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इतिहास की किताबों में कोई बदलाव नहीं होगा : NCERT

Publish Date: September 14 2017 02:13:50pm

नयी दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज़) : राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (एनसीआरटी) इतिहास की किताबों में कोई बदलाव करने नहीं जा रही है और नयी शिक्षा नीति बनने के बाद ही वह पाठ्यचर्या तैयार करेगी जिसके आधार पर ही किताबों में कोई बदलाव किया जायेगा। 


एनसीआरटी के निदेशक ऋषिकेश सेनापति ने यूनीवार्ता के साथ एक विशेष भेंटवार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एन सी आर टी की कुल 182 किताबों की समीक्षा के दौरान मिले सुझावों और आंकड़ों तथा नवीनतम जानकारियों के आधार पर 1334 परिवर्तन किये जाने हैं लेकिन वे सब गलतियाँ नहीं हैं जैसा कि पिछले दिनों अख़बारों में छपा। 


यह कहे जाने पर कि संघ परिवार से जुड़े शिक्षक नेता दीनानाथ बत्रा ने एन सी आर टी की किताबों में पढ़ाये जाने वाले इतिहास पर आपत्ति की थी और उसमे परिवर्तन किये जाने का सुझाव भी दिया था जिसको लेकर काफी विवाद भी हुआ था, क्या उस सम्बन्ध में कोई बदलाव किया जा रहा है, श्री सेनापति ने कहा कि श्री बत्रा का कोई पत्र ही हमें नहीं मिला, इसलिए उनका कोई सुझाव हमें प्राप्त नहीं हुआ। उन्होंने कहा इसलिए इतिहास की किताबों में कोई बदलाव करने का सवाल ही नहीं उठता। 


यह पूछे जाने पर कि क्या एनसीआरटी के कामकाज पर संघ या सरकार की ओर से कोई दवाब काम करता है या किसी तरह का कोई हस्तक्षेप है तो उन्होंने कहा कि इस तरह का कोई दवाब उन पर कभी नहीं आया। हम लोग स्वतंत्र ढंग से काम कर रहे हैं। इसलिए किताबों से कोई सामग्री हटाई नहीं गयी। 


यह पूछे जाने पर कि इन किताबों की समीक्षा होने के बाद नयी किताबें कब तक छप जायेंगी, उन्होंने कहा कि अगले वर्ष नए एकेडमिक सत्र से ये किताबें तैयार हो जायेंगी। उन्होंने बताया कि एनसीआरटी को ऑनलाइन 920 सुझाव मिले थे इनमे वास्तविक सुझाव तो 221 ही थे जबकि 345 तथ्य और आंकड़े अपडेट करने हैं। मसलन अब नए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद हो गए तो अब किताबों में से पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी का नाम हट जायेगा। नयी जनगणना के अनुसार कई आंकड़े भी बदल जायेंगे। उन्होंने कहा कि किताबों में जो गलतिया हैं भी वे बहुत मामूली हैं और उनमें अधिकतर छपाई की भूले हैं। 


एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि नयी शिक्षा नीति बनने के बाद ही नयी पाठ्यचर्या तैयार की जायेगी और उसके आधार पर ही नयी किताबें फिर से तैयार होंगी, इसलिए अभी उनके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता कि किताबों में किस तरह के बदलाव होंगे। 

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