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नवजोत सिद्धू की चुनौती

Publish Date: May 23 2017 04:53:41pm

लुधियाना में पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए पंजाब के स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने सत्ता से बाहर हुई अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि गठबंधन सरकार ने आपदा प्रबंधन को बिल्कुल नजरअंदाज किया। उसका परिणाम यह है कि केंद्रीय सरकार द्वारा मिली आर्थिक राशि का सही प्रयोग न करने के कारण केंद्र की तरफ से पंजाब को 'रेड जोन' में डाल दिया गया है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल को खुली बहस की चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनका सामना नहीं कर सकते तो वह खुद गांव बादल जाकर बहस करने को तैयार है। 

उन्होंने कहा कि पिछली सरकार की तरफ से लिए गए सारे फैसलों को फिर से जांचा जाएगा। प्रेस कांफ्रैंस के दौरान सिद्धू ने कहा कि पिछले दिनों लुधियाना में एक के बाद एक हुए हादसों की समीक्षा की गई तो पता लगा कि इस मद के लिए दिए गए सरकारी पैसे का काफी बड़े स्तर पर दुरुपयोग हुआ है। उन्होंने ब्योरा दिया कि साल 2009 से लेकर 2013 तक केंद्र की तरफ से दी गई ग्रांट और राज्य सरकार की तरफ से डाले जाने वाले हिस्से के साथ कुल 4.60 करोड़ रुपए आग बुझाओ प्रबंधन पर खर्च किए जाने थे, लेकिन सरकार की नदरअंदाजी के कारण राज्य के वित्त विभाग की तरफ से साठ लाख रुपए रिलीज किए गए। इन साठ लाख रुपए का इस्तेमाल किस उद्देश्य के साथ कहां किया गया, इस बारे में इस्तेमाल सर्टीफिकेट केंद्र सरकार को भेजा जाना था, जो भेजा नहीं गया। 

इसका नतीजा यह हुआ कि बाकी रहती चार करोड़ की राशि व्यर्थ हो गई। पिछले समय के दौरान राज्य के शहरी क्षेत्रों को आपदा प्रबंधन के लिए कुल 629 करोड़ रुपए की ग्रांट अलॉट की गई थी। इसमें 217 करोड़ रुपए कारगुजारी ग्रांट थी। इसमें आग बुझाओ प्रबंधन के लिए 91 करोड़ रुपए खर्च किए जाने थे, जिसमें से 45 करोड़ रुपए रिलीज किए गए थे। खर्च सिर्फ 17 करोड़ रुपए किए गए। इस राशि के भी इस्तेमाल सर्टिफिकेट केंद्र को न भेजे जाने के कारण बाकी रहते 74 करोड़ रुपए भी मिट्टी हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि आज राज्य की सारी 183 नगर निगम और काउंसिल कर्ज में डूबी हुई है। पिछले समय के दौरान स्थानीय विभागों के पास कितना पैसा आया और कहां गया, इस बारे में पता लगाया जा रहा है। चुनाव से छह महीने पहले नियमों को ताक पर रख दी गई तरक्की को भी चेक किया जा रहा है। पिछले समय के दौरान हुई वित्तीय और अनियमितताओं को नष्ट करने के लिए विभाग के पास सोशल और टेक्निकल ऑडिट शुरू किया गया है जो आज तक कभी नहीं हुआ। जो भी आरोपी पाया जाएगा उन्हें कानून के मुताबिक सजा जरूर मिलेगी।

