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कारोबारियों को दिवाली उपहार

Publish Date: October 08 2017 12:54:08pm

केंद्र सरकार ने जब से सेवा एवं वस्तु कर देश में लागू किया था तभी से छोटे व मध्यम श्रेणी में आने वाले कारोबारियों को एक तरफ मंदी का सामना कर पड़ रहा था। दूसरी तरफ सेवा एवं वस्तु कर की तकनीकियों को लेकर वे काफी परेशान थे। छोटे व मध्यम श्रेणी के कारोबारियों की आवाज को पहले विपक्षी दलों ने और फिर भाजपा के वरिष्ठ लोगों ने उनकी आवाज को बुलंद किया तो फिर स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आगे आना पड़ा। जीएसटी परिषद की बैठक से ठीक पहले उन्होंने दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान जहां सरकार का विरोध कर रहे दलों व नेताओं का एक-एक कर उत्तर दिया और सरकार के समर्थन में आंकड़ों को सार्वजनिक किया वहीं यह भी घोषणा की थी कि सरकार लकीर की फकीर नहीं है। पिछले तीन महीनों में सरकार सम्मुख जो भी सुझाव विपक्षी दलों और व्यापारी संगठनों ने दिए हैं सरकार उन पर विचार कर उचित कदम उठाएगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए आश्वासन का तथा जनमत का सम्मान करते हुए जीएसटी परिषद की बैठक में छोटे व मध्यम श्रेणी के कारोबारियों को सरकार ने रियायतें देने के साथ-साथ तकनीकी दृष्टि से आ रही मुश्किलों के जाल से भी कारोबारियों को राहत देने की घोषणा की है। 'परिषद् ने कंपोजिशन स्कीम की सीमा 75 लाख रुपए से बढ़ाकर एक करोड़ रुपए तक कर दी है। रिटर्न दाखिल करने में छोटे कारोबारियों और व्यापारियों  को तीन महीने की छूट दी गई है। जब कारोबारियों को तीन महीने में एक बार रिटर्न दाखिल करना होगा। फिलहाल, उन्हें हर महीने रिटर्न दाखिल करना पड़ता है। इसके अलावा एक और बड़ा फैसला लेते हुए रत्न और गहनों को जीएसटी नोटिफिकेशन के दायरे से बाहर कर दिया गया है। अब इसके लिए नयी नोटिफिकेशन लायी जाएगी। निर्यातकों को 10 अक्तूबर से जुलाई का और 18 अक्तूबर से अगस्त का जीएसटी रिफंड मिलेगा।

एक अप्रैल 2018 तक सभी एक्सपोर्टर्स का ई वॉलिट बनाया जाएगा। सरकार ने 27 वस्तुओं पर जीएसटी दर कम की है। सबसे बड़ी राहत ये है कि अब एक ही फॉर्म से जीएसटी फाइल की जा सकेगी। साथ ही रिवर्स चार्ज व्यवस्था मार्च 2018 तक स्थगति कर दी गयी है। जीएसटी के तहत निर्यातकों के लिए रिफंड व्यवस्था नहीं होने से उनके सामने नकदी की समस्या हो गयी थी। जेटली ने बताया कि रिफंड प्रक्रिया शुरू करने के लिए राज्यों और केंद्र के अधिकारियों को अधिकार दिये गये हैं। इस साल 10 अक्तूबर से जुलाई महीने के लिए और 18 अक्टूबर से अगस्त महीने के लिए रिफंड प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी और निर्यातकों को जल्द से जल्द रिफंड को चेक दे दिया जाएगा। जीएसटी काउंसिल ने कंपोजिशन स्कीम की सीमा भी बढ़ा दी है। 20 लाख रुपए से अधिक और एक करोड़ रुपए तक के सालाना टर्नओवर वाले कारोबारी इस स्कीम का फायदा उठा सकते हैं। इस स्कीम के तहत टैक्स रेट कम है।Ó

त्यौहारों के दिनों में उपरोक्त राहतें छोटे कारोबारियों के लिए दिवाली उपहार के रूप में ही देखी जाएंगी। तस्वीर का दूसरा पहलू यह भी है कि एक लोकतांत्रिक देश में लोगों द्वारा चुनी हुई सरकार ने जन भावनाओं का सम्मान भी किया है। सरकार को उपरोक्त राहतों के साथ-साथ अब देश में आये मंदी के दौर को समाप्त करने के लिए जहां अफसरशाही पर लगाम लगाने की आवश्यकता है वहीं कारोबारियों के छोटे बड़े संगठनों से लगातार सम्पर्क बनाकर व्यापारियों और उद्योगपतियों के सम्मुख आ रही मुश्किलों को हल करने का प्रयास जारी रखना चाहिए तभी व्यापार जगत में एक सकारात्मक व स्थाई परिवर्तन आयेगा।


- इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।
 

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