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सैनिकों से बर्बरता

Publish Date: May 04 2017 04:14:29pm

जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के मंढेर क्षेत्र की कृष्णा घाटी में पाकिस्तानी सेना द्वारा सीमा पार कर जिस तरह पिछले दिनों दो भारतीयों सैनिकों-एक सेना तथा दूसरा सुरक्षा बल-के मृत शरीरों के साथ बर्बरता की उससे सारे देश में रोष व क्रोध है। सेना की 22वीं सिख इन्फैंट्री से संबंधित शहीद परमजीत सिंह की पत्नी परमजीत कौर ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर पूछा है कि सरकार ने कहा था कि 'अगर पाकिस्तान हमारे एक सैनिक का सिर काटता है तो उसके दस सैनिकों को बदला चुकाना होगा। लेकिन आज क्या हो रहा है?Ó शहीद प्रेम सागर की बेटी ने प्रधानमंत्री से मांग की कि प्रधानमंत्री मोदी सेना को आदेश दें कि 50 पाकिस्तानियों के सिर काट कर लाएं।

पाकिस्तान की सेना ने जिस तरह घात लगाकर भारतीय सैनिकों की हत्या की और उसके बाद मृतक सैनिकों के सिर काट दिए, इस अमानवीय कृत्य कारण देश का आम से लेकर खास जन अब पाकिस्तान के साथ आर-पार की लड़ाई करने की मांग कर रहा है। पाकिस्तान ने जो बर्बरता दिखाई है वह पहली बार नहीं हुई बल्कि वह अतीत में भी ऐसी बर्बरता करता रहा है। इसी कारण अब भारत का जन चाहता है कि पाकिस्तान को उसी भाषा में जवाब दिया जाए जिसे वह समझता है।

उपरोक्त घटना को लेकर भारत के सैन्य अभियान महानिदेशक (डीजीएमओ) लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष मेजर जनरल साहिर शमशाद मिर्जा से हॉटलाईन पर बात की। भारतीय डीजीएमओ ने कहा कि घटनास्थल के समीप पाकिस्तानी सेना की चौकी ने फायरिंग कर हमले में भरपूर सहयोग दिया। डीजीएमओ ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नियंत्रण रेखा के बेहद करीब बार्डर एक्शन टीम (बैट) के प्रशिक्षण शिविर होने पर भी आपत्ति जताई। सेना ने एक बयान में कहा, डीजीएमओ ने कहा कि इस प्रकार के कायरतापूर्ण और अमानुषिक कृत्य सभ्यता के किसी भी मापदंड से परे हैं। इसका जवाब दिये जाने की आवश्यकता है। वहीं, पाकिस्तानी डीजीएमओ ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारत सबूत दे। पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी ने कहा है कि पाकिस्तान के खिलाफ सेना को खुले हाथ से समुचित कार्रवाई करने की अनुमति दी जानी चाहिए। 