पंजाब के स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू जिस आत्मविश्वास के साथ बादल बाप-बेटे को केंद्र से मिले धन के इस्तेमाल को लेकर चुनौती दे रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि कहीं न कहीं गलत तो हुआ है, वरना केंद्र सरकार पंजाब को 'रेड जोन' में न रखती। अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के समय में अक्सर भाजपा नेता यह आरोप स. प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर बादल पर लगाते रहे हैं कि उपरोक्त दोनों नेता उनकी बात नहीं सुनते। इनके साथ जो तीसरा नाम जुड़ा था वह मजीठा से विधायक पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया का था। नवजोत सिद्धू उस समय भाजपा में ही थे और वह तथा उनकी विधायक पत्नी समय-समय पर उपरोक्त अकाली नेताओं की कार्यशैली को लेकर भाजपा के प्रदेश व केंद्रीय नेतृत्व को सूचित भी करते रहे और अपना रोष भी जताते रहे, लेकिन दोनों स्तर पर सिद्धू दम्पत्ति की आवाज को नहीं सुना गया। आज सिद्धू स्वयं सत्ता में है और इस कारण अपनी बात सार्वजनिक रूप से फिर कह रहे हैं और चुनौती भी दे रहे हैं। नवजोत सिद्धू पिछली गठबंधन सरकार को इन मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है जैसे =शहरी विकास के कार्यों में घोटाले, स्मार्ट सिटी की ग्रांट का दुरुपयोग। अफसरों के प्रमोशन में घालमेल, अमृतसर बीआरटीएस प्रोजेक्ट में गड़बड़ी, सॉलिड वेस्ट मैनेजमैंट प्रोजेक्ट में गड़बड़झाला, केंद्र सरकार की ग्रांट का इस्तेमाल बादलों ने अपने हितों में किया। बादल सरकार के कार्यकाल में जितने भी प्रोजेक्ट शुरू हुए, सभी का ऑडिट करवाने की कवायद, बादलों द्वारा फाइनल किए गए ऐसे प्रोजेक्ट जिन पर काम शुरू नहीं हुआ था, फिलहाल रोका- स्मार्ट सिटी को लेकर प्रोजेक्ट कंसलटेंट की नियुक्ति रोकी।

धरातल का सत्य यही है कि अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के दूसरे पांच वर्षों के समय में आर्थिक अनुशासन नहीं रहा। अकालियों के कुछ वरिष्ठ नेताओं के दबाब में तथा 2017 में होने वाले विधानसभा चुनावों को सम्मुख रख गठबंधन सरकार का लक्ष्य सरकारी धन को मतदाता को खुश कर मत लेने तक ही रह गया था। मतदाता तो खुश नहीं हुआ और गठबंधन सरकार को हार का मुंह देखना पड़ा और आर्थिक अनुशासनहीनता के कारण पंजाब 'रेड जोन' में आ गया है।

वर्तमान कांग्रेस की सरकार पिछली सरकार द्वारा आर्थिक स्तर पर की गई गलतियों को 'श्वेत पत्र' लाकर जनता के सामने रखने की तैयारी में है। 'श्वेत पत्र' आने से स्थिति काफी स्पष्ट हो जाएगी। समस्या यह है कि अब पंजाब को दोबारा आर्थिक अनुशासन में कैसे लाया जाए इसका सीधा सा सिद्धांत यह है कि 'खर्च कम और आमदनी अधिक हो।' बात कहने में तो आसान लगती है लेकिन धरातल स्तर पर अमल लाने में मुश्किल है, क्योंकि कांग्रेस सरकार भी तो 'वोट बैंक' को खोना नहीं चाहती, इसलिए पिछली सरकार द्वारा आम जन की भलाई के नाम पर चलाई योजनाओं को बंद करने की हिम्मत वर्तमान सरकार भी नहीं दिखा पाएगी। हां आमदनी भ्रष्टाचार पर लगाम लगाकर बढ़ाई जा सकती है। पंजाब सरकार को फिजूल खर्चों को कम करने के साथ आमदनी बढ़ाने के तरीकों पर विचार करना चाहिए, साथ-साथ भ्रष्टाचार पर काबू पाने की कोशिश करनी चाहिए। उपरोक्त मामले में सफलता पारदर्शिता की नीति अपनाने से ही मिलेगी दूसरा आम जन का सहयोग लेकर ही पंजाब को 'रेड जोन' से बाहर किया जा सकता है। आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया वाली नीति तो आत्मघाती ही है।

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