Monday, December 11,2017     ई पेपर
ब्रेकिंग न्यूज़
राजनीति

समाज भलाई

Publish Date: November 18 2017 12:47:47pm

वर्तमान दौर में धन और भौतिक सुख-सुविधा के लिए ही इंसान दिन-रात एक कर रहा है लेकिन कुछ ही भाग्यशाली होते हैं जो अपने पुरुषार्थ से लक्ष्य प्राप्ति में सफल रहते हैं। अधिकतर का तो 99 के चक्कर में ही जीवन व्यतीत हो जाता है। पिछले दिनों छपी एक रिपोर्ट अनुसार विश्व में 1 प्रतिशत लोग हैं जिनका विश्व की 90 प्रतिशत धन दौलत पर कब्जा है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विश्व भर में असमानता बढ़ रही है। विश्व के अरबपतियों और करोड़पतियों में भारत के भी कुछ नाम आते हैं। देश में हो रहे आर्थिक परिवर्तन के परिणामस्वरूप निकट भविष्य में करोड़पतियों की संख्या बढऩे वाली है।

धन दौलत पाने के लिए पुरुषार्थ करने वालों में सफल हुए भारतीय अरबपतियों में कुछ ऐसे भी हैं जो इस बात को समझते हैं कि धन-दौलत साथ जाने वाली नहीं है। दूसरी बात यह है कि जिस समाज से यह धन-दौलत कमाया है उसकी भलाई के लिए भी हमें कुछ करना चाहिए। ऐसे ही कुछ दानवीरों में, जो समाज के प्रति अपना कर्तव्य समझते हुए अपनी कमाई का एक भाग समाज भलाई में लगा रहे हैं, में एक हैं रोहनी नीलेकणी जो कि स्वयं एक लेखिका और अरोग्यम संस्था की चेयरपर्सन हैं। इनके पति नंदन नीलेकणी विख्यात उद्योगपति हैं। नीलेकणी दम्पति ने अपनी आय का 10 प्रतिशत समाज भलाई के लिए रखा है। रोहिनी नीलेकणी ने समाज भलाई के लिए बनाये अरोग्यम फाऊंडेशन के 2001 में 100 करोड़ रुपए दान किए थे। तब से आज तक समाज भलाई के लिए नियमित रूप से दान करते चले आ रहे हैं। अपनी कमाई का 10 प्रतिशत यह दम्पति स्वास्थ्य, शिक्षा और पानी, न्याय इत्यादि क्षेत्र में खर्च करता है।

अरबपति राकेश झुनझुनवाला ने शपथ ली है कि जब वह 2020 में 60 के हो जाएंगे तो वह 5000 करोड़ रुपए दान करेंगे। विपरो के चेयरपर्सन प्रेमजी 2001 से लेकर आज तक करीब 63,000 करोड़ रुपया समाजिक भलाई के कार्यों में लगा चुके हैं। प्रेमजी ने अपनी अजीम प्रेम जी फाऊंडेशन के माध्यम से करीब 3 लाख 50,000 स्कूलों को जोकि देश के 15 राज्यों में फैले हुए को दिए हैं। पीरामल ग्रुप के अजय पीरामल ने प्राइमरी शिक्षा के लिए 3000 करोड़ रुपए दान दिए हैं। अजय पीरामल का मानना है कि आप सरकार के साथ मिलकर ही अपना लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं।

भारत में आ रही आर्थिक मजबूती के कारण पिछले कुछ वर्षों में अरबपतियों की संख्या बढ़ रही है और समाज व देश प्रति अपनी जिम्मेवारी संभालने वाले कुछ दानवीर सज्जनों ने महाभारत के समय के दानवीर कर्ण की राह पर चलते हुए दान में तथा समाज भलाई के कार्यों में अरबों-करोड़ों रुपए खर्च किए। उपरोक्त सभी महानुभावों को सलाम करते हुए देश के धनाढ्य वर्ग से आग्रह है कि अपने सामथ्र्य अनुसार उन्हें भी समाज भलाई के कार्यों में योगदान देना चाहिए।

