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हिमाचल विधानसभा चुनाव

Publish Date: November 08 2017 12:56:51pm

9 नवम्बर को हिमाचल विधानसभा के लिए प्रदेश का मतदाता अपने मतदान से केवल चुनाव मैदान में उतरे उम्मीदवार तथा राजनीतिक दलों के लिए ही नहीं बल्कि प्रदेश और अपने भविष्य के लिए भी मतदान करेगा। 68 विधानसभा सीटों के लिए 338 उम्मीदवार मैदान में हैं जिन में से 136 कांग्रेस और भाजपा के हैं। महिला उम्मीदवारों की संख्या 34 है और 11 महिला उम्मीदवार कांग्रेस और भाजपा की हैं। कुल मतदाता 50.26 लाख हैं जिनमें 25.31 पुरुष हैं और 24.57 लाख महिला मतदाता हैं। 37.574 पूर्व सैनिक तथा 14 अन्य मतदाता हैं।

प्रदेश में चुनाव प्रचार थम चुका है पर पिछले कुछ दिनों में भाजपा व कांग्रेस ने मतदाता को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए दिन-रात एक कर रखा था। प्रदेश में सर्दी हावी हो रही है लेकिन सत्ता पाने वालों ने प्रदेश में राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गर्मा के रखा हुआ है। कांग्रेस ने मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए जो घोषणा पत्र जारी किया है उस अनुसार अगर कांग्रेस फिर सत्ता में आती है, तो 'आगामी 5 साल में डेढ़ लाख युवाओं को देगी रोजगार। अनुबंध कर्मचारियों को 2 साल के बाद नियमित करने का वायदा। मजदूरों की दैनिक दिहाड़ी बढ़ाकर 350 रुपए करने का दिया भरोसा। सीमांत किसानों को 1 लाख रुपए का ब्याज रहित ऋण। महिला अपराध की शिकायत को मोबाइल एप के साथ ही ट्रोल फ्री नंबर। 2003 के बाद लगे कर्मचारियों को पुरानी पैंशन बहाली का मौखिक वायदा। बेरोजगारी भत्ता 1500 करने का वायदा। भूमि अधिग्रहण के लिए फैक्टर-2 लगाने का वायदा।

प्रदेश की राजनीति में तथा कांग्रेस में अपनी विशेष पहचान रखने वाले मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के लिए जहां यह विधानसभा चुनाव आखिरी होने वाला है तो राजा के बेटे विक्रमादित्य सिंह का यह पहला विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। पिता के पुराने क्षेत्र से चुनाव में उतरने के कारण विक्रमादित्य लाभ वाली स्थिति में है। यही स्थिति राजा वीरभद्र की भी है। कांग्रेस का लक्ष्य बेशक सत्ता में दोबारा आने का ही है लेकिन प्रदेश की कानून व्यवस्था के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर कम•ाोर होती पकड़, आंतरिक धड़ेबंदी के कारण कांग्रेस के लिए लक्ष्य की प्राप्ति मुश्किल दिखाई देती है। एक कांटे की टक्कर में वीरभद्र ने अपना सब कुछ दांव पर लगाया हुआ है। वीरभद्र के लिए यह चुनाव एक तरह आर-पार की लड़ाई ही है। वीरभद्र ने अपने बलबूते पर पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के घुटने लगवायें फिर प्रदेश अध्यक्ष सुक्खू को भी किनारे करने में सफल रहे। 83 वर्ष की आयु में राजा वीरभद्र की इच्छाशक्ति और संकल्प ही उनका मुख्य सहारा है और इन्हीं के बल पर वह एक अकेले ही भाजपा को चुनौती दे रहे हैं। राहुल गांधी और अन्य की भूमिका कोई विशेष महत्व नहीं रखती। इसी बात का ध्यान रख वीरभद्र अपने दम पर ही चुनाव लड़ते दिखाई दे रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश में भाजपा ने जब तक अपना मुख्यमंत्री का चेहरा लोगों के सामने नहीं रखा था तब तक भाजपा भी कई प्रकार के दबाव व चुनौतियों का सामना कर रही थी। प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में चुनाव लडऩे व धूमल को भावी मुख्यमंत्री के रूप में घोषणा होने के साथ भाजपा लाभ वाली स्थिति में आ गई है। प्रेम कुमार धूमल प्रदेश में एक परिपक्व राजनीतिज्ञ के रूप में देखे जाते और एक अच्छे प्रशासक के रूप में पहचाने जाते हैं। प्रदेश की गिरती कानून व्यवस्था और बढ़ते भ्रष्टाचार के मुद्दे को प्रेम कुमार धूमल ने जिस बेबाक तरीके से रखा है उस बात को हिमाचल प्रदेश के लोगों ने समझा है। शिमला के गुडिय़ा कांड के बाद तो वीरभद्र सरकार की छवि व साख पर ही उंगली उठने लगी है। कांग्रेस की कम•ाोरियों को जगहाजिर करने के साथ भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में आम आदमी को राहत देने व युवाओं को आकर्षित करने के लिए सुशासन, वित्तीय, जीएसटी, कृषि और बागवानी के साथ-साथ महिलाओं तथा सरकारी कर्मचारियों को भी राहत देने की बात कही है। स्वास्थ्य और शिक्षा में रियायतों और सुधार के साथ अन्य कई मुद्दों संबंधी घोषणाएं की हैं।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों में मतदाता को आकर्षित करने के लिए केंद्रीय नेताओं ने भी हिस्सा लिया है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में आनन्द शर्मा, शिंदे इत्यादि ने प्रदेश में चुनाव प्रचार बड़े जोर शोर से किया है तो भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्तमंत्री अरुण जेटली और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी सहित भाजपा के कई नेताओं ने भाजपा व प्रेम कुमार धूमल के पक्ष में बहुत कुछ कहा है।

अतीत में जाएं तो पायेंगे कि हिमाचल प्रदेश के जागरूक मतदाता ने हर बार सत्ता परिवर्तन को ही प्राथमिकता दी है। अतीत की परम्पराओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि बेशक कांग्रेस व भाजपा में कांटे की टक्कर है लेकिन लाभ वाली स्थिति में भाजपा ही है। प्रेम कुमार धूमल को बतौर मुख्यमंत्री के रूप में पेश करने से भाजपा लाभ वाली स्थिति में है। हिमाचल प्रदेश में पर्यटन, उद्योग, बेरोजगारी तथा भ्रष्टाचार व कुशासन मुख्य मुद्दें हैं।

उपरोक्त तथ्य अपनी जगह हैं, लेकिन प्रदेश की जनता क्या सोच रही है और किस बात को प्राथमिकता देते हुए 9 नवम्बर को मतदान करेगी इसका पता तो 18 दिसम्बर को चुनाव परिणाम आने पर ही चलेगा। लेकिन आज तो यही कह सकते हैं कि हिमाचल प्रदेश का जागरूक मतदाता अपने व प्रदेश हित को सम्मुख रख मतदान करेगा और शांतिप्रिय माहौल व ढंग से करेगा। चुनाव प्रचार के दौरान व्यक्तिगत लांछन व कई बार अभद्र भाषा का प्रयोग दु:खदाई है और लोकहित में नहीं है। मतदान के समय मर्यादा में रहते हुए ही मतदान हो यह बात सरकार व मतदाता दोनों को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। जीत-हार जिस किसी की भी हो लेकिन अंतिम विजय तो मतदाता व लोकतंत्र की ही है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मतदाता को मतदान करना चाहिए। मतदान अवश्य कीजिये यह आपका अधिकार भी है और कत्र्तव्य भी है।


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।
         

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