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येचुरी-करात गुट में बढ़ी तकरार, CPM से सांसद निष्कासित 

Publish Date: September 14 2017 11:19:17am

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को अनुशासित पार्टी माना जाता है, लेकिन आजकल पार्टी में अनुशासन को ताक पर रखकर गुटबाजी हावी हो गई है। सीताराम येचुरी और प्रकाश करात के गुटों के बीच विवाद खुलकर सामने आ गया है। इसी गुटबाजी में सीपीएम ने बुधवार को राज्यसभा सांसद और एसएफआई के पूर्व अखिल भारतीय महासचिव को रितब्रता बनर्जी पार्टी से निष्कासित कर दिया।

पिछले दिनों जून में माकपा ने अपने युवा राज्यसभा सांसद रितब्रता बनर्जी के निष्कासन की सिफारिश की थी, जिस पर पार्टी की केंद्रीय समिति बनर्जी के निष्कासन पर अंतिम फैसला लेना था। बनर्जी को येचुरी के करीब माना जाता है। ऐसे में बनर्जी का पार्टी से निष्कासित होना येचुरी के शिकस्त के तौर पर भी देखा जा रहा है।

रितब्रता बनर्जी ने एक टीवी साक्षात्कार में प्रकाश करात के करीबी माने जाने वाले मोहम्मद सलीम पर जमकर भड़ास निकाली। मो. सलीम पार्टी द्वारा बनर्जी खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए स्थापित तीन सदस्यीय जांच समिति का नेतृत्व कर रहे थे। रितब्रता बनर्जी ने सलीम पैनल को कंगारू आयोग कहा था। रितब्रता बनर्जी ने एक अंग्रेजी अखबार के साक्षात्कार में कहा था कि उनकी लड़ाई प्रकाश और वृंदा करात के खिलाफ है। ऐसे में रितब्रता बनर्जी के बयान से साफ है कि सीपीएम में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

रितब्रता बनर्जी ने पार्टी की चिंताओं को उठाया है। उन्होंने कहा कि निलंबन के कारण वह परेशान थे। उन्होंने कहा कि पार्टी ने मुझे निलंबित कर दिया और मेरे खिलाफ एक जांच समिति गठित की थी। उन्होंने कहा कि मैं एक लंबे समय से पार्टी के लिए खून बह रहा हूं। मेरी लड़ाई पार्टी के खिलाफ नहीं है, मेरी लड़ाई व्यक्तियों के एक समूह के खिलाफ है। प्रकाश और दिल्ली में बृंदा करात और उनके बंगाल एजेंट मोहम्मद सलीम के खिलाफ हैं।
बनर्जी ने कहा, मैंने सुना है कि मैंने कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो से कुछ नहीं सीखा है। मैंने कुछ भी नहीं सीखा है और वह केवल एक ही है जिसने सब कुछ सीखा है, जो व्यक्ति बोल रहा है वह मेरे खिलाफ कंगारू आयोग के अध्यक्ष हैं। वह मोहम्मद सलीम है।

उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि कम्युनिस्ट पार्टी जिसका उद्देश्य समाज को बदलने का है, उसके पोलित ब्यूरो कोटा कैसे हो सकता है? यदि आप मुस्लिम हैं, तो आप पात्र हैं यदि आप एक महिला हैं, तो आप पात्र हैं. क्या ये स्वीकार्य हैं एक कम्युनिस्ट पार्टी में? वह अपने धर्म के कारण एक पॉलिट ब्यूरो सदस्य बन गए हैं। मेरा मानना है कि अगर उस समय पोलित ब्यूरो के सदस्य होने के हकदार थे, तो गौतम देव थे।

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