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शांता कुमार और धूमल के टकराव से कांग्रेस को लाभ के आसार

Publish Date: November 05 2017 06:13:13pm

कांगड़ा (उत्तम हिन्दू न्यूज) : हिमाचल प्रदेश के राजनीतिक रूप से संवेदनशील कांगडा जिले में शांता कुमार और प्रेम कुमार धूमल की आपसी प्रतिद्वंदिता से संभवत: भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) को काफी नुकसान हाेगा। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को सत्ता विरोधी लहर का फायदा मिला था और इस क्षेत्र की 15 विधानसभा सीटों में से उसे 12 सीटें मिली थीं।कांगड़ा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे मौजूदा विधायक पवन काजल ने पांच वर्ष पहले निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ा था और कांग्रेस के सुरेन्द्र काकू को जाेरदार पटखनी दी थी। इस सीट पर इस बार भाजपा ने संजय चौधरी को उतारा है जो 2012 में तीसरे स्थान पर थे। भाजपा ने श्री चौधरी पर भराेसा जताते हुए इस बार टिकट दिया तो पार्टी कार्यकर्ताओं को काजल के दावे को दरकिनार करने के भाजपा नेतृत्व के फैसले पर कोई हैरानी नहीं हुई।

कांगड़ा विधानसभा सीट के दौलतपुर गांव में काजल के प्रचार प्रबंधक अनूप कुमार का कहना है“ वास्तव में काजल को भाजपा का टिकट देने से मना करने में पार्टी आलाकमान का कोई रोल नहीं था और यह सब शिमला में बैठकर ही तय हुआ था। मेरा मानना है कि यह सब धूमल और शांता कुमार के बीच हुए हुए सौदे के तहत किया गया था।” उन्हाेंने बताया कि काजल ने भाजपा से टिकट मांगा था लेकिन भाजपा के भीतर की गुटबाजी और तनातनी के चलते यह संभव नहीं हो पाया। “शांता कुमार भाजपा के दिग्गज नेता हैं लेकिन उन्हेंं अपने बारे में मुगालता है और वह नहीं चाहते कि कोई उनके कद के सामने खड़ा होकर चुनौती पेश करे तथा यही कारण था कि काजल का टिकट काट दिया गया। काजल का काफी व्यापक जनाधार है लेकिन शांता कुमार भी नहीं चाहते हैं कि कांगडा जिले में भाजपा का कोई चेहरा सामने आए और इस बात का प्रतिवाद नहीं किया जा सकता है कि शांता कुमार की धूमल से दुश्मनी भाजपा को काफी महंगी पड़ेगी और इस जिले में कांग्रेस को 15 में से 12 सीटें मिल सकती हैं। हमीरपुर में भाजपा नेता भी मानते हैं कि धूमल और शांता कुमार बहुत प्रसिद्ध हैं लेकिन श्री धूमल के एक बहुत ही वफादार नेता का कहना है “यह दुश्मनी तो बीते जमाने की बात बन चुकी है और दोनों नेता एक ही संयुक्त मकसद के लिए काम कर रहे हैं।”

उनका कहना है कि जब उनका नाम भाजपा के मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की तरफ से घोषित किया गया तो शांताकुमार ने सबसे पहले धूमल को मुबारकबाद दी थी। वास्तव में धूमल ने भी इस बात की पुष्टि की हैं। उनका कहना है “यह सच है कि शांताकुमार ने मुझे टेलीफोन किया था और हमारे राष्ट्रीय संगठन सचिव रामलाल जी ने मुझे पहले टेलीफोन किया था और दूसरा टेलीफोन श्री शांतकुमार की तरफ से आया था।” अब इस बात को इन्हीं नेताओे पर छोड़ दिया जाना चाहिए- टीम मोदी और अमित शाह यह संदेश देंगें की पार्टी में एकजुटता है। लेकिन कांग्रेस प्रबंधक के अपने खुद के तर्क है कि शांताकुमार अब भी एक बड़ा कारक हैं और इनका मानना है कि अगर किस्मत साथ दे जाए और अंतिम समय की मेहनत रंग ला दे तो कांग्रेस पालमपुर,ज्वालामुखी, धर्मशिला, सुलाह और बैजनाथ जैसी महत्वपूर्ण सीटें जीत सकती है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने जारी एक बयान में कहा है कि धूमल ने वर्ष 2012 में एक तरह से अपनी सत्ता बचा ली थी लेकिन पार्टी के भीतर की रंजिश तथा गुटबाजी ने काफी अहम भूमिका अदा की और आखिरकार कांग्रेस को इसका फायदा मिल ही गया।

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