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डोकलाम पर समझौता

Publish Date: August 30 2017 01:37:00pm

पिछले करीब ढाई महीने से डोकलाम विवाद को ले भारत और चीन में चल रहा टकराव फिलहाल तो कम हो गया है, क्योंकि विवाद को ले समझौता हो गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुसार डोकलाम से सेना हटाने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है। वहां से सेना को सिक्किम लाया गया है। डोकलाम में 350 भारतीय सैनिक तैनात किए गए थे। चीन ने कहा है कि भारत की सेना वहां से हट गई है। उसने अपनी सेना के बारे में कुछ नहीं कहा है। चीन के केवल भारत की सेना के हटने के दावे पर भारतीय विदेश मंत्रालय के अफसरों ने कहा कि अगर भारत को ही सेना हटाना होता तो इसमें चीन से समझौते की जरूरत नहीं होती। 16 जून को डोकलाम में भारत ने चीन के सैनिकों को सड़क बनाने से रोक दिया था। इसके बाद से दोनों सेनाओं में गतिरोध की स्थिति बनी। भारत ने इस क्षेत्र को भूटान का बताया था और चीन से यथास्थिति बनाए रखने को कहा था।

गौरतलब है कि सितम्बर के पहले सप्ताह में चीन में ब्रिक्स सम्मेलन हैं। उस सम्मेलन की सफलता हेतु भारतीय प्रधानमंत्री का इस सम्मेलन में शामिल होना विशेष महत्व रखता है। चीन ने अपने यहां होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन की सफलता हेतु डोकलाम को ले विवाद को हल करने हेतु भारत की बात को मान लिया है और सड़क निर्माण हाल की घड़ी रुक गया है। लेकिन चीन कब क्या कर दे इस बारे अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। ब्रिक्स सम्मेलन के बाद चीन डोकलाम नहीं तो किसी और मुद्दे पर टकराव बना सकता है। भारत को डोकलाम मामले में मिली सफलता को कूटनीतिक सफलता ही मानी जाएगी। भारत ने जिस धैर्य से चीनी मीडिया व सरकार द्वारा दी धमकियों का सामना किया वह सराहनीय है और अंत में चीन को झुकना पड़ा, इससे इस क्षेत्र में और विश्व स्तर पर भारत की सराहना ही की गई है।

1962 की लड़ाई के बाद शायद पहली बार चीन ने भारत से कूटनीतिक स्तर पर मात खाई है। भारत को मिली इस क्षणिक सफलता से खुश होने की अभी जरूरत नहीं है, क्योंकि चीन ने अब भी जो कदम उठाया है वह अपने हित को देखते हुए उठाया है। ब्रिक्स सम्मेलन बाद चीन फिर भारत को आंखें दिखा सकता है। इसलिए भारत को अपनी सैनिक शक्ति के साथ कुटनीतिक नीति पर अभी और सतर्क हो कार्य करने की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने चीन के प्रति जो नीति अपनाई उससे भारत का कद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा है। लेकिन हमें मिली सफलता से खुश होने की बजाय अपने भविष्य को और मजबूत व उज्जवल बनाने के लिए और कार्य करने की आवश्यकता है। चीन व पाकिस्तान जैसे पड़ोसी जिस देश के हो वहां किसी प्रकार की लापरवाही की तो कोई गुजाइंश ही नहीं है।    


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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