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पत्थरबाजों को पाक समर्थन

Publish Date: May 31 2017 04:53:59pm

कश्मीर घाटी में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन के बीच दिल्ली में तीन अलगाववादी नेताओं से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) की पूछताछ से साफ हो गया है कि पाकिस्तान अलगाववादियों की फंडिंग से घाटी में खतरनाक साजिश रच रहा है। घाटी में आतंकवादी गतिविधियों और पत्थरबाजी के लिए फंडिंग लेने के आरोप में एनआईए ने फारूक अहमद डार उर्फ 'बिट्टा कराटे', नईम खान और तहरीक-ए-हुर्रियत के प्रमुख जावेद अहमद बाबा उर्फ 'गाजी' को समन जारी किया था।

पूछताछ में यह साफ हो गया है कि बुरहान की मौत के बाद घाटी की अशांति स्वाभाविक नहीं थी बल्कि बड़ी चालाकी से रची गई साजिश का हिस्सा थी। इतना ही नहीं, इस साल बर्फ पिघलने के बाद चल रहा हिंसा का दौर भी उसी योजना का विस्तार है। इसके लिए घाटी में मौजूद पाकिस्तानी तंत्र ने करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। एनआईए सूत्रों अनुसार जिस तरह के सुराग मिल रहे हैं, उनके आधार पर इनसे आने वाले वाले दो-तीन दिन तक पूछताछ की जाएगी। एनआईए ने इन्हें कुछ खास बैंक खाते और संपत्ति से संबंधित कागजात साथ लाने को कहा था। इन तीनों ने एक स्टिंग आपरेशन में स्वीकारा था कि घाटी में उपद्रव के लिए इन्हें पैसे दिए जाते रहे हैं। एनआईए पहले भी इन तीनों से शुरूआती पूछताछ कर चुकी है। 

एनआईए सूत्रों अनुसार घाटी में सक्रिय आईएसआई के गुर्गे, अलगाववादी गुटों के साथ काम कर रहे चुनिंदा लोगों को खासी रकम दिया करते हैं। कश्मीर मेें मौजूद सुरक्षा तंत्र को इस फंडिंग की जानकारी नहीं मिल पा रही थी। पिछले साल कश्मीर में हिजबुल कमांडर बुरहान बानी की मौत के बाद घाटी के स्कूलों में आग लगाने और नौजवानों के हाथ में पत्थर व पेट्रोल बम थमाने के लिए कुछ अलगाववादी तत्वों को खासी फंडिग की जा रही थी। एनआईए को इस फंडिंग से कश्मीर में पाकिस्तान की नई उपद्रवी गतिविधियों का खुलासा हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक इन अलगाववादियों को घाटी के कम से कम 5000 स्कूलों को जलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसका मकसद घाटी में आम परिवार के लड़कों को स्कूल से दूर रखना या पढ़ाई छोडऩे पर मजबूर करना है। 

उपरोक्त तथ्यों को देखते हुए भारत के खेल मंत्री विजय गोयल का यह बयान कि जब तक सीमा पर आतंकवाद है तब तक पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय क्रिकेट संभव नहीं उचित ही है। इसी तरह घाटी में पत्थरबाजी को देखते हुए भारत के सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने पिछले दिनों युवा अधिकारी के कश्मीरी व्यक्ति को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किए जाने का पुरजोर बचाव करते हुए कहा है कि जब जवानों पर बम और पत्थर फेंके जा रहे हों, तो सेना प्रमुख के तौर पर वह उन्हें मरने के लिए नहीं कह सकते। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना 'घृणित युद्ध' का सामना कर रही है, जिसे नए तरीके से लडऩे की जरूरत है। जनरल रावत ने कहा कि मेजर लीतुल गोगोई को सम्मानित करने का मुख्य उद्देश्य बल के युवा अधिकारियों का मनोबल बढ़ाना था जो आतंकवाद प्रभावित राज्य में बेहद मुश्किल परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। जनरल रावत ने कहा लोग हम पर पथराव कर रहे हैं, पेट्रोल बम फेंक रहे हैं। ऐसे में जब मेरे जवान मुझसे पूछते हैं कि हम क्या करें तो क्या मुझे यह कहना चाहिए कि बस इंतजार कीजिए और जान दे दीजिए? मुझे वहां तैनात सैनिकों का मनोबल बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि अगर प्रदर्शनकारी पथराव करने के बजाय हथियारों से फायरिंग कर रहे होते तो सुरक्षा बलों के लिए आसानी हो जाती। रावत ने कहा, तब मुझे खुशी होती और मैं वह कर पाता जो मैं....(करना चाहता हूं)।'

जनरल रावत ने कहा कि विभिन्न सुरक्षा बलों के बीच विश्वास तोडऩे के लिए एक चाल चली गई थी और जब पोलिंग एजेंट्स ने सुरक्षा की मांग की थी तो मेजर गोगोई उससे इंकार नहीं कर सकते थे। कल अनंतनाग में भी चुनाव होने हैं और ऐसी स्थिति फिर उत्पन्न हो सकती है। अगर मदद की मांग पर सेना सहायता नहीं करेगी तो लोगों, पुलिस और सेना के बीच विश्वास खत्म हो जाएगा। यह मैं नहीं होने दे सकता क्योंकि आतंकवादी तो यही चाहते हैं। 

पाकिस्तान के नापाक इरादों को देखते हुए रक्षा मंत्री अरूण जेटली ने भी कहा है कि भारत की रक्षा तैयारियां हमेशा सर्वोत्तम होनी चाहिए। कश्मीर घाटी में पत्थरबाजी तथा आतंकियों को आर्थिक सहायता व समर्थन तथा संरक्षण देने वाले पाकिस्तान के साथ परिस्थितियां सुधरने तक खेल क्या व्यापार तथा आर्थिक व सामाजिक स्तर पर भी कठोर नियम अपनाने की आवश्यकता है। सीमा पार जो आतंकवादी शिविर हैं उन पर सैनिक कार्रवाई करने तक से भारत को गुरेज नहीं करना चाहिए। 

जहां तक घाटी का प्रश्न है वहां देश के कानून का राज चलता है इस बात का एहसास घाटी के लोगों को भी कराने की आवश्यकता है। धरातल के सत्य से उन्हें अच्छी तरह वाकिफ कराया जाना चाहिए और सत्य यह है कि घाटी सहित जम्मू-कश्मीर प्रदेश भारत का अटूट अंग है
    
-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, उत्तम हिन्दू

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