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पंजाब सरकार के आत्मघाती फैसले

Publish Date: June 03 2017 02:00:57pm

पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनने का एक बड़ा कारण अकाली-भाजपा सरकार की गिरती साख ही था। रेत-बजरी, शराब के ठेके, ट्रांसपोर्ट के साथ-साथ और कई क्षेत्रों में सरकार के अंग-संग वालों पर कब्जे के आरोप लगते रहे और सत्ताधारियों द्वारा दिये उत्तर पर लोगों ने विश्वास नहीं किया। दूसरी तरफ कै. अमरेन्द्र सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने सत्ताधारियों पर जो आरोप लगाए और जनता से जो वायदे किये उस पर पंजाब के लोगों ने विश्वास किया और परिणामस्वरूप पंजाब में कांग्रेस आज सत्ता में है।

सत्ता में आते ही कांग्रेस ने सबसे पहले पंजाब की मान्यता प्राप्त गौशालाओं को मिल रही मुफ्त बिजली बंद कर दी, अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार ने यह सुविधा अपने अंतिम समय में ही दी थी। रेत-बजरी को लेकर पंजाब सरकार आज कटघरे में खड़ी दिखाई दे रही है। सरकार ने वर्तमान संकट को टालने के लिए न्यायिक जांच के आदेश तो दिए हैं, लेकिन जो तथ्य सामने आ रहे हैं उससे स्पष्ट होता है कि दाल में कुछ काला तो अवश्य है।

कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले उद्योगपतियों को बिजली की दरों में कमी करने का आश्वासन देते हुए इसकी दर 5 रुपए प्रति यूनिट देने का आश्वासन दिया था और कांग्रेस के इस आश्वासन को देखते हुए उद्योगपतियों का झुकाव कांग्रेस की ओर बढ़ा था, लेकिन अब बिजली के दाम बढ़ाने की घोषणा हो गई है। जालंधर चेंबर आफ इंडस्ट्री एंड कामर्स ने पावरकॉम के सीएमडी और पावर रेगुलेटरी कमिशन को लैटर लिखा है कि नए आदेशों से इंडस्ट्री का नुकसान हो रहा है। कारखानों में रात की शिफ्टें बंद करने से करीब 20 परसेंट प्रोडक्शन लॉस माना जा रहा है। दरअसल, पहले पंजाब में 4 हजार मेगावाट बिजली की कमी थी, जिसके चलते रोजाना शाम इंडस्ट्री पर 3 घंटे पीक लोड आवर्स लागू होते थे। इस दौरान जो फैक्ट्री चलाएगा, उसे पेनल्टी लगेगी यानी जो बिजली इंडस्ट्री से बचती थी, उसे घरों को दिया जाता था। इन दिनों 4 हजार मेगावाट बिजली फालतू है। इस कारण इंडस्ट्री सरकार से मांग कर रही है कि उसे 5 रुपए यूनिट बिजली दी जाए। 

उम्मीद थी कि नए टैरिफ में इसी रेट पर बिजली मिलेगी लेकिन पावरकाम ने पहली जून से 2 रुपए रेट बढ़ा दिए हैं। चार घंटे की नीति को नये पीक लोड आवर्स में लागू किया है। अब इस दौरान फैक्ट्री चलाने पर पेनल्टी नहीं लगेगी, बल्कि अतिरिक्त पैसा देना होगा। पावरकॉम ने कहा कि लार्ज सप्लाई कैटेगरी की फैक्ट्रियां रोजाना शाम 6 से 10 बजे तक हर यूनिट पर 2 रुपए फालतू दें या फिर बंद रखें। पहले इन्हें 6.13 रुपए में यूनिट मिलता था। अब 2 रुपए बढ़ाकर 8.13 रुपए का मिलेगा। बीस परसेंट टैक्स लगाकर यह नौ रुपए से महंगा मिलेगा। अब पीक लोड ऑवर्स में ये इंडस्ट्री प्रभावित हुई। लोहा भठ्ठियां 600 लेदर इंडस्ट्री 100 वाल्व एंड काक्स 400 पाइप फिटिंग 300 हैंडटूल 400। बिजली महंगी होने के नुकसान • लोहा ढलाई वाली भठ्ठियों का हर महीने 2 से 10 लाख रुपए खर्च बढ़ गया।  रोजाना 4 घंटे फैक्ट्री बंद रहने से 20 लाख का रेवेन्यू लॉस अलग से। हिमाचल प्रदेश में लोहा इंडस्ट्री को 4.30 रुपए यूनिट में बिजली मिलती है। वहां की इंडस्ट्री से पंजाब में लागत दोगुनी हो गई। पंजाब कैसे मुकाबला कर पायेगा? रोजाना शाम 6 से रात 10 बजे तक लेबर छुट्टी पर रहेगी। इससे रात की शिफ्ट बंद हो गई। इंडस्ट्री के लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि मशीनें कम चलने से 20 परसेंट तक प्रोडक्शन गिरेगी। मनरेगा के चलते जालंधर की फैक्ट्रियों में 40 परसेंट लेबर की कमी है। रोजाना काम के अतिरिक्त घंटे न मिलने से फ्री हुई लेबर की गांवों को लौटने की चिंता बनी रहेगी।

पंजाब सरकार के उपरोक्त तीनों फैसले आत्मघाती ही हैं। उपरोक्त तीनों निर्णय से पंजाब सरकार की साख को गहरा झटका लगा है। उद्योगपतियों के साथ-साथ शहरों में रहने वाले आम आदमी पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। गौशाला को मिली सुविधा को बंद करने से हिन्दू जगत में भारी रोष है। उपरोक्त निर्णयों का तत्काल व्यवहारिक स्तर पर तो कोई प्रभाव नहीं पडऩे वाला, लेकिन सरकार की साख गिरने से आने वाले नगर निगमों के चुनावों में कांग्रेस की परेशानी बढ़ेगी। 2019 के लोकसभा चुनावों में तो कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगेगा यह बात तो आज ही कही जा सकती है। अगर उपरोक्त स्थिति से बाहर निकलना है तो पंजाब सरकार को अपने उपरोक्त तीनों फैसलों को रद्द कर जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए नये निर्णय लेने होंगे।

कै. अमरेन्द्र सिंह अगर जन साधारण की भावनाओं के प्रति उदासीनता दिखाते हैं तो यह बात उनकी राजनीतिक व प्रशासनिक क्षमता पर प्रश्न चिन्ह ही लगाएगी। पंजाब कांग्रेस के पास वर्तमान में सबसे ठोस आधार अगर कोई है तो वह कै. अमरेन्द्र सिंह के प्रति लोगों का आकर्षण और उनकी प्रशासनिक क्षमता ही है। अगर इसी पर प्रश्न चिन्ह लग गया और कांग्रेस के प्रति लोगों का मोह भंग हो गया जिसकी संभावनाएं बढ़ रही हैं तो फिर कांग्रेस के पास कुछ विशेष बचने वाला नहीं है। इसलिए कांग्रेस की सरकार को आत्मचिंतन कर अपनी कार्यशैली में सकारात्मक बदलाव लाना होगा। इसी में कांग्रेस की बेहतरी है।


इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, उत्तम हिन्दू

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