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खट्टर-केजरीवाल मुलाकात

Publish Date: November 17 2017 12:37:43pm

देश की राजधानी दिल्ली को स्मॉग से मुक्ति दिलाने हेतु गत बुधवार को चंडीगढ़ में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के निवास पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पहुंचे। हरियाणा और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों के बीच प्रदूषण सहित दोनों प्रदेशों से संबंधित अन्य समस्याओं पर भी चर्चा हुई। चर्चा के बाद दोनों मुख्यमंत्रियों ने इस बैठक को सकारात्मक बताया। गौरतलब है कि दिल्ली में धुएं और धुंध के मिलन ने दिल्ली के रहने वालों के साथ-साथ लगते क्षेत्रों के लोगों के लिए भी सांस लेना मुश्किल किया हुआ था।

धुएं और धुंध के मिलन के कारण लोगों का जीना तो दुश्वर हुआ ही था स्थिति तब बद से बदतर हो गई जब उपरोक्त मुद्दे को लेकर राजनीति होने लगी थी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पैदा हुई समस्या के लिए हरियाणा और पंजाब को मुख्य दोषी ठहरा रहे थे। 

राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल ने केजरीवाल सरकार को जब प्रदूषण के मामले में दिखाई लापरवाही के लिए फटकार लगाई, साथ ही देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी दिल्ली सरकार द्वारा दी जा रही दलीलों को अस्वीकार कर दिया। अरविंद केजरीवाल को जब लगा कि वह प्रदूषण के मामले में अकेले पड़ते जा रहे हैं तब उन्होंने पड़ोसी प्रदेशों हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों के द्वार पर दस्तक दी। पंजाब के मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह ने दिल्ली के मुख्यमंत्री को ही मामले को हल्के में लेने की बात कह केजरीवाल से मिलने से ही इंकार कर दिया।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर अरविंद केजरीवाल से बातचीत करने को तैयार हो गए। चंडीगढ़ में दिल्ली व हरियाणा के मुख्यमंत्रियों में हुई बातचीत के दौरान जो मुख्य निर्णय लिए गए वह इस प्रकार हैं 'हरियाणा व दिल्ली में अब पुराने वाहनों के रजिस्टे्रशन नहीं होंगे। बैठक में पराली जलाने से रोकने और स्मॉग की समस्या से निपटने के रास्ते तलाशे। वार्ता में आठ बिन्दुओं पर सहमति हुई। गुरुग्राम बस डिपो के नए बेड़े में शामिल होने वाली 500 नई बसें सीएनजी वाली होंगी। इसके अलावा केएमपी (कुंडली मानेसर पलवल एक्सप्रेस वे) के निर्माण कार्य में तेजी लाने के साथ ही इस दौरान वहां पानी का छिड़काव किया जाएगा, ताकि प्रदूषण न फैले। द्वारका को गुडग़ांव में 150 मीटर चौड़े एनपीआर से जोडऩे के लिए एनसीटी दिल्ली में 80 मीटर चौड़े प्रस्तावित लिंक रोड का विकास और अधिग्रहण।

• बसंत कुंज फ्लायओवर के पास नेल्सन मंडेला टी पाइंट को एमजी रोड से जोडऩा। दिल्ली के अंधेरिया मोड़ के पास महरौली रोड से गडायपुर और मंडी के माध्यम से गवाल पाड़ी के पास गुडग़ांव-फरीदाबाद रोड तक लिंक रोड को चौड़ा करना। गुरुग्राम-मानेसर-शहरी काम्पलेक्स-2031 एडी के सेक्टर-109 और 114 के बीच दिल्ली क्षेत्र में 75 मीटर चौड़ी सड़क लिंक और नजफगढ़ रोड के साथ गुडग़ांव क्षेत्र को जोडऩा।  सोनीपत राजीव गांधी एजुकेशन सिटी (आरजीईसी) सोनीपत से युईआर जोन पी-आई 1 दिल्ली को 60 मीटर चौड़ी सड़क से जोडऩा। 

हरियाणा की सीमा तक चौड़ा करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग-8 के माध्यम से बवाना-ओचंडी सड़क को खरखौदा से जोड़ा जाए। • कैरियर लाइंड चैनल (सीएलसी) की निर्माण लागत के संबंध में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा 287.91 करोड़ रुपए की राशि का लम्बित भुगतान जारी न करना।