इस घटना ने भारतीय सेना की प्रतिष्ठा को प्रभावित किया है। मैं राजनीति नहीं करना चाहता। हमारे 8 वर्ष के शासन दौरान महज एक घटना हुई किन्तु पिछले 3 साल में ऐसी 3 घटनाएं हुईं। कांग्रेस प्रवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि भाजपा को चूडिय़ां उतार कर कुछ करना चाहिए। पाकिस्तान को दुष्ट राष्ट्र करार देते हुए केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि सरकार उचित कार्रवाई करेगी। शिवसेना के नेता एवं महाराष्ट्र के मंत्री रामदास कदम ने कहा कि हमारी एक सर्जिकल स्ट्राइक के बाद उन्होंने (पाकिस्तान) हमारे दस गुना अधिक सैनिकों को मार दिया। प्रधानमंत्री को बैठना चाहिए और इस बात पर विचार करना चाहिए कि बदला कैसे लिया जाए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री अरूण जेटली ने भारतवासियों को आश्वासन दिया है कि जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार सशस्त्र संघर्ष के दौरान मारे गए सैनिकों के शवों के साथ बर्बरता करना एक अपराध है। ऐसा करना व्यक्तिगत मर्यादा का भी अपमान है। शवों का अपमान अंतरराष्ट्रीय मानवीयता कानून का भी सरासर उल्लंघन माना गया है। युद्ध अपराधों से निपटने के लिए जेनेवा कनवेंशन (संधि) और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट जैसे वैश्विक मंच बने हैं। जेनेवा संधि 1864 में अमल में आई। उसके बाद 1949 तक युद्ध अपराधों की कुछ और श्रेणियां इस संधि में शामिल की जाती रहीं। जेनेवा कनवेंशन के एडिशनल प्रोटोकाल सिद्धांत में स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय युद्धों के दौरान मारे गए लोगों के शवों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए। भारत ने जेनेवा संधि में तो हस्ताक्षर किए हैं परन्तु एडिशनल प्रोटोकाल (अतिरिक्त शिष्टाचार) सिद्धांत की पुष्टि उसने नहीं की है। तथापि, समग्र तौर पर, शवों के साथ शिष्टाचार का कानून भारत, पाकिस्तान समेच सभी देशों पर लागू होता है।

भारतीय जवानों के सिर बेशक पाकिस्तान ने काट लिए लेकिन वे भारतीयों के दिलों के सरताज हमेशा बने रहेंगे। भारत को सीमा पार से जिस तरह पाकिस्तान सेना चुनौतियां दे रही हैं और आये दिन सीमा रेखा का उल्लंघन कर भारतीय सैनिकों पर निशाना साध रही है, इस सारी स्थिति पर गंभीरतापूर्वक विचार कर पाकिस्तान विरुद्ध ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। भारत अपने आप को विश्व स्तर पर जितना मर्जी बड़ा बनाकर पेश करे लेकिन जिस तरह सीमा पार से हुए हमले में भारत के सैनिक शहीद हुए हैं, उससे भारत की साख और छवि दोनों कम•ाोर हो जाते हैं। भारत के मजबूत होने के दावों की एक तरह से हवा ही निकल जाती है, जब सीमा पार से हुए हमले में हमारे सैनिक शहीद हो जाते हैं।

भारत को पाकिस्तान के प्रति अब एक स्पष्ट व ठोस नीति अपनाने की आवश्यकता है। भारत की प्राथमिकता बातचीत द्वारा तमाम मसलों को हल करने की होनी चाहिए लेकिन इसमें भारत को सफलता तब मिल सकेगी जब भारत राजनीतिक, आर्थिक व सैनिक दृष्टि से मजबूत होगा। भारत अभी तक पाकिस्तान प्रति कोई ठोस व स्पष्ट नीति नहीं बना पाया है, उसी कारण भारत को जान-माल का नुक्सान अधिक हो रहा है।

नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने व मोदी द्वारा लिए राजनीतिक व आर्थिक निर्णयों के परिणामस्वरूप देश व देश के प्रधानमंत्री की छवि मजबूत हुई है, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि पाक गोलाबारी और भारतीय सैनिकों के साथ बर्बरता के मामले जब देश के जन के सम्मुख आते हैं तो देश का जन चिंताग्रस्त हो जाता है और सीधे-सीधे पूछने लगता है कि आखिर कब तक भारतीय जवानों का खून बहता रहेगा?

पाकिस्तान जिस निचले स्तर तक चला गया है उससे तो यही संकेत व संदेश मिल रहा है कि अब मसले बातचीत की जगह शक्ति से ही हल होने की संभावना है। देश का जन भी चाहता है कि शक्ति का इस्तेमाल कर अमानवीय कृत करने वाली पाकिस्तान सेना व सरकार को भारत एक निर्णायक संदेश दे कि अब और बर्दाश्त नहीं होगा। जब तक उपरोक्त संदेश नहीं जाता तब तक पाक की नापाक हरकतें बंद नहीं होंगी।


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, उत्तम हिन्दू।

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