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सुषमा स्वराज की दो टूक

Publish Date: July 22 2017 05:01:53pm

पिछले कुछ समय से डोकलाम क्षेत्र को लेकर भारत और चीन के बीच टकराव के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने चीन द्वारा पैदा स्थिति को लेकर राज्यसभा में भारत की रणनीति को स्पष्ट ढंग से रखते हुए कहा कि भारत एवं भूटान के बीच में पडऩे वाले 'ट्राई जंक्शनÓ पर चीन एकपक्षीय ढंग से कब्जा जमाना चाह रहा है, जो भारत की सुरक्षा के लिए खतरा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क और चौकन्ना है। सुषमा ने कहा कि 'ट्राई जंक्शनÓ भारत, भूटान एवं चीन के बीच में पड़ता है। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत का स्पष्ट मानना है कि इस क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाओं को नहीं रहना चाहिए और बातचीत के जरिये ही मुद्दे का हल निकाला जाना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच वर्ष 2012 में एक समझौता हुआ था। इसमें यह तय किया गया था कि इस 'ट्राई जंक्शनÓ के मुद्दे को भारत, चीन तथा तीसरा देश मिल कर तय करेंगे। उन्होंने कहा कि यह तीसरा देश भूटान है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में कोई निर्धारित सीमा नहीं है। चीन चाह रहा ता कि वह बुलडोजर और अन्य उपकरण ले कर बटांगला तक पहुंच जाए, ताकि एकपक्षीय ढंग से वहां की यथास्थिति को खत्म किया जा सके। सुषमा ने कहा कि इस मुद्दे पर सभी देश हमारे साथ हैं। चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के बारे में सुषमा ने कहा कि यह पाकिस्तान के अवैध कब्जे के तहत भारतीय भूक्षेत्र से होकर गुजरता है। सुषमा ने कहा कि सरकार का यह अटल दृष्टिकोण है कि पाकिस्तान ने वर्ष 1947 से भारत के जम्मू कश्मीर राज्य के हिस्से पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। चीन को भारत ने अपनी चिंता से अवगत करा दिया है।

चीन ने भारत द्वारा अपनाई नीति को देखते हुए कहा है कि भारत के साथ राजनीतिक चैनल का रास्ता खुला है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ब्रिक्स सम्मेलन की बैठक में शामिल होने के लिए बीजिंग जाने वाले हैं। उपरोक्त स्थिति को देखते हुए कहा जा सकता है कि मामला बातचीत द्वारा सुलझाने का प्रयास एक सुखद परिवर्तन है लेकिन चीन के पूर्व राजदूत लियू योउफा ने सरकारी मीडिया चाइना सैंट्रल टेलीविजन के अंग्रेजी चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि, बॉर्डर पर वर्दी में खड़े लोग जब दूसरे देश की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं तो स्वाभाविक तौर पर दुश्मन बन जाते हैं और उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने आगे कहा कि चीन इस बात का इंतजार कर रहा है कि भारत समझदारी भरा फैसला ले और यह पहला विकल्प है। लियू ने कहा कि दोनों देशों के लिए युद्ध से बचना ही बेहतर होगा।

चीन के पूर्व राजदूत का उपरोक्त ब्यान दर्शाता है कि चीन की नीयत अभी पूरी तरह साफ नहीं है। वह भारत को बातों में उलझाकर अपना स्वार्थ सिद्ध करने की कोशिश अवश्य करेगा। भारत को बातचीत का रास्ता तो खुला रखना ही चाहिए लेकिन अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर भी सतर्क रहना चाहिए। भारतीय विदेश मंत्री द्वारा स्थिति को स्पष्ट तो कर दिया गया है लेकिन व्यवहारिक स्तर पर अभी भारत को बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। चीन आज भारत के लिए सबसे बढ़ी चुनौती भी है और खतरा भी। चीन भारत के बढ़ते कद और कदमों को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। पाकिस्तान को शह देकर वह जहां घाटी में हिंसा फैला रहा है वहीं भारत के साथ लगती सीमा पर अपनी सेना तैनात कर भारत पर दबाव बनाने का भी प्रयास कर रहा है।

हिन्दुवाद की बात कर चीन भारत में साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने के भी प्रयास में है। चीन भारत विरुद्ध साम, दाम, दंड, भेद सभी प्रकार की नीति अपनाकर चल रहा है, अत: भारत को भी चीन प्रति एक स्पष्ट और ठोस नीति अपनाकर उसको समझ आने वाली भाषा में जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए।    


इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।


 

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