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टूटे ट्रैक पर एक्सप्रेस

Publish Date: August 21 2017 10:51:39am

मुजफ्फरनगर के खतौली में पुरी से जा रही कलिंगा उत्कल एक्सप्रेस की 14 बोगियों के पटरी से उतर जाने से दर्जनों लोगों की मौत और सैकड़े के करीब के जख्मी होने के समाचार ने एक बार फिर रेल व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। प्राप्त सूचनाओं से हादसे के लिए रेल विभाग की लापरवाही ही मुख्य कारण है। प्रकाशित समाचार अनुसार शनिवार सुबह पेट्रोलिंग के दौरान ट्रैक क्षतिग्रस्त होने का पता चला। इसके बाद सभी ट्रेनों को धीमी गति से निकलवाया गया और क्षतिग्रस्त हुए हिस्से को बदला गया था। ट्रैक क्षतिग्रस्त होने की जानकारी के बाद भी रेलवे विभाग इस हादसे को नहीं रोक पाया।  इससे कई सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिस समय हादसा हुआ, उस समय कलिंग उत्कल एक्सप्रेस की रफ्तार करीब 105 किमी प्रति घंटा थी। रेल यात्रियों ने भी बताया कि ट्रेन की स्पीड काफी तेज थी। इससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या ट्रैक क्षति का आकलन ठीक से नहीं किया गया। बड़ा सवाल यह है कि जिस ट्रैक की पटरी को बदला गया था, उस पर तेज रफ्तार से ट्रेन कैसे दौड़ रही थी। ऐसी स्थिति में क्षतिग्रस्त ट्रैक या जिस ट्रैक की मरम्मत की जा रही हो, उस पर कॉशन देकर ट्रेनों को कम स्पीड से गुजारा जाता है। अब सवाल यह है कि क्या कलिंग उत्कल को कॉशन नहीं दिया गया था या ट्रेन के चालक ने कॉशन नहीं देखा। सही स्थिति तो जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन यह रेल हादसा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े कर गया है। रेलवे हाई स्पीड बुलेट ट्रेन चलाने के सपने तो खूब दिखा रहा है। लेकिन वह पुरानी पटरियों पर धीमी रफ्तार से चल रही ट्रेनों में हो रही दुर्घटनाओं और इनमें जान गंवाने वालों की तादाद को रोक पाने में विफल रहा है। कुछ वर्षों में 586 दुर्घटनाएं हुईं जिनमें ट्रेनों की टक्कर, पटरी चटकने और ट्रेनों का पटरी से उतरना मुख्य वजह है। इन दुर्घटनाओं में सैकड़ों लोग मारे गए और घायल हुए। इसके बावजूद रेलवे अभी तक कोई ठोस उपाय निकालने में नाकाम रहा है। 

उपरोक्त रेल दुर्घटना का मुख्य कारण रेलवे की लापरवाही है। उत्कल एक्सप्रेस के ड्राइवर को ट्रैक के टूटने व नये के बारे सूचित ही नहीं किया। यही कारण है कि वह निश्चित हो पूरी गति से रेलगाड़ी को चला रहा था। अगर समय रहते ड्राइवर को ट्रैक संबंधी सूचना दी जाती व कहा जाता कि यहां से रेलगाड़ी धीमी गति से ले जाई जाए, तो शायद यह हादसा टल जाता।

मोदी सरकार रेल व्यवस्था को मजबूत करने की आये दिन घोषणाएं करती रहती है। पिछले दिनों देश भर में उन जिलों जिनमें 20 लाख से अधिक आबादी है, वहां मैट्रो रेल चलाने की तैयारी में है। सरकार द्वारा इसी तरह अमृतसर से दिल्ली तक दूसरी बुलेट ट्रेन चलाने की बात कही गई है, लेकिन पुरानी पटरियों और पुरानी व्यवस्था को कैसे संभाला जाए इस बारे अभी कोई ठोस योजना सामने नहीं आई है। रेलवे प्लेट फार्म से लेकर रेलवे स्टेशनों की साफ-सफाई और रेल में मिलने वाला खाना व अन्य बुनिदायी सुविधाओं को लेकर अभी बहुत कुछ करने वाला है। सरकार को बढ़ते रेल हादसों को रोकने और रेल यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर ठोस कदम उठाने चाहिए, तभी यात्री की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाएगी और उसे बुनियादी सुविधाएं भी प्राप्त होंगी। टूटे ट्रैकों पर तो हादसे ही होंगे।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।
 

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