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अभी तक नहीं धोई शहीद पति की वर्दी, ये दर्द आपको भी कर देगा भावुक 

Publish Date: September 12 2017 07:11:30pm

श्रीनगर (उत्तम हिन्दू न्यूज) : जो परिवार अपने बेटों को देश की रक्षा के लिए सेना में भेजते हैं, उनके लिए हर लम्हा किसी जंग से कम नहीं होता। देश के रक्षा कर रहे बेटे  पर गर्व होने के साथ-साथ उसके खोने का डर भी उनके दिल में रहता है। अभी तक देश के कई परिवारों ने देश के नाम अपने बेटों को गर्व के साथ कुर्बान किया है। ऐसे में कह सकते हैं कि इन परिवारों का कलेजा अलग ही मिट्टी का होता है। ऐसे ही कहनी है जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में शहीद हुए मेजर अक्षय की पत्नी की। देश के नाम पति को न्यौछावर कर चुकीं संगीता ने हाल ही में फेसबुक पर भावुक पोस्ट लिखा है। पोस्ट में उन्होंने अपनी मेजर अक्षय के साथ बिताए अपने खास लम्हों को शेयर किया है। 

पोस्ट में संगीता ने लिखा है कि साल 2009 में अक्षय और मैं चंडीगढ़ आए थे और वहां से हम शिमला गए, लेकिन कुछ कारणों के चलते वहां कर्फ्यू लगा था। इसी वजह से होटल जल्दी बंद हो गया था और अक्षय ने मुझे घुटनों पर बैठकर लाल रंग की पेन ड्राइव देकर प्रपोज किया। संगीता ने आगे लिखा, ''साल 2011 में हमारी शादी हो गई और हम दोनों पुणे में रहने लगे। शादी के दो साल बाद उनकी बेटी नैना ने जन्म लिया। संगीता के लिखा, साल 2016 में अक्षय की जम्मू कश्मीर के नगरोटा में पोस्टिंग हो गई और मैं और मेरी बेटी वहां रहने चले गए। हमें घर अलॉट नहीं हुआ था इसलिए ऑफिसर्स मेस में ही ठहरे। संगीता के मुताबिक, ''29 नवंबर की सुबह 5.30 बजे उन्हें गोलीबारी की आवाज सुनाई दी और उनकी आंख खुली। शुरुआत में हमने अंदाजा लगाया कि ये ट्रेनिंग का हिस्सा होगा, लेकिन बाद में पता चला कि ये ट्रेनिंग नहीं है। इतने में कुछ जूनियर हमारे पास आए अक्षय को बोला कि आतंकियों ने तोपखाने की रेजिमेंट को बंधक बना लिया है। हमे जल्दी जाना होगा। इसके बाद तुरंत सभी बच्चों और महिलाओं को एक कमरे में रखा गया था। इसके बाद हम लगातार फायरिंग सुन रहे थे। मैंने इस बारे में मेरी सास को मैसेज किया और मेरी ननद और मेरी सास से इस बारे में बातचीत होती रही।'' 

उन्होंने आगे लिखा कि दोपहर होने को थी, लेकिन अक्षय की कोई खबर नहीं थी, इसके बाद मैं अपने आपको रोक नहीं पाई और सुबह 11:30 बजे एक कॉल कराई। फोन किसी ओर ने उठाया और मुझसे कहा कि मेजर अक्षय को दूसरी जगह पर ले जाया गया है। करीब शाम 6:15 बजे, उसके कमांडिंग और कुछ अन्य ऑफिसर्स मुझसे मिलने आए। उन्होंने मुझसे कहा, 'मैम हमने मेजर अक्षय को खो दिया है। वो करीब सुबह 8:30 बजे शहीद हुए थे।' ये शब्द मेरी दुनिया तबाह करने वाले थे। इसके बाद मैं सोचती रही कि काश! मैंने उन्हें अलविदा कहकर गले लगाया होता। काश! मैंने उनसे आखिरी बार कहा होता कि मैं तुमसे प्यार करती हूं, लेकिन हम कभी भी चीजों को गलत नहीं होने की उम्मीद करते हैं। संगीता कहती हैं, उन्हें मेजर अक्षय की वर्दी, कपड़े और सारी चीजे मिल गईं, इन सारी चीजों को उन्होंने कई वर्षों से सहेज कर रखी थीं। संगीत लिखती हैं उनका रेजिमेंट जैकेट आज तक धोया नहीं है और जब मुझे बहुत याद आती है, तो मैं इसे पहन लेती हूं। इसमें से आज भी अक्षय की खुशबू आती है। 

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