• दिल्ली जल बोर्ड द्वारा लंबित अतिरिक्त कच्चे पानी का शुल्क जारी न करना। • दिल्ली राज्य के किसानों को आपूर्ति किए गए सिंचाई पानी के लिए उनके द्वारा 2,74,78,664 रुपए की आबियाना राशि का भुगतान न करना। मनोहर लाल ने बैठक में कहा कि कैरियर लाइंड चैनल (सीएलसी) की निर्माण लागत का 287.91 करोड़ रुपए की राशि का लंबित भुगतान दिल्ली जल बोर्ड जारी नहीं कर रहा है। हरियाणा सिंचाई विभाग ने फरवरी 1993 में हरियाणा सरकार और एनओटी दिल्ली के बीच हुए समझौते के परिणामस्वरूप दिल्ली जल बोर्ड के डिपोजिट वर्क के रूप में विशेष तौर पर एनओटी दिल्ली के लिए पानी ले जाने के लिए आरडी 0 से 335986 तक डब्ल्यूजेसी प्रणाली के मुनक हेड से हैदरपुर ट्रीटमेंट प्लांट तक कैरियर लाइंड चैनल का निर्माण किया है। सीडब्ल्यूसी ने 667.26 करोड़ रुपए की राशि इस परियोजना की लागत को मंजूरी दी है, जिसमें से दिल्ली का हिस्सा 520.18 करोड़ रुपए है। दिल्ली ने अब तक 414.00 करोड़ रुपए की राशि जारी की है। इसलिए 106.18 करोड़ रुपए का बकाया और इस पर 18 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से ब्याज का भुगतान बाकी है। दिल्ली सरकार के आश्वासन के बावजूद राशि नहीं दे रही। हरियाणा सरकार अपने नहर तंत्र के माध्यम से दिल्ली के किसानों के लिए पानी की आपूर्ति कर रही है। संबंधित उपायुक्त को वसूली के लिए आबियाना भेजा जा रहा है। किसानों से 2,74,78,664 रुपए की राशि वसूली के लिए लंबित है।

उपरोक्त तथ्यों को देखते हुए कहा जा सकता है कि खट्टर पूरी तरह से बैठक के लिए तैयारी करके आये थे। देश की राजनीति को एक नई दिशा देने के लक्ष्य को लेकर राजनीति में आये केजरीवाल ने आक्रामक तथा टकराव वाली राजनीति को आधार बनाकर देश की राजनीति में आगे बढऩे का प्रयास किया। शुरू-शुरू में तो जन साधारण ने अरविंद केजरीवाल की कही बातों को गंभीरता से लिया तथा अरविंद केजरीवाल प्रति आकर्षित भी रहे। लेकिन दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेतृत्व द्वारा की जा रही नकारात्मक राजनीति के परिणामस्वरूप अरविंद केजरीवाल दिल्ली से बाहर अपने पैर पसारने में असफल रहे। आज तो स्थिति यह है कि दिल्ली में भी उनके पैरों तले से जमीन खिसकती दिखाई दे रही है।
उपरोक्त राजनीतिक स्थिति को देखते हुए ही अरविंद केजरीवाल ने पड़ोसी प्रदेशों से बातचीत कर समस्या का हल ढूंढने का प्रयास किया है। 

प्रदूषण मुक्त दिल्ली करने के लिए पड़ोसी राज्यों के सहयोग की जिस तरह आवश्यकता है उसी तरह अन्य समस्याओं के समाधान के लिए एक-दूसरे राज्यों के सहयोग की समय-समय पर आवश्यता पड़ती रहती है। केजरीवाल देर से ही सही पर सही रास्ते पर आते दिखाई दे रहे हैं। मनोहर लाल खट्टर ने बातचीत के दौरान जहां अपनी राजनीतिक परिपक्वता को दर्शाया है वही सकारात्मक राजनीति को भी बढ़ावा दिया है। मनोहर लाल खट्टर ने व्यवहारिक होकर ही सारे निर्णय लिए हैं। अरविंद केजरीवाल की राजनीतिक सफलता भी उनकी सकारात्मक सोच पर ही निर्भर रहेगी। केजरीवाल खट्टर के साथ हुई मुलाकात में लिए निर्णयों को अगर व्यवहारिक होकर लागू करेंगे तो ही वह हरियाणा सरकार  का भी सहयोग पा सकेंगे। मुलाकात को अगर राजनीतिक लाभ-हानि के हिसाब से देख कर केजरीवाल अपनी रणनीति बनाते हैं तो यह बात उनके लिए तथा दिल्ली वासियों के लिए भी कठिनाईयां ही बढ़ाएंगी। अरविंद केजरीवाल का तो वर्तमान में एक ही लक्ष्य होना चाहिए सकारात्मक सोच व राजनीति।

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