कटु सत्य यही है कि आज पैसा प्रधान बन गया है। यह धन किसने किस तरह कमाया है उस ओर किसी का ध्यान नहीं। दूसरी बात यह है कि धन के साथ सुख जोड़कर देखा जा रहा है जबकि सुख तो संतुष्टी में छिपा है। उपरोक्त जिन लोगों का जिक्र हुआ है वह संतुष्ट होने के बाद अब समाज भलाई में सुख देखने लगे हैं। जिस समाज ने हमें उपरोक्त सब कुछ दिया है उसके प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाना सबका कर्तव्य है। जो जहां, जिस जगह है वह समाज हित के लिए कुछ कर सकता है। अगर उस की इच्छा हो तो, अगर इच्छा ही नहीं तो फिर सौ बहाने हैं। धन ही नहीं, कई और माध्मय हैं जिनसे आप समाज सेवा कर सकते हैं, एक वृक्ष लगाकर, एक भूखे पेट को खाना देकर या एक अशिक्षित को शिक्षा देकर उनकी सेवा कर सकते हैं।

पानी, हवा तथा भूमि के प्रति अपने कर्तव्य को समझते हुए आप कई प्रकार के समाज भलाई के काम कर सकते हैं। इसमें धन से कहीं अधिक आप की इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। आप अपने आस-पड़ोस के गरीब परिवारों को अपना सकते हैं। परिवार में कार्य करने वाले सेवादारों के बच्चों को अपना सकते हैं। अपने बेकार पड़े कपड़ों, जूतों और अन्य वस्तुओं को दान में दे सकते हैं जो किसी अन्य के लिए नये हैं और उपयोगी भी।

यह बात जरूरी नहीं है कि सौ या हजार करोड़ होने के बाद ही दान करंे या भलाई के काम करें। यह तो आपको एहसास होने पर निर्भर है। कई अरबपति या करोड़पति ऐसे भी होंगे जिनको समाज प्रति अपनी जिम्मेवारी का एहसास नहीं और इसी कारण कुछ विशेष नहीं कर रहे। दूसरी तरफ एक जन साधारण गरीब परिवारों के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देकर अपना योगदान डाल रहा है।

जो अकेले समाज भलाई की जिम्मेवारी नहीं ले सकते वह समाज भलाई का कार्य कर रहे संगठनों को सहायता व सहयोग देते हैं। कहने का भाव यह है कि जिस देश में जिस समाज में आप पैदा हुए हैं और जिसने आप को सब कुछ दिया है उसके प्रति अपनी जिम्मेवारी समझते हुए उसकी सेवा करना ही है। हमारा कर्तव्य धर्म है, सभी सुखी रहें सभी निरोगी रहें। वेदों में यह प्रार्थना की गई है गुरुओं ने भी सरबत के भले का संदेश विश्व को दिया है। यह तभी संभव है जब हम में से प्रत्येक समाज के प्रति अपने कर्तव्य को समझते हुए समाज भलाई के कार्यों में सहयोग दे।



- इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

WhatsApp पर न्यूज़ Updates पाने के लिए हमारे नंबर 7400023000 को अपने Mobile में Save करके इस नंबर पर Missed Call करें ।


एचडब्ल्यूएल फाइनल्स : आस्ट्रेलिया ने अर्जेटीना को मात दे जीता खिताब

भुवनेश्वर (उत्तम हिन्दू न्यूज): पेनाल्टी कॉर्नर विशेषज्ञ ब्ले...

कुछ ऐसा था विराट-अनुष्का की शादी का नजारा, देखें तस्वीरें

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : जिन तस्वीरों का इंतजार पूरा देश कर रहा था, आखिरकार वह तस्...

top