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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर

Publish Date: November 13 2017 01:22:58pm

लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान हमें तोडऩे की कोशिश करता है लेकिन हमारी सेना, अर्ध सैनिक बल और जम्मू-कश्मीर की पुलिस के आपसी तालमेल के कारण जम्मू-कश्मीर में हालात सुधरे हैं। दूसरी तरफ श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला कह रहे हैं कि भारत-पाक कितनी ही जंग क्यों न लड़ लें 'पीओके' पाकिस्तान का हिस्सा रहेगा, यह बात कभी नहीं बदलेगी।

फारूक का बयान प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने आजाद कश्मीर की बात को खारिज करते हुए इसे वास्तविकता से परे करार दिया था। फारूक ने कहा, ये (आजाद कश्मीर) स्वतंत्रता जैसा मुद्दा नहीं है। हम घिरे हुए हैं, एक तरफ चीन है, फिर पाकिस्तान और तीसरी और भारत। इन तीनों के पास परमाणु बम हैं। ऐसे में हमारे पास अल्लाह का नाम लेने के अलावा कोई चारा नहीं है। जो भी लोग आजादी की बात करते हैं, वो गलत हैं।

स्वायत्तता की मांग पर फारूक बोले, आंतरिक स्वायत्तता हमारा अधिकार है और केन्द्र सरकार को इसे हमें लौटाना चाहिए। तभी घाटी में शांति लौटेगी। दोनों हिस्सों के लोगों को स्वायत्तता का अधिकार दिया जाना चाहिए। केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर के बयान का जिक्र करते हुए फारूक ने कहा, कश्मीर के तत्कालीन राजा हरि सिंह और भारत सरकार के बीच का विलय पत्र आपको याद नहीं है। आप उन शर्तों को क्यों भूल गए । राज्यमंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय, जितेन्द्र सिंह ने फारूक अब्दुल्ला द्वारा दिए गए बयान की प्रतिक्रिया में कहा कि फारूक जब 40 साल पहले सीएम बने थे, तो उन्होंने स्वायत्तता की मांग छोड़ दी थी। सत्ता से बाहर आते ही वे अक्सर ऐसे देश विरोधी बयान देते रहे हैं। जनता समझ चुकी है कि इनका दर्द क्या है? जम्मूृ-कश्मीर के नौजवान उनसे ज्यादा समझदार हैं।

फारूक अब्दुल्ला को गिरगिटी रंग उनके पिता शेख अब्दुल्ला से ही मिला है। शेख अब्दुल्ला के व्यक्तित्व बारे तत्कालीन यूएनओ के शांति मिशन के सदस्य जोसेफ कॉर्बेल ने अपनी कृति 'डेंजर इन कश्मीर' में शेख अब्दुल्ला के गिरगिटी रंग बारे इस प्रकार कहा है, 'मई, 1949 में शेख अब्दुल्ला ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को आश्वासन दिया कि 'मैं चाहता हूं कि आप विश्वास करें कि कश्मीर आपका है। संसार की कोई शक्ति हमें अलग नहीं कर सकती। हर कश्मीरी महसूस करता है कि वह एक भारतीय है और यह कि भारत उसकी मातृभूमि है। समय-समय पर उसने कश्मीर की पूर्ण स्वतंत्रता की रट लगाई और अन्य अवसरों पर उसने घोषणा की कि स्वतंत्रता का विचार व्यावहारिक नहीं है। 1952 में उसने घोषणा की 'हमारी रियासत पर न तो भारतीय पार्लियामेंट का न्यायप्रभुत्व है और न ही रियासत से बाहर की ही किसी पार्लियामेंट का। भारत या पाकिस्तान, कोई भी देश हमारी प्रगति के पहिए में आड़े नहीं आ सकता।' कुछेक दिनों बाद उसने कश्मीर को 'पाकिस्तान और भारत मध्य एक ऐसा पुल, जो दुबारा एक हो सकता है और एक देश बन सकता है' बताया। परंतु दो दिन बाद उसने विचार व्यक्त किया कि 'भारत और पाकिस्तान के मध्य संबंध अखंड हैं और धरती की कोई शक्ति हमें जुदा नहीं कर सकती।' फिर उसने घोषणा की कि कश्मीर का अस्तित्व भारत के पैसे, व्यापार या सुरक्षा बलों पर निर्भर नहीं है और वह भारतीय सहायता की रस्सियों को कोई महत्व नहीं देता। धमकियों या व्यंग्योक्तियों से उसे झुकने पर बाध्य नहीं किया जा सकता।' वास्तविक तथ्य यह है कि उसने कश्मीर को  एक-एक कदम उठाते हुए भारत से दूर कर दिया। उसके एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी ने उससे चरित्रानुसार उसे 'कश्मीर में साम्प्रदायिक, जम्मू में कम्युनिस्ट और भारत में राष्ट्रवादी' बताया है।

फारूक और उमर अब्दुल्ला आज भी शेख अब्दुल्ला द्वारा बनाए व दिखाए रास्ते पर ही चल रहे हैं। सत्ता में आने के बाद और विपक्ष में रहते कुछ और रंग दिखाने का सिलसिला अब्दुल्ला  परिवार की शायद रंगों में ही है। इसलिए जम्मू-कश्मीर में कुछ और दिल्ली में इनका रंग कुछ और होता है।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बताने वाले फारूक अब्दुल्ला का यह कहना कि पाकिस्तान ने वह हिस्सा हथियार के जरिए लिया था। भारत को यह संदेश भी देना है कि बिना ताकत के इस्तेमाल के पाक अधिकृत कश्मीर को वापिस नहीं लिया जा सकता। संवाद द्वारा पाकिस्तान अपने कब्जे में आए कश्मीर को देने वाला नहीं है। फारूक अब्दुल्ला ने जो कहा है, वह कटु सत्य ही है। भारत को अगर पाक अधिकृत कश्मीर वापिस लेना है तो अपने आप को सैनिक, आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक स्तर पर मजबूत करने की आवश्यकता होगी। शस्त्र और शास्त्र को पूजने वाला भारत जब सैनिक दृष्टि से मजबूत हो जाएगा तो पाक अधिकृत कश्मीर की समस्या का समाधान भी हो जाएगा।
सैनिक दृष्टि से मजबूत भारत जब एक दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कश्मीर घाटी की समस्या को हल करने के लिए सक्रिय होगा, तब शायद घाटी की समस्या स्थाई रूप से हल हो जाएगी। एक दृढ़ इच्छा शक्ति ही भारत को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर दिला सकती है।


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू। 

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