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इस बच्चे के पैरों का वजन शरीर से भी हुआ ज्यादा, डॉक्टर हैरान-मां-बाप ने लिया कठोर फैसला

Publish Date: October 02 2017 11:19:43am

अंबिकापुर (छत्तीसगढ़) (उत्तम हिन्दू न्यूज): 6 साल का एक बच्चा चिकित्सा जगत के लिए चैलेंज बन चुका है। बेटे का इलाज करवा कर थक चुके मां बाप ने दिल पर पत्थर रखकर फैसला लिया है कि अब वे अपने बेटे को शोध के लिए चिकित्सा जगत के हवाले कर देंगे ताकि डॉक्टर उनके बेटे की बीमारी का पता करके ऐसा इलाज ढूंढ सकें जिससे इस बीमारी से ग्रसित दूसरे बच्चों का इलाज हो सके।  बच्चे का नाम श्रवण है। श्रवण के पिता नितिन गर्ग पुराना बस स्टैंड स्थित गीता मोबाइल शॉप चलाते हैं।

उन्होंने बताया कि उनके घर छह साल पहले बेटे का जन्म हुआ जिसका नाम उन्होंने श्रवण रखा। जन्म से ही श्रवण के पैर बहुत बड़े थे और अब उसके शरीर के वजन से भी अधिक भारी हो चुकी हैं। नितिन ने बताया कि अब तक वे श्रवण के इलाज के लिए दर्जनों बड़े से बड़े डॉक्टरों के पास गए, मगर किसी भी डॉक्टर ने न तो बीमारी का नाम बताया और न ही कोई दवा दी। भारी पैर होने के कारण श्रवण चल-फिर नहीं सकता। व्यवसायी नितिन गर्ग की दो बेटियां और एक छोटा बेटा श्रवण है। नितिन गर्ग का कहना है कि जब श्रवण की मां पायल की प्रसव के दौरान सोनोग्राफी हुई थी, उसी समय सोनोग्राफी में स्पष्ट रूप से बच्चे के हालात साफ दिखाई दे रहे थे। बावजूद इसके चिकित्सक ने अनदेखी की। नितिन गर्ग का आरोप है कि अगर चिकित्सक उस वक्त सोनोग्राफी सही तरीके से देखकर बताते, तो शायद उस वक्त परिजन कुछ और निर्णय ले सकते थे। बेटे के इलाज के लिए परिजन बिलासपुर, दिल्ली, इंदौर, बैलूर व कोयम्बटूर तक जा चुके हैं, लेकिन एक भी डॉक्टर ने बीमारी का नाम नहीं बताया और न ही कोई दवा ही दी। अपनी लाइलाज बीमारी को लेकर छह वर्षीय श्रवण ने आज तक उस बीमारी की कोई भी दवा नहीं ली है। श्रवण अपने उम्र के बच्चों की तरह मानसिक रूप से पूरी तरह से स्वस्थ है।

हालांकि वह अभी तक स्कूल नहीं जा सका है, परंतु पढ़ाई-लिखाई में वह पूरी तरह से माहिर है। कमी बस यह है कि वह अपने भारी पैरों के चलते चल-फिर नहीं सकता। चिकित्सकों का यह कहना है कि अब श्रवण की सिर्फ सेवा कीजिए। इस सलाह के अनुसार परिजन उसकी सेवा में लगे रहते हैं। परिजनों को यह भी डर है कि आने वाले दिनों में जब श्रवण और बड़ा होगा और अपनी लाइलाज बीमारी के बारे में समझ पाएगा तो उसकी मनोस्थिति क्या होगी, यह सोचकर परिजन परेशान हैं। 

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