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कैप्टन अमरिंदर सिंह ने लंदन में अपनी किताब रिलीज करके सारागढ़ी जंग के शहीदों को श्रद्धांजलि भेंट की

Publish Date: September 13 2017 05:11:45pm

लंदन (उत्तम हिन्दू न्यूज): सारागढ़ी जंग के महान शहीदों को श्रद्धांजलि भेंट करने के लिए जब लंदन के नेशनल रॉयल म्युजिय़म में बिगुल बजा तो वहाँ मौजूद प्रमुख व्यक्तियों में चुप पसर गई। सारागढ़ी जंग की 120 वीं वर्षगांठ के अवसर इस ऐतिहासिक समागम दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की किताब रिलीज करने के अवसर पर उन 22 योद्धाओं की बहादुरी और जज़बे का हिस्सा बनी गई जिन्होंनेे आत्मसम्पर्ण की बजाये शहादत को प्राथमिकता दी थी। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इसको न केवल 36वीं सिखज़ जिस के साथ इन महान योद्धाओं का नाता था, के लिए बल्कि सिख भाईचारो के लिए गौरव वाले पल बताया। मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों से  सारागढ़ी की जंग के अंतिम कुछ घंटों के उन कष्टदायक पलों का जि़क्र किया जिनमेंं की इन 22 सैनिकों को गुजऱना पड़ा और साथ ही उम्मीद ज़ाहिर की कि इन शूरवीरों की याद हमेशा यादों में बसी रहेगी।  कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि यह वह जंग है जो सदा सिख रेजीमेंट के प्रत्येक जवान के मन में रहती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं और प्रत्येक सैनिक यही सोचता है कि ऐसीं हालत में वह क्या करते।

मुख्यमंत्री ने हवालदार ईशर सिंह के अनूठे नेतृत्व की प्रंशसा की जिन्होंने इस जंग के नतीजे से अवगत होते हुए एक बार भी पीछे न हटने की बजाय अपने सैनिकों की शहादत तक संयम से इस जंग का नेतृत्व किया। दा सारागढ़ी फाउंडेशन के नेतृत्व में हुए समागम में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विस्तार में प्रस्तुति दी और बहादुरी की मूर्तियाां शीर्षक अधीन दिए सारागढ़ी यादगारी भाषण दौरान भारतीय सेना में सिखों की प्रतिनिधतता कम होने के सुझाव को रद्द कर दिया। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि यह केवल धारणा का मामला है जिस को वह श्रेणी प्रतिनिधिता स्वीकारते हैं। इस अवसर पर  मुख्यमंत्री, जिनकी  किताब 'दा 36वीं सिखज़ इन दा तिराह कम्पेन 1897 -98 सारागढ़ी एंड का डिफेंस आफ का समाना फोर्ट 'लांच की गई, ने कहा कि ब्रिटिश और कैनेडा की सेना में सिखों की शमुलियत सिख भाईचारो के लिए बड़े गौरव वाली बात है। उन्होनें कहा कि सिखों को उनकी बहादुरी करके पूरी दुनिया में जाना जाता है और सिख सैनिकों ने हमेशा ही भाईचारे की शान में विस्तार किया है।

मुख्यमंत्री ने सारागढ़ी दिवस पर अपनी किताब रिलीज होने को इस जंग के शहीदों को नम्र श्रद्धांजलि बताया जो सेना के इतिहास में जीवित मिसाल रहेगी जिस को विश्व की लास्ट पोस्ट करके जाना जाता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 1988 से 1992 तक ब्रिटिश सेना के चीफ़ आफ की जनरल स्टाफ के तौर पर सेवाएं निभा चुके फील्ड मार्शल सर जोैहन लियोन चैपल को अपनी किताब की कापी भेंट की। इस अवसर पर  36वीं सिखज़ के कमाडैंट लैफ्टिनैंट कर्नल जोैहन हौगटन के पोैत्र सहित विभिंन हस्तियांं उपस्थित थी। कर्नल हौगटन को सारागढ़ी की जंग के बाद तिराह अभियान में अपने योगदान के लिए कोई बहादुरी पुरुस्कार हासिल नहीं हुआ था क्योंकि उस समय ऐसे अवार्ड मरणोपरंत  देने की आज्ञा नहीं थी। यह पुरुस्कार काफ़ी देर बाद शुरू हुए। 
 

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