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डेरा सच्चा सौदा विवाद 

Publish Date: August 22 2017 01:16:00pm

संतों के डेरे पर लोग मन की शांति प्राप्त करने हेतु ही जाते हैं, लेकिन डेरों में लोगों की उपस्थिति को देखते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी वहां हाजरी लगानी शुरू कर देते हैं। उनमें से अधिकतर का उद्देश्य मन की शांति नहीं होता, बल्कि अपने क्षेत्र के डेरा भक्तों को अपना चेहरा दिखाना ही होता है। राजनीतिज्ञों की उपरोक्त कमजोरी को डेरे के भक्त से लेकर डेरा प्रमुख तक भली भांति जानते हैं। उत्पन्न हुई स्थिति का लाभ उठाने के लिए दोनों तरफ के बिचौलिये सक्रिय हो जाते हैं और धीरे-धीरे राजनीतिज्ञ और डेरा से संबंधित वह लोग जो डेरे के प्रबंधन में विशेष भूमिका निभाते हैं करीब आते चले जाते हैं। जिसका लाभ दोनों वर्गों को सार्वजनिक जीवन में मिलने लगता है। एक तरफ अगर राजनीतिज्ञ का कद बढ़ जाता है तो दूसरी तरफ राजनीतिक संरक्षण प्राप्त डेरे की स्थिति समाज में मजबूत होती जाती है। समय और परिस्थितियों अनुसार दोनों ही अपने हित को सुरक्षित रखने हेतु एक-दूसरे का साथ देते हैं।


सार्वजनिक जीवन में जब दूसरे के कारण छवि खराब होने का भय जिस किसी को भी लगता है तो वह दूसरे से दूरियां बनानी शुरू कर देता है। जिस कारण तनाव व टकराव की स्थिति बन जाती है।

