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अंतरराष्ट्रीय अदालत में बहुमत मिलने के बावजूद जज दलवीर भंडारी का चुनाव अधर में

Publish Date: November 14 2017 06:21:14pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): अंतरराष्ट्रीय अदालत में अपने जज  की सीट को पक्का करने के लिए भारत को अभी और दबाव बनाना पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) में बतौर जज दूसरे कार्यकाल के लिए भारतीय जज दलवीर भंडारी का चुनाव अभी अधर में है। एक सीट पर चुनाव के लिए भारत के दलवीर भंडारी और ब्रिटेन के क्रिस्टफर ग्रीनवुड के बीच सोमवार को भी चुनाव बेनतीजा रहा। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत का पवड़ा भारी है लेकिन इसमें लेकिन ब्रिटेन के सुरक्षा परिषद में होने के नाते पी-5 समूह राह में रोड़ा अटका रहा है।

कुछ भी हो बहुमत तो इंडियन जज के साथ है। इस मामले से दो बातें साफ हो गई हैं- पहला, भारत जैसे देशों के लिए बड़ा पावर शिफ्ट हुआ, जिसे रोका नहीं जा सकता।  दूसरी बात यह है कि एकाएक हुए इस बदलाव को स्वीकार करने के लिए महत्वपूर्ण संगठन तैयार नहीं है। इसे वे अपनी हार जैसा समझ रहे हैं। वर्षों से चल रही उनकी हैंकड़ी को भी खतरा बनता दिखाई दे रहा है। उनका पूरा जोर लगा है कि वे किसी तरह इस पावर शिफ्ट को रोक दें लेकिन वे कामयाब नहीं होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पक्ष में एक ऐसा मौहल बनाया है कि दीसरा पक्ष  अपने आप को लाचार सा समझ रहा है।

बात ऐसी है कि संयुक्त राष्ट्र के 70 वर्षों के इतिहास में एलीट पी-5 ग्रुप का कोई भी कैंडिडेट अंतरराष्ट्रीय अदालत से गैरहाजिर नहीं रहा। अब आखिरी दो उम्मीदवारों के लिए सीधा मुकाबला रह गया है। अंतिम दौर के मतदान में भंडारी को संयुक्त राष्ट्र महासभा में 121 वोट मिले। पिछले दौर के मतदान में 116 वोट मिले थे। यह भारत की बहुपक्षीय कूटनीति के लिए एक ईनाम की तरह है। जबकि ग्रीनवुड का वोट पिछले बार के 76 से घटकर 68 रह गया। महासभा में पूर्ण बहुमत के लिए 97 मत मिलने जरूरी होते हैं। हालांकि मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अटक गया। भारतीय उम्मीदवार को 6 वोट मिले जबकि यूके के उम्मीदवार को 9 वोट मिले।
 
ताजा चुनाव से साफ है कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपना समर्थन नहीं खोया और पी-5 देश अपने में से एक उम्मीदवार को छोडऩा नहीं चाहते हैं। सामान्य परिस्थितियों में भंडारी के पक्ष में सुरक्षा परिषद के 1 या 2 वोट मिल सकते थे लेकिन पी-5 समूह के देश अपनी पोजीशन में बदलाव के लिए तैयार नहीं दिखते। लेकिन वास्तविकता यह है कि भारत (जो पी-5 का सदस्य नहीं है) ने यूके की दावेदारी को रोक रखा है। भारत ने दिखा दिया है कि लंबे समय तक पी-5 का वर्चस्व नहीं रह सकता है। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भंडारी के दोबारा चुने जाने के लिए अपनी कूटनीति के तहत अभियान जारी रखा हुआ है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रमुख सदस्यों के साथ शिखर सम्मेलनों में इस मामले को उठाया। लेकिन एनएसजी में प्रवेश की तरह इसमें भी भारत को रुकावट का सामना करना पड़ा है। इस बीच, कांग्रेस के नेता शशि थरूर ने आरोप लगाया है कि ब्रिटेन संयुक्त राष्ट्र महासभा के बहुमत की इच्छा को बाधित करने की कोशिश कर रहा है। 

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