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देश में घट सकती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें, GST के दायरे में लाने की तैयारी 

Publish Date: September 13 2017 05:08:57pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : पेट्रोल तथा डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से निशाने पर आई सरकार ने आज कहा कि वह उपभोक्ताओं के हितों का पूरा ख्याल रखेगी। दोनों ईंधनों की कीमत तीन वर्ष के उच्च स्तर पर पहुंच जाने के बाद पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस पर मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया और कहा कि यह अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमतों में हुई वृद्धि का असर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम जल्द कम होंगे। फिलहाल अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा की कीमत लगभग 55 डॉलर प्रति बैरल है।

प्रधान ने यह भी कहा कि सरकार पेट्रोल और डीजल को भी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने पर विचार करेगी जिससे इनके दाम में बहुत ज्यादा अंतर नहीं रह जाएगा। अभी इन्हें जीएसटी से बाहर रखा गया है और पहले की तरह राज्य सरकारें इस पर वैट लगाती हैं जिससे राज्य दर राज्य इनकी कीमतों में भारी अंतर देखने को मिलता है। 

इस साल 16 जून से देश भर में पेट्रोल-डीजल के दाम रोजाना तय किये जाते हैं। देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी ऑयल इंडिया की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार इस साल 13 जुलाई के बाद से 61 दिन में पेट्रोल की कीमत एक बार भी कम नहीं की गई। पेट्रोल की कीमत दिल्ली में 13 जुलाई को 63.91 रुपये थी जो बढ़कर 13 सितंबर को 70.38 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है। 


राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल की यह कीमत 15 अगस्त 2014 (72.51 रुपये प्रति लीटर) के बाद का उच्चतम स्तर है। हालाँकि, उस समय अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा की कीमत 100 डॉलर प्रति लीटर से ऊपर थी जो इस समय 55 डॉलर के आसपास है। डीजल की कीमत 29 अगस्त के बाद से कम नहीं की गयी है। राष्ट्रीय राजधानी में इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंपों पर इसकी कीमत 13 सितंबर को 58.72 रुपये प्रति लीटर है जो 31 अगस्त 2014 (58.97 रुपये प्रति लीटर) के बाद का उच्चतम स्तर है। 


उधर, जानकारों का कहना है कि इससे डीजल और पेट्रोल के दामों में वृद्धि होगी। दरअसल पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की खबरों के बीच ये तथ्य भी सामने आया था कि पेट्रोलियम कंपनियों पर 15 हजार से 25 हज़ार करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ेगा जिसे वो ग्राहकों से वसूलना चाहेंगी। दरअसल पेट्रोल-डीजल की कीमतें दो प्रकार के टैक्स से तय होती हैं। इनमें एक है केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और दूसरे राज्य सरकार की ओर से लगाया जाने वाला सेल्स टैक्स या वैट। ये दोनों ऐसे टैक्स हैं जोकि सरकारी राजस्व खजाने के लिए बहुत बड़ा स्रोत हैं। आप जानकर हैरान होंगे कि पेट्रोलियम कीमतों में 45 से लेकर 48 प्रतिशत तक टैक्स का हिस्सा होता है। कहीं-कहीं तो राज्य सरकारें  28 से 30 प्रतिशत तक वैट वसूलती हैं। उधर, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत पर निरंतर बढ़ती जा रही है। गत दिवस भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमत 53.06 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई जोकि 11 सितंबर को दर्ज कीमत 52.73 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से अधिक रही।


 

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