डेरा सच्चा सौदा सिरसा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर 25 अगस्त को साध्वी यौन मामले में फैसला सुनाया जाना है। फैसला डेरा प्रमुख के हक में जाना है या विरुद्ध इसके बारे तो अभी किसी को कुछ पता नहीं, लेकिन फैसले को लेकर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान व दिल्ली तक प्रशासन सावधान हो चुका है। डेरा भक्तों की गिनती तथा उनकी डेरा प्रमुख के प्रति आस्था को देखते हुए हरियाणा सरकार ने अति संवेदनशील समझे जाने वाले 9 जिलों के  सभी थाना प्रभारियों, पीसीआर व राइडरों को निर्देश दिए हैं कि वे दिन-रात अपने-अपने क्षेत्रों में गश्त करें। हरियाणा की मांग पर केंद्र ने पैरा-मिलिटरी की 35 कंपनियां भेज दी हैं। हरियाणा ने 150 कंपनियां मांगी थीं। सूत्रों के अनुसार 24 अगस्त तक 48 कंपनियां और पहुंच सकती हैं। अभी जवानों को सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, पंचकूला व जींद जिलों में तैनात किया गया है। पंचकूला, सिरसा व फतेहाबाद में सबसे कड़ी सुरक्षा है। यहां पैर-मिलिटरी की तैनाती सबसे ज्यादा है। कश्मीर से भी सीआरपीएफ और बीएसएफ की टुकडिय़ां बुलाई गयी हैं। डीजीपी बीएस संधू अनुसार सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है। सेटेलाइट के माध्यम से डायल 100 को केंद्रीकृत किया जा रहा है। सिरसा, हिसार और फतेहाबाद में रविवार से धारा 144 लागू कर दी गयी है।  पंजाब सरकार के सूत्रों का कहना है कि राज्य के 25 पुलिस जिलों में से 17 पुलिस जिलों में डेरा सिरसा के कार्यकत्र्ताओं की भारी संख्या व प्रभाव है, जिस कारण इन सभी जिलों को संवेदनशील समझा जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा केन्द्र से केन्द्रीय सुरक्षा बलों की बड़ी संख्या में मांग रखी गई, मांग के मुकाबले केन्द्र द्वारा पंजाब को केन्द्रीय सुरक्षा बलों की जो 75 कम्पनियां अलाट की गई हैं उनमें से अधिकतर फोर्स राज्य में पहुंच गई है। राज्य सरकार के सूत्रों का कहना है कि सभी जिला पुलिस प्रमुखों को एहतियाती कदम उठाने के आदेशों में शरारती तत्वों पर कड़ी नजर रखने के आदेश दिए गए हैं। क्योंकि पुलिस प्रशासन का मानना है कि ऐसे मौके किसी छोटी घटना के कारण भी समूचे प्रदेश में अशांति फैल सकती है। राज्य सरकार द्वारा पंजाब आम्र्ड पुलिस जालन्धर व कमांडो ट्रेनिंग सैंटर बहादरगढ़ में ट्रेनिंग प्राप्त कर रहे लगभग 5000 जवानों को भी मालवा के जिलों में तैनात करने के लिए भेज दिया है। अधिकारियों को सभी संवेदनशील स्थानों की पहचान करने व उनके लिए सुरक्षा के विशेष प्रबंध करने के लिए भी कहा गया है। पता चला है कि डेरा प्रेमियों द्वारा अपने आपको बड़ी संख्या में गिरफ्तारियों के लिए पेश किए जाने की सूरत में राज्य सरकार जेलों में पर्याप्त जगह न होने के कारण निजी मैरिज पैलेसों को भी जेलें अधिसूचित करने के मामले पर विचार कर रही है। पंजाब पुलिस की सूचना के अनुसार डेरा सिरसा में इस समय लगभग 2 से अढ़ाई लाख श्रद्धालु मौजूद हैं और उनके द्वारा कहा जा रहा है कि 25 अगस्त को डेरा प्रमुख की अदालत में पेशी संबंधी फैसला वह करेंगे, जिस कारण यह स्पष्ट नहीं कि डेरा प्रमुख 25 अगस्त को पंचकूला अदालत में पेश होंगे या नहीं। अदालत द्वारा सभी कथित दोषियों व शिकायकर्ताओं के हाजिर होने के बिना फैसला नहीं सुनाया जा सकता, लेकिन राज्य सरकार को आशंका है कि डेरा प्रमुख के समर्थक उनके विरुद्ध किसी कार्रवाई की सूरत में अपने आपको गिरफ्तारियों के लिए पेश कर सकते हैं या रेलवे मार्ग व सड़कें आदि भी जाम कर सकते हैं और अमन-कानून की स्थिति के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है। 
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि डेरा प्रमुख के विरुद्ध अगर फैसला आता है तो डेरे के प्रभाव में आने वाले शहरों चाहे वह हरियाणा, पंजाब, राजस्थान या उत्तर प्रदेश में है, वहां गड़बड़ी होने की पूरी आशंका है, इसीलिए सभी प्रदेशों की सरकारें स्थिति को संभालने हेतु सतर्क हो चुकी है।

तनाव व टकराव वाली स्थिति तो तभी पैदा होगी अगर डेरे के भक्त सड़कों पर उतरेंगे और फैसले का विरोध करते हुए अपनी गिरफ्तारियां देंगे या हिंसा पर उतारू हो जाएंगे। फैसला डेरा प्रमुख के हक में आ जाता है तो सारी स्थिति ही बदल जाएगी और विरोध में जाता है उसी को देख सभी सरकारें सक्रिय हुई हैं। 

स्थिति को संभालने के लिए डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को स्वयं अपने भक्तों से अपील कर शांत रहने को कहना चाहिए। क्योंकि संत तो स्वयं शांति पसंद होते हैं और भक्तों को भी शांति व प्रेम से रहने को कहते हैं। कानून की दृष्टि से भी देखें तो कह सकते हैं कि देश के कानून से ऊपर कोई नहीं चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो।

डेरा प्रेमियों को भी कानून का सम्मान करते हुए अपना संघर्ष कानून के तहत ही करना चाहिए। कानून को हाथ में लेने से स्थिति बिगड़ेगी और तब इसकी जिम्मेवारी डेरा व डेरा भक्तों पर ही जाएगी। इस स्थिति से बचने के लिए डेरा प्रेमियों को कानून का सम्मान और कानून का सहारा ही लेना चाहिए।

    -इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू। 

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