्रतिरोधक सिस्टम को विकसित कर सकती है और लोगों को संक्रमण के पहले स्टेज पर बचा सकती है। 
गाय की एंटीबॉडीज से एचआईवी के असर को 42 दिनों में 20 फीसदी तक खत्म किया जा सकता है। प्रयोगशाला परीक्षण में पता चला कि 381 दिनों में ये एंटीबॉडीज 96 फीसदी तक एचआईवी को बेअसर कर सकते हैं। एक और शोधकर्ता डॉक्टर डेनिस बर्टन ने कहा कि इस अध्ययन में मिली जानकारियां बेहतरीन हैं उन्होंने कहा, इंसानों की तुलना में जानवरों के एंटीबॉडीज ज्यादा यूनीक होते हैं और एचआईवी को खत्म करने की क्षमता रखते हैं।

एचआईवी संक्रमण के 95 प्रतिशत नए रोगियों वाले 10 देशों में भारत, चीन और पाक शामिल
संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस खतरनाक रोग के खिलाफ संघर्ष में पहली बार पलड़ा भारी हुआ है क्योंकि एचआईवी वाइरस से संक्रमित 50 फीसद लोग को अब इलाज उपलब्ध है जबिक 2005 के बाद पहली बार एड्स से संबंधित मौतों की संख्या तकरीबन आधी हो गई है। एशिया प्रशांत क्षेत्र में नए संक्रमण के ज्यादातर मामले भारत, चीन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, वियतनाम, म्यांमा, पापुआ न्यू गिनी, फिलीपीन, थाईलैंड और मलेशिया में हैं। पिछले साल, इन देशों में क्षेत्र के 95 फीसद से ज्यादा एचआईवी के संक्रमण के मामले हुए। रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में एचआईवी की महामारी ज्यादातर यौनकर्मियों, समलैंगिकों, ट्रांसजेंडर और मादक द्रव्य का इंजेक्शन लेने वालों के बीच ही केन्द्रित रही है। 

एशिया प्रशांत क्षेत्र में एचआईवी के नए संक््रमण की वार्षिक संख्या पिछले छह साल के दौरान 13 प्रतिशत गिरी है। 2010 में यह संख्या 3,10,000 थी जबकि 2016 में यह संख्या 2,70,000 थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में 26 शहरों में सर्वेक्षण किया गया और पाया गया कि ऐसे 41 प्रतिशत लोगों को अपने एचआईवी से ग्रस्त होने का पता था जो इंजेक्शन के माध्यम से मादक द्रव्य लेते हैं। अपनी एचआईवी की स्थिति जानने वालों में सिर्फ 52 फीसद को उसके इलाज तक पहुंच थी और इलाज पाने वालों में से 83 प्रतिशत में वायरस काबू में था।

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