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अगर विराट कोहली की चलती तो मैं टीम इंडिया का कोच होता: सहवाग

Publish Date: November 13 2017 07:22:42pm

मेरठ (उत्तम हिन्दू न्यूज) : पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंदर सहवाग ने सोमवार को यहां कहा कि कप्तान भले ही टीम का सर्वेसर्वा होता है लेकिन कई मामलों में उसकी भूमिका केवल राय देने वाली होती है। यही वजह है कि विराट कोहली के समर्थन के बावजूद वह टीम इंडिया का कोच नहीं बन पाए। अनिल कुंबले के कप्तान कोहली के साथ अस्थिर संबंधों के कारण मुख्य कोच पद छोड़ने के बाद सहवाग भी इसके दावेदारों में शामिल हो गए थे। सचिन तेंडुलकर, सौरभ गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण की तीन सदस्यीय क्रिकेट सलाहकार समिति ने हालांकि रवि शास्त्री के नाम पर मुहर लगाई, जो इससे एक साल पहले कुंबले से दौड़ में पिछड़ गए थे। सहवाग ने कहा कि कप्तान का टीम से जुडे़ विभिन्न फैसलों पर प्रभाव होता है, लेकिन कई मामलों में अंतिम निर्णय उसका नहीं होता है। उन्होंने यहां एक कार्यक्रम के दौरान कहा, 'कोच और चयन में कप्तान की भूमिका हमेशा राय देने वाली रही है। विराट कोहली चाहते थे कि मैं भारतीय टीम का कोच बनूं। जब कोहली ने संपर्क किया तभी मैंने आवेदन किया, लेकिन मैं कोच नहीं बना। ऐसे में आप कैसे कह सकते हैं कि हर फैसले में कप्तान की चलती है।' 

सहवाग के बारे में कहा गया था कि उन्होंने केवल एक पंक्ति में कोच पद के लिए आवेदन कर दिया था, लेकिन अपने करियर में 104 टेस्ट और 251 वनडे खेलने वाले इस विस्फोटक बल्लेबाज ने इससे इनकार किया। उन्होंने कहा, 'मैंने सभी औपचारिकताएं की थी, एक लाइन वाली बात मीडिया के दिमाग की उपज थी।' पाकिस्तान के खिलाफ 2004 में मुल्तान में 309 रन की पारी खेलकर टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक जड़ने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बनने वाले सहवाग का मानना है कि इस पड़ोसी देश के साथ क्रिकेट खेली जानी चाहिए लेकिन इसमें अंतिम फैसला सरकार का होगा। उन्होंने इस संबंध में पूछे गए सवाल पर कहा, 'यह सरकार को तय करना है। मेरी निजी राय है कि भारत को पाकिस्तान से क्रिकेट खेलनी चाहिए। सहवाग के बारे में कहा जाता है कि जब वह क्रीज पर उतरते थे तो यह परवाह नहीं करते थे कि सामने कौन सा गेंदबाज है। लेकिन दिल्ली के इस बल्लेबाज ने माना कि श्रीलंका के ऑफ स्पिनर मुथैया मुरलीधरन को खेलने में उन्हें कुछ अवसरों पर परेशानी हुई। उन्होंने कहा, 'मैंने कभी किसी गेंदबाज को खेलने के बारे में ज्यादा नहीं सोचा लेकिन मुरलीधरन को खेलने में थोड़ी मुश्किल हुई। उनके लिए अलग से रणनीति बनानी पड़ती थी। जहां तक सलामी जोड़ीदार की बात है, तो मैंने सचिन तेंडुलकर के साथ पारी का आगाज करने का पूरा लुत्फ उठाया। उनके बाद (एडम) गिलक्रिस्ट का नंबर आता है।'  

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